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Muzaffarnagar News: राजपाल सैनी ने बुना कमल छोड़ साइकिल की सवारी का ख्वाब
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मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की सियासत से गायब नजर आ रहे पूर्व सांसद राजपाल सैनी की दोबारा सपा में वापसी की चर्चा शुरू हो गई है। खतौली विधानसभा से लगातार दो चुनाव में परिवार को मिली हार के बाद इस बार पूर्व सांसद मीरापुर में ताकत दिखाने की तैयारी में जुट गए हैं। होली के बाद सैनी की सपा में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।
मूल रूप से बुढ़ाना क्षेत्र के लुहसाना गांव निवासी राजपाल सैनी ने वर्ष 1999 में बसपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें 163721 वोट मिले थे।
इसके बाद बसपा के टिकट पर ही वर्ष 2002 में मोरना विधानसभा सीट से 40579 वोट हासिल कर सपा के संजय चौहान को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। जीत का इनाम उन्हें सरकार में मंत्री बनाकर दिया गया था।
वर्ष 2007 के चुनाव में रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े कादिर राना के सामने राजपाल सैनी को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार राजपाल सैनी को 38947 वोट मिले थे। वर्ष 2010 में बसपा के कोटे से राज्यसभा सदस्य बनाए गए।
वर्ष 2012 में नए परिसीमन में हुए विधानसभा चुनाव से वह राज्यसभा सदस्य होने की वजह से दूर हरे। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बेटे शिवान सैनी को बसपा के टिकट पर खतौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले उन्होंने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था।
तब सपा-रालोद के गठबंधन के कारण खतौली सीट रालोद के हिस्से में आई। रालोद के टिकट पर शिवान सैनी के बजाए रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह ने राजपाल सैनी को चुनाव लड़ाया लेकिन वह भाजपा के विक्रम सैनी के सामने हार गए थे।
वर्ष 2023 में खतौली सीट पर हुए उपचुनाव में रालोद ने सैनी के बजाए खेकड़ा के पूर्व विधायक मदन भैया को टिकट दिया था और वह जीतकर विधानसभा पहुंच गए। इसके बाद रालोद एनडीए का हिस्सा बन गया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राजपाल सैनी रालोद छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्हें बिजनौर और मुजफ्फरनगर सीट से टिकट का दावेदार भी माना जा रहा था लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
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भाजपा में नहीं दिख रहे सक्रिय
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से वह भाजपा में सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। संगठन के कार्यक्रमों और अभियान में भी उनकी सक्रियता नहीं दिखी। इसी वजह से उनके सपा में जाने की चर्चाओं ने और अधिक जोर पकड़ लिया है। सियासी गलियों में यह भी चर्चा है कि पूर्व सांसद ने पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी, हालांकि इस मुलाकात की पुष्टि नहीं हुई है।
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खतौली पर मीरापुर को दे रहे तवज्जो
समाजवादी पार्टी ने पीडीए का फार्मूला तय किया है। माना जा रहा है कि सपा विधानसभा चुनाव 2027 में खतौली सीट से गुर्जर उम्मीदवार को लड़ाएगी, जबकि मीरापुर से सैनी समाज को टिकट दिए जाने की संभावना जोर पकड़ रही है। पूर्व सांसद राजपाल सैनी के परिवार को खतौली में दो बार हार मिल चुकी है, ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार वह मीरापुर को अधिक मुफीद मान रहे हैं।
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मीरापुर में यह रहा सपा का प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर। परिसीमन के बाद 2012 में मीरापुर विधानसभा सीट बनाई गई थी। इससे पहले मोरना के नाम से सीट थी। पहले चुनाव में सपा के मेहराजुद्दीन को 21083 वोट मिले। वर्ष 2017 में सपा के लियाकत अली 68842 वोट मिले और वह बेहद कम अंतर से भाजपा के अवतार भड़ाना से हार गए थे। वर्ष 2022 में सपा-रालोद गठबंधन में यह सीट रालोद के हिस्से में आई और चंदन चौहान विधायक चुने गए। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद सियासी समीकरण बदला। रालोद और भाजपा का गठबंधन हो गया। चंदन चौहान के बिजनौर से सांसद चुन लिए जाने के कारण खाली हुई सीट पर उपचुनाव में भाजपा की मिथलेश पाल ने रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। सपा के प्रत्याशी सुम्बुल राना को करीब 53 हजार वोट मिले और हार का सामना करना पड़ा।
