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Moradabad News: मोरा की मिलक में बंदरों का आंतक, आठ को काटकर किया घायल
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मुरादाबाद। शहर का मोरा की मिलक इलाका इन दिनों बंदरों के आतंक से दहशत में है। हालात ऐसे हैं कि लोग घर की छत पर जाने और बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं। दो दिनों में बंदरों ने आठ लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। कई लोगों के हाथ, गर्दन और शरीर पर गहरे घाव आए हैं। सबसे गंभीर बात यह रही कि लोगों की शिकायत के बावजूद नगर निगम और वन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
बुधवार को लगातार हमलों के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम और वन विभाग के अधिकारियों को फोन कर बंदरों को पकड़वाने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें केवल एक-दूसरे विभाग का हवाला मिलता रहा। कार्रवाई न होने से लोगों में आक्रोश बढ़ गया। बृहस्पतिवार को बंदरों ने फिर कई लोगों पर हमला कर दिया। दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद परेशान लोगों ने 112 पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित विभागों तक शिकायत पहुंचाकर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
स्थानीय निवासी सरकार हुसैन ने बताया कि वह साथियों के साथ गली में बैठे थे, तभी एक बंदर ने अचानक उनकी गर्दन पर हमला कर दिया। किसी तरह खुद को छुड़ाया तो बंदर ने हाथ काट लिया, जिससे गहरा जख्म हो गया। कमल कुमार पर घर की छत पर हमला हुआ, जबकि अब्दुल रहमान, बसंत लाल और संजीव कुमार भी बंदरों के हमले में घायल हुए। लगातार हो रहे हमलों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
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लोगों के कोट्स (फोटो)
मैं साथियों के साथ गली में बैठा था। अचानक बंदर ने गर्दन पर हमला कर दिया। किसी तरह बचा तो हाथ काट लिया। गहरा जख्म हुआ है। अब बाहर निकलने से भी डर लगता है। प्रशासन जल्द बंदरों को पकड़वाए, नहीं तो किसी की जान भी जा सकती है।
- सरकार हुसैन
मैं अपने घर की छत पर बैठा था। अचानक बंदर ने हमला कर दिया। हाथ में गहरा घाव हो गया है। किसी तरह जान बचाकर नीचे भागा। अब परिवार के लोग बच्चों को छत पर भी नहीं जाने दे रहे हैं। पूरे मोहल्ले में हर समय डर का माहौल बना हुआ है।
- कमल कुमार
नगर निगम और वन विभाग को कई बार फोन किया, लेकिन कोई मौके पर नहीं आया। हर विभाग जिम्मेदारी दूसरे पर डाल रहा है। आखिर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। कार्रवाई में देरी लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
- अब्दुल रहमान
बंदर इतने आक्रामक हो गए हैं कि बिना उकसावे के हमला कर रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। मोहल्ले के लोग अब अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। प्रशासन को तुरंत अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ना चाहिए।
- बसंत लाल
दो दिन में आठ लोगों पर हमला होना बेहद गंभीर मामला है। शिकायत करने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अगर यही स्थिति रही तो किसी दिन बड़ा हादसा हो जाएगा। मेरे हाथ से बहुत खून निकला है। अस्पताल जाकर वैक्सीन लगवाई और पट्टी कराई।
- संजीव कुमार
हम बच्चों को घर से बाहर खेलने नहीं भेज रहे हैं। छत पर कपड़े सुखाने जाना भी मुश्किल हो गया है। आज हमारे माली को बंदर ने काट लिया। हर समय बंदरों का झुंड घूमता रहता है। प्रशासन को बहाने छोड़कर तुरंत राहत दिलानी चाहिए, ताकि लोग भयमुक्त होकर रह सकें।
- पलक रस्तोगी
वर्जन
शहर में बंदरों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। वन विभाग को ही इसके लिए टीम बनानी है और बंदरों को कहां छोड़ना है यह भी वन विभाग तय करेगा। निगम का इसमें सीधे कोई हस्तक्षेप नहीं है।
