एएसआई ने सीआईसी को बताया: संभल की जामा मस्जिद खंडहरों पर बनी या खाली जमीन पर, इसका हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि संभल की जामा मस्जिद किसी खंडहर को तोड़कर या खाली जमीन पर बनाई गई थी। उसके पास न ही निर्माण के समय जमीन के मालिक या मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह पता चल सके कि संभल में जामा मस्जिद किसी खंडहर ढांचे को तोड़कर या खाली जमीन पर बनाई गई थी।
एएसआई ने यह भी कहा कि न ही उसके पास संभल जामा मस्जिद के निर्माण के समय जमीन के मालिक की पहचान वाले दस्तावेज हैं। सूचना का अधिकार के तहत एक आवेदन में आवेदक सत्य प्रकाश यादव ने यह जानकारी मांगी थी कि मुगलकालीन मस्जिद, जामा मस्जिद किसी खंडहर को तोड़कर बनाई गई थी या खाली ज़मीन पर।
साथ ही उस समय जमीन के मालिक का नाम और मालिकाना हक देने वाले दस्तावेज की भी उन्होंने जानकारी मांगी थी। एएसआई ने अपने जवाब में कहा कि उसके पास ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
जब मस्जिद को सुरक्षा में लिया गया था, उस समय वहां किस तरह के निर्माण हुए, उसके बाद कोई नया निर्माण हुआ या नहीं और मस्जिद से जुड़े पिछले विवादों से जुड़े सवालों पर एएसआई ने कहा कि ऐसी जानकारी उसके रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है।
हालांकि, पहली अपील की कार्यवाही के दौरान एएसआई ने 2018 की एक घटना की ओर इशारा करते हुए कहा कि केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारक के संरक्षित क्षेत्र में किसी नए निर्माण करने की इजाजत नहीं है।
साथ ही बताया कि उस साल जामा मस्जिद साइट पर एक गैर-कानूनी स्टील रेलिंग लगाई जा रही थी और विभाग ने इस काम को रोकने के आदेश जारी किए थे। आवेदक ने मस्जिद के निर्माण के समय के बारे में भी पूछा था।
इस पर एएसआई ने जवाब दिया कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार, जामा मस्जिद संभल का निर्माण वर्ष 1526 में हुआ था और इसके लिए उसने सहायक सामग्री का हवाला दिया। यह पूछे जाने पर कि क्या इस ढांचे को पहले किसी और नाम से जाना जाता था।
एएसआई ने कहा कि मस्जिद को एएसआई ने उसी नाम से सुरक्षित रखा है। ढांचे के अभी के प्रकृति पर एक सवाल के जवाब में, एएसआई ने कहा कि अभी, यह एक मस्जिद के तौर पर है। साथ ही कहा कि जामा मस्जिद को 1920 में एएसआई के संरक्षण में लिया गया था।
