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Pilibhit News: तूदाबंदी न होने से आहत किसान ने लेखपाल के सामने खुद पर छिड़का पेट्रोल, ग्रामीणों ने बचाया
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खुद पर पेट्रोल छिड़ने वाला पीड़ित। स्रोत सोशल मीडिया
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पीलीभीत/मझोला। करीब डेढ़ वर्ष बाद भी जमीन की तूदाबंदी न होनेे से आहत न्यूरिया के गांव भिंडारा निवासी किसान राजेश वर्मा ने लेखपाल के सामने पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह की कोशिश की। आग लगाने से पहले ही आसपास मौजूद लोगों ने राजेश को रोक लिया। घटना का पता चलने पर अमरिया के एसडीएम मयंक गोस्वामी भी मौके पर पहुंचे।
राजेश और उनके भाइयों की करीब दो एकड़ जमीन भिंडारा में मझोला-बिरहनी मार्ग के किनारे है। उसके एक ओर प्लाॅटिंग हो रही है, दूसरी ओर एक ईंट भट्ठा है। किसान ने अपनी जमीन की तूदाबंदी के लिए अमरिया तहसील में वाद दायर कर रखा है। अपनी जमीन के समीप निर्माण होता देखकर बुधवार दोपहर एक बजे राजेश ने लेखपाल शुभम गुप्ता को मौके पर बुलाया। तूदाबंदी के लिए लंबे समय से चल रही प्रक्रिया पर लेखपाल की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर ही राजेश ने आत्मदाह की कोशिश की। संवाद
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एसडीएम ने दिया जांच का आदेश
एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित राजेश और उनके भाई मोहनलाल से बात की। राजेश ने उन्हें बताया कि डेढ़ साल पहले तूदाबंदी के लिए वाद दायर किया था। तूदाबंदी तो फाइनल हुई नहीं, इस बीच उनके खेत के एक ओर एक जनप्रतिनिधि ने प्लाॅटिंग शुरू कर दी। दूसरी ओर भी भट्ठा स्वामी ने दीवार खड़ी कर दी। पक्की तूदाबंदी तक निर्माण न होने की मांग को लेकर तहसील दिवस में भी कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। एसडीएम ने बताया कि मामला तूदाबंदी का नहीं है। बल्कि चल रहे निर्माण कार्य के वैध या अवैध होने का है, इसलिए काम रुकवा दिया गया था। रात में फिर किसी ने काम कराया है। पीड़ित ने शिकायत दी है। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।
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एसडीएम ने दिया जांच का आदेश
एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित राजेश और उनके भाई मोहनलाल से बात की। राजेश ने उन्हें बताया कि डेढ़ साल पहले तूदाबंदी के लिए वाद दायर किया था। तूदाबंदी तो फाइनल हुई नहीं, इस बीच उनके खेत के एक ओर एक जनप्रतिनिधि ने प्लाॅटिंग शुरू कर दी। दूसरी ओर भी भट्ठा स्वामी ने दीवार खड़ी कर दी। पक्की तूदाबंदी तक निर्माण न होने की मांग को लेकर तहसील दिवस में भी कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। एसडीएम ने बताया कि मामला तूदाबंदी का नहीं है। बल्कि चल रहे निर्माण कार्य के वैध या अवैध होने का है, इसलिए काम रुकवा दिया गया था। रात में फिर किसी ने काम कराया है। पीड़ित ने शिकायत दी है। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।
