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Pilibhit News: रमनगरा गांव तक सिमटी सीमांकन की कार्रवाई, ग्रामीण नाराज

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 01:24 AM IST
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Demarcation process limited to Ramnagara village; villagers upset.
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वन भूमि चिह्नित करने के लिए शारदा नदी के पार किया जा रहा सीमांकन


कलीनगर। तहसील क्षेत्र में शारदा नदी पार स्थित गांवों में टाइगर रिजर्व भूमि के सीमांकन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जहां टाइगर रिजर्व प्रशासन ने रमनगरा गांव में सीमांकन कर पिलर लगाने और फेंसिंग का कार्य शुरू कर दिया है। वहीं, ढकिया तालुके महाराजपुर, गुनहान और बिजौरी खुर्द कला जैसे अन्य गांवों में अतिक्रमण के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने से स्थानीय लोगों और पट्टेदारों में नाराजगी बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए संयुक्त सीमांकन की मांग उठाई है।

शारदा नदी पार स्थित टाइगर रिजर्व क्षेत्र की भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पिछले माह जिन गांवों में अपनी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए संयुक्त सीमांकन की बात कही थी। वहां कार्रवाई करने के बजाय केवल रमनगरा गांव के दायरे को ही शामिल किया गया है। इससे प्रभावित पट्टेदारों और ग्रामीणों में असंतोष बढ़ गया है।
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ग्रामीणों के अनुसार्र टाइगर रिजर्व की भूमि केवल रमनगरा तक सीमित नहीं है, बल्कि ढकिया तालुके महाराजपुर, गुनहान और बिजौरी खुर्द कला गांवों में भी बड़े पैमाने पर फैली हुई है। इन गांवों में भी वर्षों से अतिक्रमण होने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन वहां सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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आरोप है कि इन क्षेत्रों में लोग अब भी जमीन की जोताई और खेती कर रहे हैं, जबकि संबंधित भूमि का बड़ा हिस्सा टाइगर रिजर्व की सीमा में आता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से राजस्व विभाग और टाइगर रिजर्व प्रशासन के बीच संयुक्त सीमांकन का मामला लंबित था। कई बार सीमांकन की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन वह अधूरी रह गई और समस्या का समाधान नहीं हो सका। इस बीच अतिक्रमण बढ़ता गया और कब्जाधारियों ने टाइगर रिजर्व की भूमि पर खेती और अन्य गतिविधियां जारी रखीं।

विवाद तब और बढ़ गया जब हाल ही में टाइगर रिजर्व प्रशासन ने केवल रमनगरा गांव में विभागीय स्तर पर सीमांकन कर पिलर लगाने और तारबाड़ का कार्य शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया में राजस्व विभाग की सहभागिता नहीं रही। इससे उन पट्टेदारों की चिंता बढ़ गई, जिन्हें पूर्व में राजस्व विभाग ने ग्राम समाज और अन्य भूमि पर बसाया था। उनका कहना है कि यदि संयुक्त सीमांकन कराया जाता तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाती और किसी भी पात्र पट्टेदार को नुकसान नहीं उठाना पड़ता। ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्री एवं सांसद जितिन प्रसाद और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संवाद
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