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Moradabad: पद्मश्री लेकर गांव पहुंचीं प्रेमवती, समाथल में स्वागत; रघुपति सिंह के सपनों को आगे बढ़ाएगा परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलारी (मुरादाबाद)
Published by: Vimal Sharma
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:45 AM IST
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सार
मुरादाबाद के समाथल गांव निवासी दिवंगत किसान रघुपति सिंह को मरणोपरांत मिले पद्मश्री सम्मान को उनकी पत्नी प्रेमवती ने ग्रहण किया। दिल्ली से सम्मान लेकर गांव लौटने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। बेटे सुरेंद्र पाल सिंह ने पिता के बीज संरक्षण और कृषि अनुसंधान के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
पति रघुपति सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद गांव पहुंची प्रेमवती का हुआ स्वागत
- फोटो : संवाद
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विस्तार
दुर्लभ सब्जियों के बीजों के संरक्षण और कृषि क्षेत्र में नवाचार के लिए मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किसान रघुपति सिंह की उपलब्धि पर उनके गांव समाथल में जश्न का माहौल रहा। दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति से मिला पद्मश्री सम्मान उनकी पत्नी प्रेमवती ने ग्रहण किया।
बृहस्पतिवार को सम्मान लेकर गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया और रघुपति सिंह के कृषि क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय योगदान को याद किया। ग्रामीणों ने कहा कि रघुपति सिंह ने खेती को केवल जीविका का साधन नहीं माना बल्कि इसे नवाचार और संरक्षण का माध्यम बनाया।
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उन्होंने अपने जीवनकाल में 55 से अधिक दुर्लभ सब्जियों के बीजों का संरक्षण किया और पारंपरिक प्रजातियों को बचाने के लिए लगातार प्रयोग किए। उनके प्रयासों ने उन्हें देशभर में एक अलग पहचान दिलाई।
पति रघुपति सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद गांव पहुंची प्रेमवती का हुआ स्वागत
- फोटो : संवाद
गांव स्थित उनके आवास पर बधाई देने वाले लगातार पहुंच रहे हैं। परिजन और ग्रामीण बाद में गांव के जंगल क्षेत्र में स्थित उस प्रयोगशाला पर भी पहुंचे जहां रघुपति ने वर्षों तक सब्जियों की नई किस्मों और बीज संरक्षण पर काम किया था।
परिजनों ने उनकी प्रयोगशाला को उनके सपनों और मेहनत की विरासत बताया। बेटे सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि उनके पिता का मिशन केवल सम्मान पाने तक सीमित नहीं था। आने वाली पीढ़ियों के लिए पारंपरिक और दुर्लभ फसलों को संरक्षित करना उनका जीवन उद्देश्य था।
उन्होंने कहा कि परिवार अब इस मिशन को आगे बढ़ाएगा और प्रयोगशाला में चल रहे कार्यों को जारी रखेगा, ताकि किसानों को नई जानकारी और संरक्षित बीज उपलब्ध कराए जा सकें। ग्रामीणों का कहना है कि रघुपति सिंह को मिला पद्मश्री सम्मान न केवल समाथल गांव बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए गर्व है।
परिजनों ने उनकी प्रयोगशाला को उनके सपनों और मेहनत की विरासत बताया। बेटे सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि उनके पिता का मिशन केवल सम्मान पाने तक सीमित नहीं था। आने वाली पीढ़ियों के लिए पारंपरिक और दुर्लभ फसलों को संरक्षित करना उनका जीवन उद्देश्य था।
उन्होंने कहा कि परिवार अब इस मिशन को आगे बढ़ाएगा और प्रयोगशाला में चल रहे कार्यों को जारी रखेगा, ताकि किसानों को नई जानकारी और संरक्षित बीज उपलब्ध कराए जा सकें। ग्रामीणों का कहना है कि रघुपति सिंह को मिला पद्मश्री सम्मान न केवल समाथल गांव बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए गर्व है।