- दिव्यांशु पटेल, नगर आयुक्त
जहां सूचना मिलती है, वहां बंदरों को पकड़ने के लिए टीम को भेजा जाता है। हम टीम तैयार कर रहे हैं। जितने संसाधन हमारे पास हैं, उनके मुताबिक कार्य किया जा रहा है।
- डॉ. विनय कुमार, डीएफओ
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बुधवार को लगातार हमलों के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम और वन विभाग के अधिकारियों को फोन कर बंदरों को पकड़वाने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें केवल एक-दूसरे विभाग का हवाला मिलता रहा। कार्रवाई न होने से लोगों में आक्रोश बढ़ गया। बृहस्पतिवार को बंदरों ने फिर कई लोगों पर हमला कर दिया। दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद परेशान लोगों ने 112 पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित विभागों तक शिकायत पहुंचाकर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
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स्थानीय निवासी सरकार हुसैन ने बताया कि वह साथियों के साथ गली में बैठे थे, तभी एक बंदर ने अचानक उनकी गर्दन पर हमला कर दिया। किसी तरह खुद को छुड़ाया तो बंदर ने हाथ काट लिया, जिससे गहरा जख्म हो गया। कमल कुमार पर घर की छत पर हमला हुआ, जबकि अब्दुल रहमान, बसंत लाल और संजीव कुमार भी बंदरों के हमले में घायल हुए। लगातार हो रहे हमलों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
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लोगों के कोट्स (फोटो)
मैं साथियों के साथ गली में बैठा था। अचानक बंदर ने गर्दन पर हमला कर दिया। किसी तरह बचा तो हाथ काट लिया। गहरा जख्म हुआ है। अब बाहर निकलने से भी डर लगता है। प्रशासन जल्द बंदरों को पकड़वाए, नहीं तो किसी की जान भी जा सकती है।
- सरकार हुसैन
मैं अपने घर की छत पर बैठा था। अचानक बंदर ने हमला कर दिया। हाथ में गहरा घाव हो गया है। किसी तरह जान बचाकर नीचे भागा। अब परिवार के लोग बच्चों को छत पर भी नहीं जाने दे रहे हैं। पूरे मोहल्ले में हर समय डर का माहौल बना हुआ है।
- कमल कुमार
नगर निगम और वन विभाग को कई बार फोन किया, लेकिन कोई मौके पर नहीं आया। हर विभाग जिम्मेदारी दूसरे पर डाल रहा है। आखिर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। कार्रवाई में देरी लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
- अब्दुल रहमान
बंदर इतने आक्रामक हो गए हैं कि बिना उकसावे के हमला कर रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। मोहल्ले के लोग अब अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। प्रशासन को तुरंत अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ना चाहिए।
- बसंत लाल
दो दिन में आठ लोगों पर हमला होना बेहद गंभीर मामला है। शिकायत करने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अगर यही स्थिति रही तो किसी दिन बड़ा हादसा हो जाएगा। मेरे हाथ से बहुत खून निकला है। अस्पताल जाकर वैक्सीन लगवाई और पट्टी कराई।
- संजीव कुमार
हम बच्चों को घर से बाहर खेलने नहीं भेज रहे हैं। छत पर कपड़े सुखाने जाना भी मुश्किल हो गया है। आज हमारे माली को बंदर ने काट लिया। हर समय बंदरों का झुंड घूमता रहता है। प्रशासन को बहाने छोड़कर तुरंत राहत दिलानी चाहिए, ताकि लोग भयमुक्त होकर रह सकें।
- पलक रस्तोगी
वर्जन
शहर में बंदरों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी वन विभाग की है। वन विभाग को ही इसके लिए टीम बनानी है और बंदरों को कहां छोड़ना है यह भी वन विभाग तय करेगा। निगम का इसमें सीधे कोई हस्तक्षेप नहीं है।
- दिव्यांशु पटेल, नगर आयुक्त
जहां सूचना मिलती है, वहां बंदरों को पकड़ने के लिए टीम को भेजा जाता है। हम टीम तैयार कर रहे हैं। जितने संसाधन हमारे पास हैं, उनके मुताबिक कार्य किया जा रहा है।
- डॉ. विनय कुमार, डीएफओ