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Muzaffarnagar News: व्यापारी बोले, हर मामले में जारी होना चाहिए स्पीकिंग ऑर्डर
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए कई मांगें उठाई। संगठन ने जीएसटी अधिकारियों से व्यापारियों के नाम स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने की वकालत की है, ताकि करदाताओं को अपील करने का अधिकार मिल सके। गुड़ को कृषि उत्पाद घोषित करने और बैंकिंग सेवाओं में सुधार की भी मांग की गई है।
उप्र उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री श्याम सिंह सैनी ने कहा कि जीएसटी के मामलों में अधिकारियों की ओर से स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने का प्रावधान है लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं हो रहा है। व्यापारियों को अक्सर स्वीकारोक्ति पत्र (बीआरसी फार्म) भरने के लिए दबाव डाला जाता है, जिससे वह अपील प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाते और जीएसटी रिफंड से भी वंचित रह जाते हैं।
उन्होंने कहा कि स्पीकिंग ऑर्डर के अभाव में न केवल व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि शासन और विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि कर जमा कराने के लिए स्पीकिंग ऑर्डर का जारी होना उनके कानूनी अधिकारों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
गुड़ को कृषि उत्पाद घोषित करने और मानकों की मांग
व्यापार मंडल ने सरकार से गुड़ को एक कृषि उत्पाद के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इसके साथ ही, गुड़ के लिए स्पष्ट मानक तय करने, जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित करने और कोल्हू चलाने वालों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने की भी अपील की गई है। संगठन का मानना है कि इन कदमों से गुड़ उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को भी लाभ होगा।
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बैंकिंग सेवाओं में सुधार की आवश्यकता
उद्योग व्यापार मंडल के वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक अशोक कंसल ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि क्लियरिंग चेक का भुगतान व्यापारियों को उसी दिन मिलना चाहिए। दावा किया कि लीड बैंक पीएनबी इस सुविधा को लागू नहीं कर रहा है और अन्य बैंकों के विपरीत कैश हैंडलिंग चार्ज भी वसूल रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी बैंकों को एक समान व्यवहार करना चाहिए और क्लियरिंग चेक का भुगतान त्वरित गति से सुनिश्चित करना चाहिए।
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- व्यापारियों के नाम स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए जाएं।
- गुड़ को कृषि उत्पाद घोषित किया जाए और उसके मानक तय किए जाएं।
- गुड़ की जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं।
- कोल्हू चलाने वालों को सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- जीएसटी के नियमों में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाएं।
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प्रत्येक सुनवाई में स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया जाता है : सिद्धेश चंद्र दीक्षित
जीएसटी एसआईबी के ज्वाइंट कमिश्नर सिद्धेश चंद्र दीक्षित का कहना है कि प्रत्येक सुनवाई में जीएसटी अधिकारी की ओर से स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया जाता है। उसी के आधार पर व्यापारी अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाता है।
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ये होता है स्पीकिंग ऑर्डर
स्पीकिंग ऑर्डर एक ऐसा आदेश होता है, जिसमें अधिकारी को अपने फैसले के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से बताना होता है कि उसका निर्णय किन तथ्यों, सबूत और कानून के प्रावधानों पर आधारित है।
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उप्र उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री श्याम सिंह सैनी ने कहा कि जीएसटी के मामलों में अधिकारियों की ओर से स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने का प्रावधान है लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं हो रहा है। व्यापारियों को अक्सर स्वीकारोक्ति पत्र (बीआरसी फार्म) भरने के लिए दबाव डाला जाता है, जिससे वह अपील प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाते और जीएसटी रिफंड से भी वंचित रह जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि स्पीकिंग ऑर्डर के अभाव में न केवल व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि शासन और विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि कर जमा कराने के लिए स्पीकिंग ऑर्डर का जारी होना उनके कानूनी अधिकारों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
गुड़ को कृषि उत्पाद घोषित करने और मानकों की मांग
व्यापार मंडल ने सरकार से गुड़ को एक कृषि उत्पाद के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इसके साथ ही, गुड़ के लिए स्पष्ट मानक तय करने, जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित करने और कोल्हू चलाने वालों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने की भी अपील की गई है। संगठन का मानना है कि इन कदमों से गुड़ उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को भी लाभ होगा।
बैंकिंग सेवाओं में सुधार की आवश्यकता
उद्योग व्यापार मंडल के वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक अशोक कंसल ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि क्लियरिंग चेक का भुगतान व्यापारियों को उसी दिन मिलना चाहिए। दावा किया कि लीड बैंक पीएनबी इस सुविधा को लागू नहीं कर रहा है और अन्य बैंकों के विपरीत कैश हैंडलिंग चार्ज भी वसूल रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी बैंकों को एक समान व्यवहार करना चाहिए और क्लियरिंग चेक का भुगतान त्वरित गति से सुनिश्चित करना चाहिए।
- व्यापारियों के नाम स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए जाएं।
- गुड़ को कृषि उत्पाद घोषित किया जाए और उसके मानक तय किए जाएं।
- गुड़ की जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं।
- कोल्हू चलाने वालों को सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- जीएसटी के नियमों में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाएं।
प्रत्येक सुनवाई में स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया जाता है : सिद्धेश चंद्र दीक्षित
जीएसटी एसआईबी के ज्वाइंट कमिश्नर सिद्धेश चंद्र दीक्षित का कहना है कि प्रत्येक सुनवाई में जीएसटी अधिकारी की ओर से स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया जाता है। उसी के आधार पर व्यापारी अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाता है।
ये होता है स्पीकिंग ऑर्डर
स्पीकिंग ऑर्डर एक ऐसा आदेश होता है, जिसमें अधिकारी को अपने फैसले के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से बताना होता है कि उसका निर्णय किन तथ्यों, सबूत और कानून के प्रावधानों पर आधारित है।