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Muzaffarnagar News: सहकारी बैंक के चेयरमैन की कुर्सी पर फैसला सुरक्षित

Thu, 20 Aug 2026 12:56 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 12:56 AM IST
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Decision reserved on the post of chairman of the cooperative bank
मुजफ्फरनगर। जिला सहकारी बैंक के सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह, संचालक पंकज पाल और बिजेंद्र मलिक एडवोकेट की प्रतिनिधि समितियों के विभाजन के बाद संचालक पद की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट इलाहाबाद ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। दावा किया गया था कि संचालकों के चुनाव क्षेत्र वाली समितियों का विभाजन होने के कारण बोर्ड भंग हो गया, जिस कारण अब वह समितियों के प्रतिनिधि नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।
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सहकारी बैंक के अध्यक्ष रामनाथ सिंह किसान सेवा समिति खेड़ा मस्तान, सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह मलिक पीनना समिति और पूर्व अध्यक्ष सतपाल पाल के बेटे पंकज पाल मुजफ्फरनगर पश्चिमी समिति से बैंक प्रतिनिधि के तौर पर चुने गए थे। इसके बाद तीनों संचालक चुने गए। जून 2023 में ठाकुर रामनाथ सिंह को जिला सहकारी बैंक का अध्यक्ष बनाया गया था।
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संचालक मंडल के चुनाव के समय मुजफ्फरनगर और शामली में 102 समितियां थीं, जिनका विभाजन कर वर्तमान में संख्या 122 हो गई है। याचिकाकर्ता सचिन जैन की ओर से छह महीने पहले दाखिल की गई रिट में कहा गया था कि रामनाथ सिंह की समिति कुरालसी, पंकज पाल की समिति वहलना और बिजेंद्र मलिक की लकड़संधा हो गई है।
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समितियों के विभाजन के कारण इनकी पुरानी समिति का बोर्ड भंग हो गया है, ऐसे में अब वह प्रतिनिधि नहीं रहे। बुधवार को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। दोनों पक्षों ने अपने तर्क पेश किए। हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया है। बैंक सभापति ने भी इसकी पुष्टि की है।

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यह है बैंक का संचालक मंडल
जिला सहकारी बैंक में सभापति रामनाथ सिंह, उपसभापति मुकेश कुमार जैन, संचालक दिनेश कुमार, राहुल राणा, संजीव कुमार, राजू अहलावत, अनार सिंह, आशीष चौधरी, सुनीता देवी, निधि त्यागी, पंकज पाल, बिजेंद्र सिंह मलिक और अमित चौधरी शामिल हैं।

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सहकारी बैंक से जुड़े चार लाख लोग बैंक सचिव राजेश कुमार ने बताया कि शामली और मुजफ्फरनगर की विभिन्न शाखाओं से चार लाख खाताधारक हैं। दोनों जिलों में डेढ़ लाख किसान बैंक से लोन का आदान-प्रदान भी करते हैं।


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इसलिए महत्वपूर्ण है फैसला
हाईकोर्ट का फैसला संचालक मंडल के लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल तीन संचालकों के प्रतिनिधि होने को चुनौती दी गई है। अगर फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में आता है तो अन्य समितियों के विभाजन होने के कारण दूसरे प्रतिनिधियों की सदस्यता पर भी सवाल खड़े किए जा सकते हैं।
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