चुनाव आयोग सख्त: मतदाता सूची में गड़बड़ी पर पीलीभीत के दो एसडीएम निलंबित, एफआईआर में जुड़ेगी ये धारा
चुनाव आयोग ने पीलीभीत में मतदाता सूची गड़बड़ी के मामले में तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कर्तव्य में लापरवाही की धारा जोड़ी जाएगी।
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पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में अनियमितताओं के मामले में तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने यह निर्णय लेते हुए अगली कार्रवाई के लिए मामला प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा और मुख्य सचिव को भेज दिया है।
आयोग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक दोनों अधिकारियों और मतदाता पंजीकरण केंद्र (वीआरसी) कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ कोतवाली में दर्ज एफआईआर में बीएनएस की धारा 198 (कर्तव्य में लापरवाही) भी जोड़ी जाएगी। दोनों एसडीएम को शासन ने शनिवार को प्रतीक्षारत कर दिया था। वहीं, जिलाधिकारी आलोक कुमार उन्हें जिले से कार्यमुक्त कर चुके हैं।
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कार्रवाई के लिए आयोग की ओर से शनिवार को पत्र जारी किया गया। इसमें 23 अक्तूबर को डीएम की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट और 24 अक्तूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से लिखे गए पत्र का हवाला दिया गया है। आयोग ने रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद पांच बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इसमें पीलीभीत के दोनों तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को तत्काल निलंबित करते हुए उनके आरोपपत्र परीक्षण के लिए आयोग को भेजने को कहा गया है। आयोग की पूर्व अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों को बहाल नहीं किया जा सकेगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित न्यायालय में मुकदमे की प्रभावी पैरवी की जाए।
पांच एईआरओ की भूमिका भी जांच के दायरे में
मतदाता सूची में अनियमितताओं का मामला अब पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) तक भी पहुंच गया है। जांच के दौरान करीब 150 बूथों पर मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया और पांच एईआरओ की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेजी है। इन अधिकारियों के संबंध में आगे की कार्रवाई का निर्णय आयोग स्तर से लिया जाएगा।
पहले ही दोनों अफसर किए जा चुके हैं प्रतीक्षारत मामले में वीआरसी
कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित समय में जवाब की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने उसकी सेवा समाप्त करने की संस्तुति निर्वाचन आयोग को भेज दी है। वहीं, दोनों एसडीएम को शासन की ओर से पहले दी गई नई तैनाती के आदेश में बदलाव करते हुए प्रतीक्षारत कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने दोनों को जिले से कार्यमुक्त भी कर दिया है।
13,779 ऑफलाइन फार्मों की जांच में मिली थीं अनियमितताएं
सदर विधानसभा क्षेत्र 127 की मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। राजनीतिक दलों की ओर से भी इस मामले में ज्ञापन और प्रेसवार्ता कर कार्रवाई की मांग की गई थी। जांच में 31 मई से 28 अगस्त के बीच प्राप्त 13,779 ऑफलाइन फार्मों के निस्तारण में गड़बड़ी सामने आई थी। इनमें 10,470 फार्म स्वीकृत और 3,309 फार्म निरस्त किए गए थे। जांच में निरस्त फार्मों के निस्तारण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने और संबंधित अभिलेख उपलब्ध न होने की बात सामने आई थी।
इसके बाद सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप की तहरीर पर 22 अक्तूबर को कोतवाली नगर में तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी, हेमंत चौधरी और वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई। प्रकरण में दोनों एसडीएम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई थी।