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Muzaffarnagar News: बंधुआ मजदूरी मामले में विपिन प्रधान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
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मुजफ्फरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने मांडी गांव के बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम के मामले में अभियुक्त विपिन प्रधान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। मजदूरों के बयानों में आरोपी का नाम सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने जांच में शामिल किया था। आरोपी पर पलवल में भी प्राथमिकी दर्ज है।
तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित दोना फैक्टरी से पिछले महीने 22 जून को श्रम उपायुक्त देवेश सिंह, तहसीलदार राधेश्याम गौड़ और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 श्रमिकों को मुक्त कराया। मजदूर बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के रहने वाले थे।
आरोप लगाया गया था कि करीब 12 हजार रुपये प्रति माह वेतन का लालच दिया गया लेकिन कोई भुगतान नहीं किया गया। उन्हें कारखाने में बंद रखा जाता था और दिन में एक बार सूखी रोटी मिलती थी और बीमार होने पर इलाज नहीं होता था।
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पुलिस ने इस मामले में मांडी गांव निवासी विपिन प्रधान को भी आरोपी बनाया है। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में तर्क दिया कि विपिन एफआईआर में नामजद नहीं है और पुलिस ने एक मजदूर के बयान में उसका नाम जबरदस्ती डलवाया है। केस डायरी में लगाई गई बंदूक के साथ अपनी तस्वीर को झूठी और संपादित बताया। प्रधान पद की रंजिश की वजह से झूठा फंसाने का आरोप लगाया।
अदालत ने पाया कि विवेचना के दौरान पीड़ितों के बयानों में विपिन प्रधान की गंभीर भूमिका सामने आई। मजदूर दिलशाद और राजहंस ने बयान में कहा था कि अंकित, शिवा और विपिन ने उन्हें बेल्ट, लोहे के सरियों और पेचकस से पीटा था। इस मारपीट से एक मजदूर का हाथ भी टूट गया।
न्यायालय ने अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए विपिन प्रधान की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी गई।
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प्रदीप और रबित को मिली चुकी जमानत
दोना फैक्टरी प्रकरण में आरोपी बनाए गए प्रदीप और रबित को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। मुख्य आरोपी अंकित बालियान हरियाणा की नीमकी जेल में बंद है। आरोपी को हरियाणा पुलिस ने पलवल के होड़ल से तमंचे के साथ पकड़ा था।
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तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित दोना फैक्टरी से पिछले महीने 22 जून को श्रम उपायुक्त देवेश सिंह, तहसीलदार राधेश्याम गौड़ और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 श्रमिकों को मुक्त कराया। मजदूर बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के रहने वाले थे।
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आरोप लगाया गया था कि करीब 12 हजार रुपये प्रति माह वेतन का लालच दिया गया लेकिन कोई भुगतान नहीं किया गया। उन्हें कारखाने में बंद रखा जाता था और दिन में एक बार सूखी रोटी मिलती थी और बीमार होने पर इलाज नहीं होता था।
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पुलिस ने इस मामले में मांडी गांव निवासी विपिन प्रधान को भी आरोपी बनाया है। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में तर्क दिया कि विपिन एफआईआर में नामजद नहीं है और पुलिस ने एक मजदूर के बयान में उसका नाम जबरदस्ती डलवाया है। केस डायरी में लगाई गई बंदूक के साथ अपनी तस्वीर को झूठी और संपादित बताया। प्रधान पद की रंजिश की वजह से झूठा फंसाने का आरोप लगाया।
अदालत ने पाया कि विवेचना के दौरान पीड़ितों के बयानों में विपिन प्रधान की गंभीर भूमिका सामने आई। मजदूर दिलशाद और राजहंस ने बयान में कहा था कि अंकित, शिवा और विपिन ने उन्हें बेल्ट, लोहे के सरियों और पेचकस से पीटा था। इस मारपीट से एक मजदूर का हाथ भी टूट गया।
न्यायालय ने अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए विपिन प्रधान की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी गई।
प्रदीप और रबित को मिली चुकी जमानत
दोना फैक्टरी प्रकरण में आरोपी बनाए गए प्रदीप और रबित को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। मुख्य आरोपी अंकित बालियान हरियाणा की नीमकी जेल में बंद है। आरोपी को हरियाणा पुलिस ने पलवल के होड़ल से तमंचे के साथ पकड़ा था।