{"_id":"6a70efe0f8d5282b790ccd4a","slug":"human-settlements-encroached-upon-the-forest-sugarcane-cultivation-began-to-shrink-muzaffarnagar-news-c-29-1-mng1001-177402-2026-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: जंगल की तरफ बढ़ी आबादी...सिमटने लगा गन्ना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: जंगल की तरफ बढ़ी आबादी...सिमटने लगा गन्ना
विज्ञापन
बुढ़ाना मोड के किनौनी में गन्ने का खेत : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। गन्ना सर्वेक्षण के चौकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। सहारनपुर मंडल में छह हजार हेक्टेयर गन्ना रकबा घट गया। पिछले पेराई सत्र के मुकाबले मुजफ्फरनगर में इस बार 1.43 फीसदी गन्ना रकबा कम हुआ है। खाईखेड़ी चीनी मिल क्षेत्र में सबसे अधिक 8.28 प्रतिशत और तितावी मिल क्षेत्र में 4.62 गन्ना क्षेत्रफल घट गया है। सोलानी नदी में हर साल आने वाली बाढ़, किसानों का पॉपलर की तरफ रुझान और जंगल की तरफ बढ़ रहा आबादी क्षेत्र इसकी बड़ी वजह सामने आई है।
जिले के ढाई लाख गन्ना किसान मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली की 12 चीनी मिलों को को गन्ने की आपूर्ति करते हैं। पेराई सत्र 2025-26 में पौधा और पेड़ी का कुल क्षेत्रफल एक लाख 76 हजार 916 हेक्टेयर था। नए पेराई सत्र के लिए गन्ना विभाग और चीनी मिलों की संयुक्त टीमों ने सर्वे किया। इस बार एक लाख 74 हजार 379 हेक्टेयर में ही गन्ना मिला है। खाईखेड़ी क्षेत्र में पेड़ी का रकबा 19 प्रतिशत तक कम हो गया है, जिसका असर नए पेराई सत्र पर पड़ेगा।
उत्तम शुगर मिल खाईखेड़ी के डीजीएम केन संजीव कुमार कहते हैं कि मिल क्षेत्र में पॉपुलर लगाने का चलन बढ़ रहा है। सोलानी नदी का पानी खादर क्षेत्र में गन्ने की फसल को प्रभावित करता है। इसके अलावा खेती की जमीन पर काॅलोनियां विकसित की जा रही है। यही वजह है कि इस रकबा कम हुआ है।
विज्ञापन
तितावी चीनी मिल के जीएम केन संजीव कुमार कहते हैं कि पॉपुलर की तरफ मिल क्षेत्र में किसानों का रुझान बढ़ा है, यही वजह है कि गन्ने का रकबा प्रभावित हुआ। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिले में छह हजार हेक्टेयर गन्ना इस बार कम है।
-- -- -- -
इस बार किस चीनी मिल के क्षेत्र में कितना गन्ना
चीनी मिल पौधा पेड़ी
खतौली 15892.609 16528.006
तितावी 10064.864 9787.598
भैसाना 9066.477 9730.621
मंसूरपुर 12739.317 13350.247
टिकौला 13047.159 13731.880
खाईखेड़ी 9725.291 9476.800
रोहाना 3902.936 3979.781
मोरना 6307.951 6007.961
नोट : गन्ना क्षेत्रफल हेक्टेयर में है।
-- -- -- -
इन मिलों को भी करते हैं गन्ने की सप्लाई
जिले के किसान मेरठ की मवाना, दौराला, सहारनपुर की देवबंद और शामली की थानाभवन चीनी मिल को गन्ने की सप्लाई करते हैं। इनमें थानाभवन क्षेत्र में गन्ने की पैदावार पर असर पड़ा है।
-- -- -- -
भैसाना मिल पर 104 करोड़ बकाया
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना क्षेत्र की भैसाना चीनी मिल पर जिले के किसानों के 104 करोड़ रुपये बकाया है। अभी तक मिल ने सात फरवरी तक सप्लाई किए गए गन्ने का भुगतान ही किया है। अन्य चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। किसानों के खाते में कुल 3078 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान भेजा गया है। ब्यूरो
