{"_id":"6a1f37d493705b3ecd063c15","slug":"positive-news-muzaffarnagar-news-c-29-1-mng1001-172688-2026-06-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: बेटी के पिता को मुखाग्नि देते ही जल गई पुरानी परंपरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: बेटी के पिता को मुखाग्नि देते ही जल गई पुरानी परंपरा
विज्ञापन
बहादुरपुर खेडी वीरान में पिता की चिता को मुखाग्नि देती मनु : स्रोत ग्रामीण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। इंसान के जन्म से लेकर अंतिम पड़ाव तक सामाजिक नियम भी साथ चलते हैं। सदियों से चले आ रहे यही नियम अटूट परंपरा है। समाज ने ही मुखाग्नि देने का दायित्व बेटों या परिवार के पुरुषों के हिस्से में रखा। बहादुरपुर खेड़ी वीरान में मास्टर हरेंद्र सिंह (70) का निधन हुआ। घर में सिर्फ बेटियां होने के कारण सवाल मुखाग्नि तक पहुंचा।
मंझली बेटी मनु ने श्मशानघाट तक जाने का फैसला किया। आंखों में आंसू लिए ग्रामीणों ने हौसला बढ़ाया तो बेटी ने पिता की चिता में आग लगाई। पिता पंचतत्व में विलीन हुए और परंपरा जलकर राख हो गई।
जानसठ सड़क स्थित बहादुरपुर में बुजुर्ग मास्टर हरेंद्र सिंह अपनी पत्नी के साथ गांव में रह रहे थे। परिवार की तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है। इकलौते बेटे रजत उर्फ बिट्टू का करीब आठ महीने पहले जोली नहर में हुए हादसे में निधन हो गया था। मास्टर हरेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए सैकड़ों ग्रामीण श्मशान घाट पर पहुंचे।
विज्ञापन
हर किसी की आंखें नम थीं। मंझली बेटी ससुराल मोघपुर से पिता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंची। उसने ग्रामीणों के बीच अपने पिता को मुखाग्नि देने का साहसिक निर्णय लिया। परिवार और गांव के सभी लोगों ने उसके इस निर्णय का सम्मान किया। उन्होंने मनु को मुखाग्नि देने पर सहमति दे दी।
मंझली बेटी मनु ने श्मशानघाट तक जाने का फैसला किया। आंखों में आंसू लिए ग्रामीणों ने हौसला बढ़ाया तो बेटी ने पिता की चिता में आग लगाई। पिता पंचतत्व में विलीन हुए और परंपरा जलकर राख हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानसठ सड़क स्थित बहादुरपुर में बुजुर्ग मास्टर हरेंद्र सिंह अपनी पत्नी के साथ गांव में रह रहे थे। परिवार की तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है। इकलौते बेटे रजत उर्फ बिट्टू का करीब आठ महीने पहले जोली नहर में हुए हादसे में निधन हो गया था। मास्टर हरेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए सैकड़ों ग्रामीण श्मशान घाट पर पहुंचे।
Trending Videos
हर किसी की आंखें नम थीं। मंझली बेटी ससुराल मोघपुर से पिता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंची। उसने ग्रामीणों के बीच अपने पिता को मुखाग्नि देने का साहसिक निर्णय लिया। परिवार और गांव के सभी लोगों ने उसके इस निर्णय का सम्मान किया। उन्होंने मनु को मुखाग्नि देने पर सहमति दे दी।