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Mirzapur News: बादलों की आवाजाही से लुढ़का दो डिग्री अधिकतम तापमान
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मिर्जापुर। जून में मौसम ने अचानक करवट बदली है। पिछले दो दिनों से रात में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। बुधवार की देर रात हुई बारिश का असर बृहस्पतिवार को दिखाई दिया। अधिकतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया। बृहस्पतिवार की सुबह आसमान बादल छाए रहे। दिनभर धूप और छांव का सिलसिल जारी रहा। बुधवार की देररात हुई बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव और कीचड़ की समस्या भी देखने को मिली। मंडलीय चिकित्सालय और सीडीओ आवास के सामने सुबह तक बारिश का पानी भरा रहा। रमईपट्टी-कनौराघाट मार्ग पर कई स्थानों पर कीचड़ पसरा रहा। इससे राहगीरों को दिक्क्त हुई। मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस था। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 24 घंटे में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं।
-शिवमंगल सिंह, मौसम वैज्ञानिक, ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू-भौतिकी विभाग, बीएचयू वाराणसी ने कहा कि
पश्चिमी विक्षोभ के चलते आने वाले दिनों में आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। बादलों की सक्रियता के कारण तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। साथ ही हवा की गति सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक रहने की संभावना है
इनसेट
मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें किसान : मिर्जापुर। मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और इसका सीधा असर खेती पर पड़ने लगा है। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क करते हुए मौसम आधारित खेती अपनाने की सलाह दी है। उप कृषि निदेशक विकेश कुमार सिंह पटेल ने बताया कि इस वर्ष मानसून की शुरुआत अच्छी रहने की संभावना है। जुलाई और अगस्त में बारिश कम अथवा अनियमित हो सकती है। ऐसे में पारंपरिक खेती के बजाय परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति अपनाना किसानों के लिए जरूरी है।उन्होंने किसानों से मौसम के पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखने की अपील की। कहा कि कम अवधि में तैयार होने वाली तथा सूखा सहनशील किस्मों का चयन करें। समय से बुआई और रोपाई करें। धान की खेती करने वाले किसानों को 15 जून से 10 जुलाई के बीच रोपाई करने की सलाह दी। दालों की बोआई जून के अंत तक करने पर जोर दिया। मक्के की बोआई 20 जून से 5 जुलाई के बीच करने को कहा। फसल बीमा कराने की भी सलाह दी है।
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-शिवमंगल सिंह, मौसम वैज्ञानिक, ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू-भौतिकी विभाग, बीएचयू वाराणसी ने कहा कि
पश्चिमी विक्षोभ के चलते आने वाले दिनों में आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। बादलों की सक्रियता के कारण तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। साथ ही हवा की गति सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक रहने की संभावना है
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इनसेट
मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें किसान : मिर्जापुर। मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और इसका सीधा असर खेती पर पड़ने लगा है। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क करते हुए मौसम आधारित खेती अपनाने की सलाह दी है। उप कृषि निदेशक विकेश कुमार सिंह पटेल ने बताया कि इस वर्ष मानसून की शुरुआत अच्छी रहने की संभावना है। जुलाई और अगस्त में बारिश कम अथवा अनियमित हो सकती है। ऐसे में पारंपरिक खेती के बजाय परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति अपनाना किसानों के लिए जरूरी है।उन्होंने किसानों से मौसम के पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखने की अपील की। कहा कि कम अवधि में तैयार होने वाली तथा सूखा सहनशील किस्मों का चयन करें। समय से बुआई और रोपाई करें। धान की खेती करने वाले किसानों को 15 जून से 10 जुलाई के बीच रोपाई करने की सलाह दी। दालों की बोआई जून के अंत तक करने पर जोर दिया। मक्के की बोआई 20 जून से 5 जुलाई के बीच करने को कहा। फसल बीमा कराने की भी सलाह दी है।