-- -- -- -
इन क्षेत्रों में राहत...खतरा टला नहीं
टिकौला चीनी मिल क्षेत्र में गन्ना रकबा में 4.08 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है। इसकी बड़ी वजह मिल की भुगतान प्रक्रिया है। मिल भुगतान में आगे रहती है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। रोहाना चीनी मिल क्षेत्र में 3.74 प्रतिशत और मंसूरपुर में 0.21 प्रतिशत गन्ना कम हुआ है। सहकारी मिल मोरना समेत अन्य मिलों में रकबा कम हुआ है।
विज्ञापन
जिले के ढाई लाख गन्ना किसान मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली की 12 चीनी मिलों को को गन्ने की आपूर्ति करते हैं। पेराई सत्र 2025-26 में पौधा और पेड़ी का कुल क्षेत्रफल एक लाख 76 हजार 916 हेक्टेयर था। नए पेराई सत्र के लिए गन्ना विभाग और चीनी मिलों की संयुक्त टीमों ने सर्वे किया। इस बार एक लाख 74 हजार 379 हेक्टेयर में ही गन्ना मिला है। खाईखेड़ी क्षेत्र में पेड़ी का रकबा 19 प्रतिशत तक कम हो गया है, जिसका असर नए पेराई सत्र पर पड़ेगा।
विज्ञापन
उत्तम शुगर मिल खाईखेड़ी के डीजीएम केन संजीव कुमार कहते हैं कि मिल क्षेत्र में पॉपुलर लगाने का चलन बढ़ रहा है। सोलानी नदी का पानी खादर क्षेत्र में गन्ने की फसल को प्रभावित करता है। इसके अलावा खेती की जमीन पर काॅलोनियां विकसित की जा रही है। यही वजह है कि इस रकबा कम हुआ है।
विज्ञापन
तितावी चीनी मिल के जीएम केन संजीव कुमार कहते हैं कि पॉपुलर की तरफ मिल क्षेत्र में किसानों का रुझान बढ़ा है, यही वजह है कि गन्ने का रकबा प्रभावित हुआ। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिले में छह हजार हेक्टेयर गन्ना इस बार कम है।
इस बार किस चीनी मिल के क्षेत्र में कितना गन्ना
चीनी मिल पौधा पेड़ी
खतौली 15892.609 16528.006
तितावी 10064.864 9787.598
भैसाना 9066.477 9730.621
मंसूरपुर 12739.317 13350.247
टिकौला 13047.159 13731.880
खाईखेड़ी 9725.291 9476.800
रोहाना 3902.936 3979.781
मोरना 6307.951 6007.961
नोट : गन्ना क्षेत्रफल हेक्टेयर में है।
इन मिलों को भी करते हैं गन्ने की सप्लाई
जिले के किसान मेरठ की मवाना, दौराला, सहारनपुर की देवबंद और शामली की थानाभवन चीनी मिल को गन्ने की सप्लाई करते हैं। इनमें थानाभवन क्षेत्र में गन्ने की पैदावार पर असर पड़ा है।
भैसाना मिल पर 104 करोड़ बकाया
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना क्षेत्र की भैसाना चीनी मिल पर जिले के किसानों के 104 करोड़ रुपये बकाया है। अभी तक मिल ने सात फरवरी तक सप्लाई किए गए गन्ने का भुगतान ही किया है। अन्य चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। किसानों के खाते में कुल 3078 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान भेजा गया है। ब्यूरो
इन क्षेत्रों में राहत...खतरा टला नहीं
टिकौला चीनी मिल क्षेत्र में गन्ना रकबा में 4.08 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है। इसकी बड़ी वजह मिल की भुगतान प्रक्रिया है। मिल भुगतान में आगे रहती है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। रोहाना चीनी मिल क्षेत्र में 3.74 प्रतिशत और मंसूरपुर में 0.21 प्रतिशत गन्ना कम हुआ है। सहकारी मिल मोरना समेत अन्य मिलों में रकबा कम हुआ है।