मुरादाबाद: मुस्तफा मस्जिद को जारी नोटिस वापस, दोबारा होगी पैमाइश, हाईकोर्ट में खुली क्षेत्रफल की गड़बड़ी
पाकबड़ा में टीएमयू के पास मुस्तफा मस्जिद के ध्वस्तीकरण का एमडीए का नोटिस क्षेत्रफल संबंधी त्रुटि के कारण वापस ले लिया गया। हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए एमडीए को दोबारा पैमाइश कर स्पष्ट नोटिस जारी करने की छूट दी है।
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पाकबड़ा में टीएमयू के पास स्थित मुस्तफा मस्जिद के ध्वस्तीकरण का नोटिस एमडीए ने वापस ले लिया है। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद एमडीए की ओर से जारी नोटिस में क्षेत्रफल को लेकर त्रुटि सामने आई है। सुनवाई के दौरान प्राधिकरण के अधिवक्ता ने अदालत में माना कि नोटिस अस्पष्ट था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका निस्तारित कर दी।
एमडीए ने 21 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 14 और 15 के तहत नोटिस जारी किया था। इसमें आरोप था कि दिल्ली रोड पर टीएमयू के पास, मोहल्ला ईदगाह पाकबड़ा में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए मस्जिद का निर्माण किया गया है। मस्जिद प्रबंधन से तीन सितंबर को प्राधिकरण कार्यालय में जवाब मांगा गया था।
नोटिस के खिलाफ मस्जिद कमेटी के जीशान अहमद फरीद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें नोटिस रद्द करने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने की मांग की गई थी। 28 सितंबर को जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दाैरान एमडीए के अधिवक्ता ने नोटिस वापस लेने की बात कही।
हालांकि एमडीए को नियमानुसार नया और स्पष्ट नोटिस जारी करने की छूट दी गई है। एमडीए वीसी अनुभव सिंह ने बताया कि मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल याचिका और विभाग की ओर से जारी नोटिस के क्षेत्रफल में अंतर पाया गया है। हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी आने के बाद एमडीए की टीम दोबारा मौके पर जाकर क्षेत्रफल की पैमाइश करेगी। इसके बाद दोबारा नोटिस जारी किया जाएगा।
मुस्तफा मस्जिद का नोटिस वापस लिया जाना महत्वपूर्ण प्रगति : मदनी
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि मुरादाबाद के पाकबड़ा स्थित मुस्तफा मस्जिद के मामले में पुराने शो-कॉज नोटिस का वापस लिया जाना हमारी कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण प्रगति है। मौलाना महमूद मदनी ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एमडीए ने नोटिस को अस्पष्ट बताते हुए उसे वापस लेने और कानून के अनुसार नया नोटिस जारी करने की बात कही है।
कहा कि यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है और आगे लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी है। जमीयत का उद्देश्य केवल मस्जिद का संरक्षण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक या धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही हो।