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मूल रूप से बुढ़ाना क्षेत्र के लुहसाना गांव निवासी राजपाल सैनी ने वर्ष 1999 में बसपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें 163721 वोट मिले थे।
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इसके बाद बसपा के टिकट पर ही वर्ष 2002 में मोरना विधानसभा सीट से 40579 वोट हासिल कर सपा के संजय चौहान को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। जीत का इनाम उन्हें सरकार में मंत्री बनाकर दिया गया था।
वर्ष 2007 के चुनाव में रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े कादिर राना के सामने राजपाल सैनी को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार राजपाल सैनी को 38947 वोट मिले थे। वर्ष 2010 में बसपा के कोटे से राज्यसभा सदस्य बनाए गए।
वर्ष 2012 में नए परिसीमन में हुए विधानसभा चुनाव से वह राज्यसभा सदस्य होने की वजह से दूर हरे। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बेटे शिवान सैनी को बसपा के टिकट पर खतौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले उन्होंने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था।
तब सपा-रालोद के गठबंधन के कारण खतौली सीट रालोद के हिस्से में आई। रालोद के टिकट पर शिवान सैनी के बजाए रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह ने राजपाल सैनी को चुनाव लड़ाया लेकिन वह भाजपा के विक्रम सैनी के सामने हार गए थे।
वर्ष 2023 में खतौली सीट पर हुए उपचुनाव में रालोद ने सैनी के बजाए खेकड़ा के पूर्व विधायक मदन भैया को टिकट दिया था और वह जीतकर विधानसभा पहुंच गए। इसके बाद रालोद एनडीए का हिस्सा बन गया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राजपाल सैनी रालोद छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्हें बिजनौर और मुजफ्फरनगर सीट से टिकट का दावेदार भी माना जा रहा था लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
भाजपा में नहीं दिख रहे सक्रिय
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से वह भाजपा में सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। संगठन के कार्यक्रमों और अभियान में भी उनकी सक्रियता नहीं दिखी। इसी वजह से उनके सपा में जाने की चर्चाओं ने और अधिक जोर पकड़ लिया है। सियासी गलियों में यह भी चर्चा है कि पूर्व सांसद ने पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी, हालांकि इस मुलाकात की पुष्टि नहीं हुई है।
खतौली पर मीरापुर को दे रहे तवज्जो
समाजवादी पार्टी ने पीडीए का फार्मूला तय किया है। माना जा रहा है कि सपा विधानसभा चुनाव 2027 में खतौली सीट से गुर्जर उम्मीदवार को लड़ाएगी, जबकि मीरापुर से सैनी समाज को टिकट दिए जाने की संभावना जोर पकड़ रही है। पूर्व सांसद राजपाल सैनी के परिवार को खतौली में दो बार हार मिल चुकी है, ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार वह मीरापुर को अधिक मुफीद मान रहे हैं।
मीरापुर में यह रहा सपा का प्रदर्शन
मुजफ्फरनगर। परिसीमन के बाद 2012 में मीरापुर विधानसभा सीट बनाई गई थी। इससे पहले मोरना के नाम से सीट थी। पहले चुनाव में सपा के मेहराजुद्दीन को 21083 वोट मिले। वर्ष 2017 में सपा के लियाकत अली 68842 वोट मिले और वह बेहद कम अंतर से भाजपा के अवतार भड़ाना से हार गए थे। वर्ष 2022 में सपा-रालोद गठबंधन में यह सीट रालोद के हिस्से में आई और चंदन चौहान विधायक चुने गए। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद सियासी समीकरण बदला। रालोद और भाजपा का गठबंधन हो गया। चंदन चौहान के बिजनौर से सांसद चुन लिए जाने के कारण खाली हुई सीट पर उपचुनाव में भाजपा की मिथलेश पाल ने रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की थी। सपा के प्रत्याशी सुम्बुल राना को करीब 53 हजार वोट मिले और हार का सामना करना पड़ा।