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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Voting should resolve differences; bloodstains on the very first step of democracy... a tragedy.

Muzaffarnagar News: मतदान से समाप्त हों मतभेद, लोकतंत्र की पहली सीढ़ी पर खून के धब्बे...त्रासदी

Tue, 07 Jul 2026 02:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:02 AM IST
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Voting should resolve differences; bloodstains on the very first step of democracy... a tragedy.
मुजफ्फरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने 55 पेज के फैसले में लिखा कि ग्राम पंचायत लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है। यदि इसी सीढ़ी पर खून के धब्बे दिखाई देने लगें, तो यह केवल एक गांव की त्रासदी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चेतावनी है।
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चुनाव प्रतिस्पर्धा का विषय रहें, प्रतिशोध का नहीं। मतभेद मतदान से समाप्त हों, हिंसा से नहीं। कानून का शासन तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक नागरिक यह विश्वास रखे कि सत्ता का मार्ग मतपत्र से होकर जाता है है, शस्त्र से नहीं।
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मांडी के राजबीर सिंह हत्याकांड में प्रधान पद के चुनाव पर अदालत ने पांच पेज पर टिप्पणी लिखी। प्रधान का चुनाव लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई में जनप्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य जनसेवा और गांव का विकास है, ना कि व्यक्तिगत दुश्मनी, भय अथवा हिंसा को जन्म देना।
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जहां मतपत्र का सम्मान होना चाहिए, वहां यदि रक्त बहने लगे तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। चुनाव जनादेश प्राप्त करने का माध्यम है, प्रतिशोध लेने का नहीं। यदि चुनावी प्रतिस्पर्धा हिंसा और हत्या मं परिवर्तित हो जाए, तो उसका दुष्प्रभाव केवल पीड़ित परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में भय ओर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अविश्वास का वातावरण उत्पन्न करता है।
ग्राम पंचायत लोकतंत्र की प्रथम पाठशाला है। खून-खराबा लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों को भी कमजोर करता है। लोकतंत्र का आधार मतपत्र है, न कि हथियार। प्रधान का पद सेवा, विकास और जनविश्वास का प्रतीक है। जहां जनता अपने प्रतिनिधि का चयन मतपत्र से करती है, वहां रक्तपात का कोई स्थान नहीं हो सकता। चुनावी हिंसा लोकतंत्र की आत्मा को आहत करती है और कानून के शासन को चुनौती देती है। प्रधानी का चुनाव सेवा का अवसर प्रदान करता है, शत्रुता का नहीं।
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पंचायत चुनाव : संघर्ष नहीं...सेवा का माध्यम
समाज का दायित्व है कि वह चुनाव को सेवा का माध्यम बनाए, संघर्ष का नहीं। राज्य का दायित्व है कि ऐसे अपराधों के प्रति विधि के अनुसार त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे। चुनाव का उद्देश्य नेतृत्व का चयन करना है, शत्रुता को जन्म देना नहीं। झगड़े से लोकतांत्रिक संस्कृति की पराजय होती है।
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जनसामान्य के विश्वास के लिए आएं जल्द फैसले
फैसले में लिखा कि न्यायालय का दायित्व है कि ऐसे अपराधों का निर्णय विधि के अनुसार अतिशीघ्र इस प्रकार करें कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा और कानून के शासन पर जनसामान्य का विश्वास अक्षुण्ण बना रहे।

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पुलिस-प्रशासन से न्यायालय की अपेक्षा
पुलिस-प्रशासन से अपेक्षा की गई कि निर्वाचन से जुड़े सभी प्राधिकारी संवेदनशील गांवों में समय रहते प्रभावी निवारक उपाए अपनाएं। शांति समितियों को सक्रिय करें। संभावित विवादों का समय रहते समाधान सुनिश्चित करें। कानून के शासन को प्रभावी ढंग से लागू करें।
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