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Moradabad News: दोषियों को सलाखों तक पहुंचाने में अहम रही सेल्समैन की गवाही
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मुरादाबाद। 15 साल पुराने बहुचर्चित मैनाठेर बवाल में शनिवार को आए फैसले में साक्ष्य और गवाहों के बयान अहम रहे। सबसे अहम गवाही एमएस तुर्की पेट्रोल पंप के सेल्समैन संतराम की रही। उन्होंने कोर्ट पहुंचकर घटना का आंखों देखा मंजर बयां किया। इस घटना में वह खुद भी चोटिल हो गए थे। शनिवार को कोर्ट के इस फैसले पर प्रशासन से लेकर शासन तक सभी की निगाह रही।
एडीजीसी ब्रजराज सिंह ने बताया कि अभियोजन की ओर से कोर्ट में 51 गवाहों के बयान कराने के लिए के लिए सूची बनाई थी लेकिन 22 गवाह ही कोर्ट पहुंचे। जिसमें सेल्समैन संतराम की गवाही अहम रही। उसने अपने बयानों में बताया कि मैनाठेर के डींगरपुर चौराहे पर पाकबड़ा की ओर जाने वाले रास्ते पर भीड़ मौजूद थी। उस वक्त वह पेट्रोल पंप के ऑफिस में थे। डीआईजी भीड़ को समझा रहे थे लेकिन भीड़ आक्रोशित हो गई। डीआईजी और उनके पीआरओ पर हमला कर दिया था।
हमले से बचने के लिए डीआईजी और उनके पीआरओ पेट्रोल पंप की ओर भागे थे। उनकी पीछे-पीछे भीड़ भी आ गई थी। डीआईजी और दरोगा ने भीड़ को भगाने के लिए फायर भी किए लेकिन भीड़ नहीं हटी थी। इसके बाद भीड़ ने ऑफिस के बाहर फायर कर दिए। एक फायर संतराम के हाथ में भी लगा था। भीड़ ने पेट्रोल पंप के ऑफिस में तोड़फोड़ कर दी थी और कैश भी लूट लिया था। संतराम वहीं गिर गए थे।
इसके बाद पुलिस पहुंची तो भीड़ भाग गई थी। संतराम ने बताया कि उसे उसके भांजे ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। संतराम ने अपने बयानों में उस दिन का पूरा घटनाक्रम बयां किया। इस फैसले में संतराम की गवाही अहम रही। खास बात है कि संतराम अपने बयान से पलटे नहीं और न ही किसी लालच में आया। उन्हें धमकियां तक दी गईं लेकिन वह अपनी बात पर बने रहे।
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एडीजीसी ब्रजराज सिंह ने बताया कि अभियोजन की ओर से कोर्ट में 51 गवाहों के बयान कराने के लिए के लिए सूची बनाई थी लेकिन 22 गवाह ही कोर्ट पहुंचे। जिसमें सेल्समैन संतराम की गवाही अहम रही। उसने अपने बयानों में बताया कि मैनाठेर के डींगरपुर चौराहे पर पाकबड़ा की ओर जाने वाले रास्ते पर भीड़ मौजूद थी। उस वक्त वह पेट्रोल पंप के ऑफिस में थे। डीआईजी भीड़ को समझा रहे थे लेकिन भीड़ आक्रोशित हो गई। डीआईजी और उनके पीआरओ पर हमला कर दिया था।
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हमले से बचने के लिए डीआईजी और उनके पीआरओ पेट्रोल पंप की ओर भागे थे। उनकी पीछे-पीछे भीड़ भी आ गई थी। डीआईजी और दरोगा ने भीड़ को भगाने के लिए फायर भी किए लेकिन भीड़ नहीं हटी थी। इसके बाद भीड़ ने ऑफिस के बाहर फायर कर दिए। एक फायर संतराम के हाथ में भी लगा था। भीड़ ने पेट्रोल पंप के ऑफिस में तोड़फोड़ कर दी थी और कैश भी लूट लिया था। संतराम वहीं गिर गए थे।
इसके बाद पुलिस पहुंची तो भीड़ भाग गई थी। संतराम ने बताया कि उसे उसके भांजे ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। संतराम ने अपने बयानों में उस दिन का पूरा घटनाक्रम बयां किया। इस फैसले में संतराम की गवाही अहम रही। खास बात है कि संतराम अपने बयान से पलटे नहीं और न ही किसी लालच में आया। उन्हें धमकियां तक दी गईं लेकिन वह अपनी बात पर बने रहे।