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Muzaffarnagar News: अस्सी दिन, तीन मामलों में नौ दोषियों को फांसी

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 12:54 AM IST
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Nine convicts sentenced to death in three cases within eighty days.
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फांसी की सजा-1

चालीस लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में 15 अक्तूबर 2019 को एडवोकेट समीर सैफी की हत्या कर दी गई। छह अप्रैल को फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने दोषी सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई। दोषी दिनेश को सात साल कैद की सजा सुनाई गई।
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फांसी की सजा-2
भौराकलां थाना क्षेत्र के सिसौली निवासी शेखर की खेड़ी सूंडियान गांव में 17 जून 2019 को हत्या कर दी गई थी। गई। पिछले महीने 28 अप्रैल को अदालत ने मां मुकेश, उसके बेटे प्रदीप, संदीप और सोनू को फांसी की सजा सुनाई गई। 70 हजार रुपये के लेन-देन में यह विवाद हुआ।
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फांसी की सजा-3
सात नवंबर 2011 को चरथावल में ईंटों से कूचकर राजेश देवी और उसके मासूम बेटे हिमांशु की हत्या कर दी गई। पिछले महीने 30 मई को अदालत ने दोषी रईस को मृत्युदंड की सजा सुनाई। राजेश और रईस के बीच प्रेम-संबंध थे। राजेश साथ रहने की जिद कर रही थी।
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इन मामलों में लटकाया गया फांसी का फंदा
मुजफ्फरनगर। जिले में इससे पहले भी अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। सिखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फहीमपुर गांव की चर्चित और सनसनीखेज आपराधिक घटना है। एक दिसंबर 2000 को हुए 8 लोगों के सामूहिक हत्या कर दी गई। दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई। हरसौली गांव में 25 फरवरी 2010 को वॉलीबाल खेलने को लेकर विवाद हो गया था। दूसरे पक्ष के लोगों ने घर पर हमला कर नसीम की हत्या कर दी। अदालत ने 20 नवंबर 2018 को सात दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। जानसठ क्षेत्र के गांव में 12 जून 2022 को मासूम बच्चे के यौन उत्पीड़न का मामला हुआ। दो फरवरी 2023 को दोषी सोनी को फांसी और दूसरे दोषी राजीव को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। ब्यूरो
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चार फांसी की सजा सुनाने वाले अकेले न्यायाधीश
फोटो
मुजफ्फरनगर। वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी के दैनिक दर्शन-पूजन करने एवं देवी-देवताओं के विग्रह सुरक्षित करने वाली अर्जी पर न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने मई 2022 को एडवोकेट कमीशन की कार्रवाई का निर्देश दिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई। 20 जून 2023 को स्थानांतरण बरेली हो गया। बरेली में न्यायाधीश को धमकियां भी मिली। मुजफ्फरनर में पिछले 80 दिन में उन्होंने चार एतिहासिक फैसले सुनाकर रिकॉर्ड बना दिया। ब्यूरो
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