Moradabad: अब नामांतरण शुल्क से शहरियों की जेब ढीली कराएगा नगर निगम, संपत्ति दर्ज कराने की भी देनी होगी कीमत
नगर निगम की बोर्ड बैठक में संपत्ति नामांतरण शुल्क लागू करने का प्रस्ताव पास किया गया है। इसके अलावा निगम ने आय बढ़ाने के लिए होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, नर्सिंग होम, डिलीवरी सेंटर पर भी वार्षिक लाइसेंस शुल्क लगाने का फैसला किया है।
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स्मार्ट सिटी का बाशिंदा होने का गर्व अब महंगा पड़ने वाला है। गृहकर-जलकर आदि की वसूली करने वाला नगर निगम अब नामांतरण शुल्क भी वसूलेगा। यानी कोई संपत्ति पिता से बेटे के नाम में दर्ज कराने की भी कीमत चुकानी होगी। वह भी ठीकठाक रकम के रूप में।
संपत्ति की खरीद-फरोख्त में रजिस्ट्री दफ्तर के बड़े खर्च उठाने, तहसील में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया की दौड़-भाग के साथ नगर निगम में संपत्ति की नामजदगी के लिए जेब ढीली करनी होगी। मंगलवार को टाउनहाॅल स्थित नगर निगम कार्यालय में हुई बोर्ड की बैठक में नामांतरण शुल्क का प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
इसके लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। 1000 वर्ग फीट तक की संपत्ति पर 1000 रुपये, इससे ऊपर 2000 वर्ग फीट तक पर 2000 रुपये, इससे ऊपर 3000 वर्ग फीट तक पर 3000 रुपये, इससे अधिक क्षेत्रफल पर 5000 रुपये शुल्क देना होगा।
यही नहीं निगम ने बैनामे की रकम के आधार पर भी शुल्क लगाने का प्रस्ताव पास किया है। पांच लाख रुपये तक के बैनामे पर 1000 रुपये, 10 लाख रुपये तक पर 2000 रुपये, 15 लाख रुपये तक के बैनामे पर 3000 रुपये, 15 लाख से अधिक के बैनामे पर 5000 रुपये शुल्क देना होगा।
यानी संपत्ति की कीमत जितनी बढ़ेगी, निगम का शुल्क भी उतना बढ़ेगा। इसके पीछे नगर निगम की आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने का तर्क दिया जा रहा है। इसके अलावा आमदनी बढ़ाने के नए प्रयोगों में अब होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट, नर्सिंग होम, डिलीवरी सेंटर, सड़क किनारे स्थित कार वॉशिंग सेंटर और ऑटो सर्विस सेंटर संचालकों से लाइसेंस शुल्क वसूला जाएगा।
ढाबे और रेस्टोरेंट पर 1000 रुपये सालाना लाइसेंस शुल्क लगेगा। दस कमरों वाले होटल से 3000 रुपये, इससे अधिक क्षमता वाले होटल से 5000 रुपये की दर तय की है। नर्सिंगहोम और डिलीवरी सेंटर पर भी क्षमता के अनुसार लाइसेंस शुल्क लागू होगा।
मेयर बोले, शहर में जगह-जगह अवैध होर्डिंग, ठेका नहीं बढ़ाएंगे
निगम के अधिकारियों की ओर से बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि विज्ञापन कंपनियों को पहले पांच वर्ष तक का ठेका दिया जाता था। अब इसे बढ़ाकर नौ प्लस तीन यानी 12 वर्ष किया जाएगा। मेयर विनोद अग्रवाल ने इसे नकार दिया। उन्होंने कहा कि शहर में जगह-जगह अवैध होर्डिंग लगे हैं। विज्ञापन के ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। इनका ठेका नहीं बढ़ाया जाएगा। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार ने तर्क दिया कि यह मामला शासन स्तर तक पहुंच चुका है। महापौर ने कहा कि जरूरत पड़ेगी तो शासन से भी अपील की जाएगी।
कारोबारियों पर पड़ेगा असर
इस नए प्रयोग से जहां कारोबारियों पर असर पड़ना तय है, वहीं शहरियों के होटल-रेस्टोरेंट से लेकर निजी डॉक्टर के इलाज के खर्च बढ़ना भी निश्चित है। कारण नगर निगम को अदा किए जाने वाले लाइसेंस शुल्क की भरपाई संबंधित कारोबारी अपने ग्राहक या उपभोक्ता से ही करेगा।
82 करोड़ से धीमरी में बनेगा शैक्षिक मनोरंजन पार्क, जुटेंगे 50 करोड़
संभल बाईपास स्थित धीमरी गांव में 82 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक शैक्षिक मनोरंजन पार्क बनाया जाएगा। यह परियोजना शिक्षा और मनोरंजन को एक साथ जोड़ने वाली होगी, जहां बच्चों और युवाओं को ज्ञानवर्धक गतिविधियों के साथ आकर्षक मनोरंजन सुविधाएं भी मिलेंगी।
नगर निगम बोर्ड की बैठक में अपर नगर आयुक्त ने यह जानकारी दी।महापौर विनोद अग्रवाल ने बताया कि इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। परियोजना की खास बात यह है कि कुल लागत में से 50 करोड़ रुपये आम जनता से निवेश के रूप में जुटाए जाएंगे।
निवेशकों को यह राशि 10 वर्ष के भीतर पार्क से होने वाली आय से ब्याज सहित वापस की जाएगी। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से 20 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी, जिससे परियोजना को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
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