Mirzapur News: हटाया गया सोनवर्षा प्रधान, पशुधन प्रसार अधिकारी समेत दो निलंबित; पशु तस्करी में बड़ी कार्रवाई
Mirzapur News: मिर्जापुर के सोनवर्षा स्थित गोआश्रय स्थल के केयर टेकर के साथ मिलकर संरक्षित पशुओं की तस्करी करने का मामला सामने आया था। लालगंज थाने की पुलिस आरोप से पूछताछ कर रही है। जिलाध्यक्ष काफी समय से गो-वंश की तस्करी करा रहा था।
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UP News: पशु तस्करी के मामले में डीएम पवन कुमार गंगवार ने सोनवर्षा के प्रधान श्याम बहादुर पटेल को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर ग्राम पंचायत अधिकारी कृष्ण लाल व पशुधन प्रसार अधिकारी जगदंबा प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
डीएम ने उप जिलाधिकारी लालगंज से कहा कि धोबहा देवघटा सोनवर्षा में विकास कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नियमानुसार ग्राम पंचायत या ग्रामसभा की बैठक कराएं। इसमें निर्वाचित सदस्यों में से किसी एक सदस्य का नाम अस्थायी रूप से प्रधान पद के लिए तत्काल प्रस्तावित करना सुनिश्चित करें।
बताया कि निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल सोनवर्षा में अभिलेखीय व स्थल संरक्षित गोवंशों की संख्या में भिन्नता मिली है. गोवंश आश्रय स्थल पर रखे गए सभी गोवंशों की टैगिंग नहीं हुई है। साथ ही शासकीय कार्यों में रुचि नहीं लेने तथा सौंपे गए दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही शिथिलता बरतने पर पशुधन प्रसार अधिकारी जगदंबा प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
दस दिन पहले ही 25 किसानों ने 64 गोवंशों को पहुंचाया था गोआश्रय स्थल
किसानों को गुमराह कर प्रधान और अपना दल कमेरावादी का जिलाध्यक्ष श्याम बहादुर पटेल और उसका बेटा छुट्टा मवेशियों को अपने स्वार्थ के लिए निशाना बनाते थे। फसल को नुकसान पहुंचा रहे पशुओं को किसानों से पकड़वा कर वे गोआश्रय स्थल में रखने के बहाने मंगाते थे। इसके बाद वहां से वाहनों पर लदवाकर भेज देते थे। दस दिन पहले ही 25 किसानों ने 64 गोवंशों को गोआश्रय स्थल पहुंचाया था। ये सिर्फ एक मामला है। ऐमी कई परतें खुलनी अभी बाकी हैं। गो आश्रय स्थल तक पशुओं को लाने का काम केवल आम जनता को दिखाने के लिए किया जाता था। ऐसे मवेशियों की टैगिंग नहीं करते थे। ऐसे में आश्रय स्थल से जुड़े कर्मियों के कामकाज पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
हलिया के राजपुर के रहने वाले जगजीवन ने बताया कि उनका पूरा इलाका छुट्टा पशुओं से परेशान है। रात में सैकड़ों की संख्या में गोवंश आते हैं और खेत की फसल को चट कर जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधान के बेटे ने कुछ दिन पहले संदेश भेजा कि वे अगर पशुओं को पकड़कर लाते हैं तो वे गो आश्रय स्थल में उन्हें रख लेंगे। फसलों को बचाने के लिए 25 किसान 22 जनवरी 64 गोवंशों को लेकर पैदल गोआश्रय स्थल पहुंचे थे।
राजपुर के ही किसान नूर मोहम्मद ने बताया कि प्रधान पुत्र ने उन्हें फोन कर पशुओं को मंगाया। पशु लेकर 22 जनवरी को पहुंचने पर उनसे पशुओं को बांधने वाली रस्सी के लिए साढ़े छह हजार रुपये मांगे। उन्होंने ढाई हजार ऑनलाइन पेमेंट भी दिखाया। बाद में वो लोग पशुओं को बाड़े में छोड़कर चले आए। उन्होंने आशंका जताई की बाद में पशुओं को वहां से वाहनों पर लादकर भेज दिया गया होगा। अमरेश गुप्ता ने भी यही शिकायत की। स्थानीय लोगों ने बताया कि छुट्टा पशुओं को प्रधान का गिरोह निशाना बनाता था। वे उसे गोआश्रय स्थल में रखने के बहाने लाते थे और फिर बेच देते थे। इनकी टैगिंग न होने से गोवंश की ट्रैकिंग भी संभव नहीं होती थी।
डिप्टी सीवीओ तेजेंद्र सिंह से जब 22 जनवरी के रिकाॅर्ड के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी न होने की बात कही। पशु आश्रय स्थल से पहले कभी पशुओं की चोरी की कोई शिकायत मिलने, आशंका व्यक्त किए जाने के मामले से भी इन्कार किया।
इन पशु आश्रय स्थलों पर इतने गोवंश
महुलार गो आश्रय स्थल पर 782 गोवंश, उमरिया में 705, सोनबरसा गोशाला में 600, गौरवा में 430, हलिया में 403, बामी में 357, गलरा में 351, गुर्गी में 347, उसरी खमरिया में 260 गोवंश हैं।
