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Moradabad News: आठ दशक बाद फिर जुड़ेंगे तिगरी-गढ़, गंगा पर बनेगा पैंटून पुल
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अमरोहा(मनोज पवार)। करीब 80 वर्ष बाद तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर के बीच गंगा पर अस्थायी पैंटून (पीपा) पुल बनने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। पुल बनने से अमरोहा और हापुड़ के कार्तिक गंगा मेले सीधे जुड़ेंगे, जिससे लाखों श्रद्धालुओं के साथ दोनों जिलों की धार्मिक, सामाजिक, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
बताया जा रहा है कि वर्ष 1945 के बाद पहली बार गंगा पर पीपे का पुल बनाकर दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन शुरू कराया जाएगा। उस समय यह पुल नावों के सहारे दोनों क्षेत्रों को जोड़ता था। तिगरी और गढ़ गंगा मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालु इसी पुल का उपयोग करते थे। पुल बनने से दोनों ओर के 600 से अधिक गांवों के लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी।
गंगा के बीच बने टापुओं को हटाकर धारा को एक करने के बाद पीपे का पुल बनाया जाएगा। वर्तमान में तिगरी से गढ़मुक्तेश्वर जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। पुल बनने से दूरी, यात्रा समय और परिवहन लागत कम होगी। जानकारों के अनुसार वर्ष 1945 तक यह अस्थायी पुल संचालित था, लेकिन गंगा मेले के दौरान सांप्रदायिक तनाव के बाद सुरक्षा कारणों से इसे हटा दिया गया था। अब मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद है कि इस वर्ष कार्तिक मेले से पहले यह सुविधा मिल जाएगी। इससे दोनों जनपदों की दूरी भी कम होगी और यात्रा समय व परिवहन लागत में कमी आएगी। संवाद
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600 से ज्यादा गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
पीपे का पुल बनने से अमरोहा और हापुड़ जनपद के 600 से अधिक गांवों के लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। दोनों जिलों के बीच दूरी कम होगी, परिवहन लागत घटेगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह पुल क्षेत्र के आर्थिक विकास का नया द्वार साबित होगा।
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लाखों श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा
तिगरी में गंगा पर पुल बनने लाखों श्रद्धालुओं को फायदा मिलेगा। दोनों ओर के लोग आसानी से एक दूसरी तरफ आ जा सकेंगे। हालांकि यह पुल अस्थायी तौर पर बनाया जाएगा। बरसात के दिनों में इस पुल को हटा दिया जाएगा। तिगरी गंगा मेले में करीब 20 से 25 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। दोनों तरफ का गंगा मेला ऐतिहासिक होता है। इस को उत्तर भारत का सबसे बड़ा गंगा मेला बताया जाता है।
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गंगा तिगरी मेले के पुराना बजट शासन से मांगा गया है। आगे की कार्रवाई के लिए भी शासन से पत्राचार किया गया है। गंगा नदी पर अस्थाई पीपे का पुल बन जाएगा।
-डॉ. नितिन गौड़,डीएम
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विधायक बोले- विकास को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री ने जनपद दौरे के दौरान दोनों कार्तिक गंगा मेलों को जोड़ने की घोषणा की थी। तिगरी मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिल चुका है और इसके लिए बजट भी जारी किया जा रहा है। गंगा पर पीपे का पुल बनने से लाखों श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
- राजीव तरारा, विधायक, मंडी धनौरा
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बताया जा रहा है कि वर्ष 1945 के बाद पहली बार गंगा पर पीपे का पुल बनाकर दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन शुरू कराया जाएगा। उस समय यह पुल नावों के सहारे दोनों क्षेत्रों को जोड़ता था। तिगरी और गढ़ गंगा मेले में आने-जाने वाले श्रद्धालु इसी पुल का उपयोग करते थे। पुल बनने से दोनों ओर के 600 से अधिक गांवों के लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी।
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गंगा के बीच बने टापुओं को हटाकर धारा को एक करने के बाद पीपे का पुल बनाया जाएगा। वर्तमान में तिगरी से गढ़मुक्तेश्वर जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। पुल बनने से दूरी, यात्रा समय और परिवहन लागत कम होगी। जानकारों के अनुसार वर्ष 1945 तक यह अस्थायी पुल संचालित था, लेकिन गंगा मेले के दौरान सांप्रदायिक तनाव के बाद सुरक्षा कारणों से इसे हटा दिया गया था। अब मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद है कि इस वर्ष कार्तिक मेले से पहले यह सुविधा मिल जाएगी। इससे दोनों जनपदों की दूरी भी कम होगी और यात्रा समय व परिवहन लागत में कमी आएगी। संवाद
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600 से ज्यादा गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
पीपे का पुल बनने से अमरोहा और हापुड़ जनपद के 600 से अधिक गांवों के लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। दोनों जिलों के बीच दूरी कम होगी, परिवहन लागत घटेगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह पुल क्षेत्र के आर्थिक विकास का नया द्वार साबित होगा।
लाखों श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा
तिगरी में गंगा पर पुल बनने लाखों श्रद्धालुओं को फायदा मिलेगा। दोनों ओर के लोग आसानी से एक दूसरी तरफ आ जा सकेंगे। हालांकि यह पुल अस्थायी तौर पर बनाया जाएगा। बरसात के दिनों में इस पुल को हटा दिया जाएगा। तिगरी गंगा मेले में करीब 20 से 25 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। दोनों तरफ का गंगा मेला ऐतिहासिक होता है। इस को उत्तर भारत का सबसे बड़ा गंगा मेला बताया जाता है।
गंगा तिगरी मेले के पुराना बजट शासन से मांगा गया है। आगे की कार्रवाई के लिए भी शासन से पत्राचार किया गया है। गंगा नदी पर अस्थाई पीपे का पुल बन जाएगा।
-डॉ. नितिन गौड़,डीएम
विधायक बोले- विकास को मिलेगी नई रफ्तार
मुख्यमंत्री ने जनपद दौरे के दौरान दोनों कार्तिक गंगा मेलों को जोड़ने की घोषणा की थी। तिगरी मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिल चुका है और इसके लिए बजट भी जारी किया जा रहा है। गंगा पर पीपे का पुल बनने से लाखों श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
- राजीव तरारा, विधायक, मंडी धनौरा