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Mirzapur News: यात्री ट्रेनों का ठहराव न होने से नाराज ग्रामीणों का स्टेशन पर प्रदर्शन
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यात्री ट्रेन के ठहराव की मांग को लेकर सरसो स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करते ग्रामीण।-सोशल मीडिया।
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36 वर्ष बाद स्टेशन का पुनर्निर्माण, लेकिन यात्री ट्रेनों के अभाव में लोगों को नहीं मिल रहा लाभ
फोटो- 11
सक्तेशगढ़। राजगढ़ ब्लाॅक के नक्सल प्रभावित क्षेत्र स्थित सरसो रेलवे स्टेशन पर रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर नारेबाजी करते हुए एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों की ठहराव की मांग किए। ग्रामीणों ने कहा कि 36 वर्ष बाद स्टेशन का पुनर्निर्माण हुआ। उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन यहां केवल मालगाड़ियों का संचालन होने से क्षेत्रवासियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार स्टेशन पर यात्री ट्रेनों का ठहराव न होने से वाराणसी, मिर्जापुर, चुनार, लखनऊ और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों की यात्रा के लिए लोगों को दूसरे स्टेशनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों का नुकसान होता है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि पहले त्रिवेणी एक्सप्रेस, मुरी एक्सप्रेस और इंटरसिटी जैसी ट्रेनों के ठहराव से शिक्षा, रोजगार, व्यापार और चिकित्सा संबंधी कार्यों के लिए आवागमन आसान था। ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद क्षेत्र के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए चुनार, मिर्जापुर या वाराणसी जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की कि सरसो ग्राम स्टेशन पर कम से प्रमुख एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित की जाए, ताकि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके। इस संबंध में स्टेशन मास्टर उमेश चंद ने बताया कि वर्तमान में स्टेशन पर केवल मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। कोई यात्री ट्रेन नहीं रुकती। वहीं पूर्व सांसद रमाशंकर सिंह पटेल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही रेलवे प्रशासन से वार्ता कर सकारात्मक पहल की जाएगी। प्रदर्शन में राजबली, जग्गू कोल, विनोद कुमार, दुर्गेश पांडेय, ग्राम प्रधान शिवकुमार, प्रकाश पांडेय, दिनेश पाल, राजनाथ पाल, इंद्रावती, उर्मिला, राजकुमारी, सुखी समेत दर्जनों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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सक्तेशगढ़। राजगढ़ ब्लाॅक के नक्सल प्रभावित क्षेत्र स्थित सरसो रेलवे स्टेशन पर रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर नारेबाजी करते हुए एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों की ठहराव की मांग किए। ग्रामीणों ने कहा कि 36 वर्ष बाद स्टेशन का पुनर्निर्माण हुआ। उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन यहां केवल मालगाड़ियों का संचालन होने से क्षेत्रवासियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार स्टेशन पर यात्री ट्रेनों का ठहराव न होने से वाराणसी, मिर्जापुर, चुनार, लखनऊ और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों की यात्रा के लिए लोगों को दूसरे स्टेशनों का सहारा लेना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों का नुकसान होता है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि पहले त्रिवेणी एक्सप्रेस, मुरी एक्सप्रेस और इंटरसिटी जैसी ट्रेनों के ठहराव से शिक्षा, रोजगार, व्यापार और चिकित्सा संबंधी कार्यों के लिए आवागमन आसान था। ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद क्षेत्र के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए चुनार, मिर्जापुर या वाराणसी जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की कि सरसो ग्राम स्टेशन पर कम से प्रमुख एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित की जाए, ताकि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके। इस संबंध में स्टेशन मास्टर उमेश चंद ने बताया कि वर्तमान में स्टेशन पर केवल मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। कोई यात्री ट्रेन नहीं रुकती। वहीं पूर्व सांसद रमाशंकर सिंह पटेल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही रेलवे प्रशासन से वार्ता कर सकारात्मक पहल की जाएगी। प्रदर्शन में राजबली, जग्गू कोल, विनोद कुमार, दुर्गेश पांडेय, ग्राम प्रधान शिवकुमार, प्रकाश पांडेय, दिनेश पाल, राजनाथ पाल, इंद्रावती, उर्मिला, राजकुमारी, सुखी समेत दर्जनों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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