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पीलीभीत: गेहूं और सरसों में दाग लगा रहा रतुआ रोग
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फोटो- 17 खेत में लगी सरसो की फसल। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। मौसम में आए बदलाव को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है तो अब गेहूं और फसलों में हो रही बीमारियों को लेकर यह चिंता और बढ़ गई है। माहू के साथ ही रतुआ नामक बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इससे फसलें बेरंग होती जा रही हैं।
किसानों को इस बार उम्मीद थी गेहूं व सरसों की फसल काफी अच्छी होगी। इसको लेकर किसान भी जी-तोड़ मेहनत कर रहे था। इस बीच गेहूं कि बढ़ोतरी शुरू हुई तो फरवरी के दूसरे सप्ताह में मौसम के मिजाज ने उनको चिंता में डाल दिया। तेजी से बढ़ रहे तापमान ने गेहूं की बढ़ोतरी पर ब्रेक लगा दिया, तो वही माहू भी नुकसान पहुंचाने लगा। इन समस्याओं का समाधान हो भी नहीं सका था कि रतुआ रोग ने पूरी स्थिति ही बिगाड़ दी।
इस बीमारी के प्रकोप से गेहूं की पत्तियों पर पीले, काले एवं भूरे रंग के धब्बे पड़ रहे हैं, जो कि धीरे-धीरे पूरी पत्ती पर फैल जाते हैं। इसका असर गेहूं की बालियों पर भी दिखाई दे रहा है। इसको लेकर किसान काफी परेशान है। कई किसानों के खेतों में बीमारी बढ़ जाने से पैदावार घट जाने की आशंका भी बढ़ गई है।
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बदले मौसम ने झुलसा दिया आलू
मौसम के बदलाव से गेहूं व सरसों की फसलों के अलावा आलू पर भी असर देखा जा रहा है। मौसम के बदलाव से कई जगह आलू में झुलसा रोग के कारण पत्तियां सूख कर पीली पड़ गई हैं। इससे आलू की बढ़ोतरी पर विराम लग गया है।
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क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर शैलेंद्र सिंह ढाका का कहना है कि गेहूं और सरसों में रतुआ रोग तेजी से लग रहा है। इस रोग से पत्तियों पर काले, पीले और भूरे रंग के धब्बे पड़ रहे हैं। जो की बाली और दाने पर प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा सरसों में भी यही बीमारी देखी जा रही है। उन्होंने किसानों से बीमारी की रोकथाम के लिए प्रॉपिकॉनाजोले नामक दवा का छिड़काव करने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि इस दवा के छिड़काव से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
डॉ. शैलेंद्र का कहना है कि तेजी के साथ चल रही उत्तर पश्चिम हवा का असर भी गेहूं पर पड़ रहा है। यह हवा खेतों में नमी को सुखा रही है। जबकि इस समय गेहूं को सिंचाई की काफी आवश्यकता है। उन्होंने हवा का रुख बदलने पर सिंचाई करने के लिए कहा है।
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किसानों ने कहा
दस एकड़ में गेहूं की फसल बोई है। इस समय गेहूं में दाना पड़ा हुआ है और पानी भी लगा हुआ है। हवा के चलने से फसल को नुकसान हो रहा है। बीमारी भी लग रही है।
- सचिन शर्मा, करेली
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इस समय गेहूं और सरसों की फसल में दाना पड़ चुका है। इसमें बढोतरी का समय है। मौसम में आए अचानक आए बदलाव से फसलों पर काफी प्रभाव पड़ रहा है।
- मयंक गंगवार, ज्योरा कल्यानपुर
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मौसम के बदलाव के साथ ही अन्य सागभाजी पर प्रभाव देखा जा रहा है। पिछेती बुआई की फसलों में काफी नुकसान हो रहा है। मौसम यदि सही न हुआ और बीमारी पर रोकथाम ने हुआ तो पैदावार पर सीधा असर पडे़गा।
- भूपेन्द्र सिंह मलिक, ऐमी
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किसानों को इस बार उम्मीद थी गेहूं व सरसों की फसल काफी अच्छी होगी। इसको लेकर किसान भी जी-तोड़ मेहनत कर रहे था। इस बीच गेहूं कि बढ़ोतरी शुरू हुई तो फरवरी के दूसरे सप्ताह में मौसम के मिजाज ने उनको चिंता में डाल दिया। तेजी से बढ़ रहे तापमान ने गेहूं की बढ़ोतरी पर ब्रेक लगा दिया, तो वही माहू भी नुकसान पहुंचाने लगा। इन समस्याओं का समाधान हो भी नहीं सका था कि रतुआ रोग ने पूरी स्थिति ही बिगाड़ दी।
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इस बीमारी के प्रकोप से गेहूं की पत्तियों पर पीले, काले एवं भूरे रंग के धब्बे पड़ रहे हैं, जो कि धीरे-धीरे पूरी पत्ती पर फैल जाते हैं। इसका असर गेहूं की बालियों पर भी दिखाई दे रहा है। इसको लेकर किसान काफी परेशान है। कई किसानों के खेतों में बीमारी बढ़ जाने से पैदावार घट जाने की आशंका भी बढ़ गई है।
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बदले मौसम ने झुलसा दिया आलू
मौसम के बदलाव से गेहूं व सरसों की फसलों के अलावा आलू पर भी असर देखा जा रहा है। मौसम के बदलाव से कई जगह आलू में झुलसा रोग के कारण पत्तियां सूख कर पीली पड़ गई हैं। इससे आलू की बढ़ोतरी पर विराम लग गया है।
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क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर शैलेंद्र सिंह ढाका का कहना है कि गेहूं और सरसों में रतुआ रोग तेजी से लग रहा है। इस रोग से पत्तियों पर काले, पीले और भूरे रंग के धब्बे पड़ रहे हैं। जो की बाली और दाने पर प्रभाव डालते हैं। इसके अलावा सरसों में भी यही बीमारी देखी जा रही है। उन्होंने किसानों से बीमारी की रोकथाम के लिए प्रॉपिकॉनाजोले नामक दवा का छिड़काव करने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि इस दवा के छिड़काव से बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
डॉ. शैलेंद्र का कहना है कि तेजी के साथ चल रही उत्तर पश्चिम हवा का असर भी गेहूं पर पड़ रहा है। यह हवा खेतों में नमी को सुखा रही है। जबकि इस समय गेहूं को सिंचाई की काफी आवश्यकता है। उन्होंने हवा का रुख बदलने पर सिंचाई करने के लिए कहा है।
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किसानों ने कहा
दस एकड़ में गेहूं की फसल बोई है। इस समय गेहूं में दाना पड़ा हुआ है और पानी भी लगा हुआ है। हवा के चलने से फसल को नुकसान हो रहा है। बीमारी भी लग रही है।
- सचिन शर्मा, करेली
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इस समय गेहूं और सरसों की फसल में दाना पड़ चुका है। इसमें बढोतरी का समय है। मौसम में आए अचानक आए बदलाव से फसलों पर काफी प्रभाव पड़ रहा है।
- मयंक गंगवार, ज्योरा कल्यानपुर
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मौसम के बदलाव के साथ ही अन्य सागभाजी पर प्रभाव देखा जा रहा है। पिछेती बुआई की फसलों में काफी नुकसान हो रहा है। मौसम यदि सही न हुआ और बीमारी पर रोकथाम ने हुआ तो पैदावार पर सीधा असर पडे़गा।
- भूपेन्द्र सिंह मलिक, ऐमी