UP: चंदौसी के राजीव कुमार की सियासी एंट्री, डीजीपी पद से रिटायर होते ही ममता के करीबी को राज्यसभा टिकट
संभल जिले के रहने वाले और पश्चिम बंगाल के डीजीपी पद से सेवानिवृत्ति राजीव कुमार तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा की सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा चंदौसी में हुई। वह मुरादाबाद के पूर्व सांसद प्रोफेसर रामशरण के पोते हैं।
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वर्षों पहले आईपीएस बनकर चंदौसी का नाम रोशन करने वाले राजीव कुमार पश्चिम बंगाल डीजीपी के पद से सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा से सियासी पारी शुरू करेंगे। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से राज्यसभा के लिए जिन चार नामों की घोषणा की गई है, उनमें राजीव कुमार का नाम भी शामिल है।
राजीव कुमार का सियासत की डगर पर भले यह पहला कदम होगा लेकिन कम लोग जानते हैं कि वह एक दौर की राजनीति में बड़ा नाम रहे मुरादाबाद के पूर्व सांसद प्रोफेसर रामशरण के पोते हैं। राजीव कुमार की शुरुआती शिक्षा से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई चंदौसी में हुई थी।
उनके पिता प्रोफेसर आनंद कुमार चंदौसी के मशहूर कॉलेज (एसएम स्नातकोत्तर महाविद्यालय) में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष रहे थे। 12वीं में यूपी बोर्ड की मेरिट में स्थान और शहर के टॉपर की उपलब्धि हासिल करने वाले राजीव ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए एक ही वर्ष में एमएलएनआर, रुड़की यूनिर्विसिटी (तब रुड़की आईआईटी का दर्जा नहीं था) और आईआईटी में चयन में सफलता हासिल की थी।
बीटेक के बाद वह आईपीएस बनने में सफल रहे। पश्चिम बंगाल कैडर आवंटित होने के बाद उन्होंने उसी राज्य में आईपीएस की पारी कुछ दिन पहले ही पूरी की है। इस दौरान वह कोलकाता के पुलिस कमिश्नर समेत कई बड़े पदों पर रहे, जबकि पश्चिम बंगाल के डीजीपी का कार्यकाल पूरा होने के साथ उनकी सेवानिवृत्ति हो गई।
मूलरूप से यह परिवार मुरादाबाद के गंज मोहल्ले का रहने वाला था। राजीव के बड़े दादा (पिता के ताऊ) प्रोफेसर रामशरण देश की आजादी से पहले ही 1937 में प्रोवेंशियल असेंबली के एमएलए रहे थे। 1952 से 1962 तक मुरादाबाद के सांसद (एमपी) रहे थे।
महात्मा गांधी के करीबी और भरोसेमंद लोगों में रहे प्रोफेसर रामशरण को एक समय में मुरादाबाद का गांधी भी कहा जाता था। मुरादाबाद में गांधी जी के दौरे और कांग्रेस के प्रांतीय अधिवेशन के आयोजन में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी।
राजीव कुमार के पिता को चंदौसी के एसएम कॉलेज में नौकरी का अवसर मिलने के बाद यह परिवार वहीं का हो गया। चंदौसी में इनका पैतृक आवास सीता आश्रम क्षेत्र में है। इस लिहाज से देखा जाए तो राजीव कुमार में पढ़ाई के प्रति लगाव पिता प्रोफेसर आनंद कुमार (अब दिवंगत) से मिला तो राजनीतिक सूझ दादा रामशरण दास से मिली है।
जब राजीव के लिए धरने पर बैठ गई थीं ममता बनर्जी
राजीव कुमार का शुमार ममता बनर्जी के अति भरोसेमंद लोगों में है। टीएमसी से राज्यसभा के लिए राजीव को उम्मीदवार बनाए जाने से जहां इस बात पर मुहर लग गई है, वहीं पूर्व में राजीव के खिलाफ दिल्ली से सीबीआई टीम पहुंचने पर उनकी गिरफ्तारी रोकने के लिए ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थीं। सीबीआई टीम की लोकल (बंगाल की) पुलिस से घेराबंदी भी करा ली थी।
