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Raebareli News: महाराष्ट्र की फर्म से साढ़े चार साल में साइबर ठगी के भेजे गए 55 करोड़
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Tue, 13 Jan 2026 01:52 AM IST
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रायबरेली। मिर्च कारोबारी शादाब अली और उसके गिरोह के साइबर ठगी के खेल की जांच में और एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पता चला है कि महाराष्ट्र में अतुल सब्जी भंडार की फर्म से खुले खाते से 13 जनवरी 2021 से 14 जून 2025 के बीच रायबरेली स्थित आईसीआईसीआई बैंक में 55 करोड़ सात लाख 66 हजार 853 रुपये साइबर ठगी के भेजे गए थे।
इसमें शादाब और उसके गिरोह के सदस्यों ने 55 करोड़ चार लाख 74 हजार 940 रुपये निकालकर उसे ठिकाने भी लगा दिए। इस फर्म के प्रोपराइटर अतुल अशोक वाडीभाष्मे हैं। मामले का खुलासा हुआ तो साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने शेष रुपये को बैंक में होल्ड करा दिए।
साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने बीते शनिवार को बस स्टेशन निवासी राज सिंह और हरचंदपुर थाना क्षेत्र के मलिकपुर निवासी सुधांशु सौरभ को जेल भेजा है। गिरोह का सरगना गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के ओनई पहाड़पुर गांव निवासी शादाब अली फरार है। शादाब मिर्च का बड़ा कारोबारी है। उसकी रायबरेली शहर स्थित नवीन मंडी में मिर्च की आढ़त है।
शादाब अपने गिरोह के साथियों के साथ मिलकर आढ़त पर आने वाले गरीब लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर पहले फर्जी फर्म रजिस्टर करवाता था और फिर उन फर्मों के नाम से बैंकों में चालू खाता खोलकर साइबर फ्राड के माध्यम से प्राप्त रुपये मंगाता था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि शादाब अली और उसके गिरोह के देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध का पूरा नेटवर्क है। ये लोग गरीबों को टारगेट करते हैं, ताकि उन्हें पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाए जा सके।
विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधी शादाब के जरिये बैंकों में खाते खोलकर रुपये यहां भेजते थे। इसके बाद शादाब उन रुपयों को अपराधियों के पास अन्य खातों के माध्यम से भिजवाने का काम करता था।
मामले का खुलासा होने के बाद से शादाब भूमिगत हो गया है। पुलिस से बचने के लिए वह अपने ठिकाने बदल रहा है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी अजय सिंह तोमर की अगुवाई में पुलिस टीम शादाब की गिरफ्तारी के लिए लगाई गई है।
कर्नाटक और गुजरात से शादाब की खंगाली जा रही कुंडली
शादाब के खिलाफ कर्नाटक के साइबर थाना देवनगरी सिटी और गुजरात के साइबर थाना भावनगर में आईटीएक्ट आदि की धारा में प्राथमिकी दर्ज है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस इन दो राज्यों की पुलिस से पता करके शादाब अली की कुंडली खंगाल रही है। पता लगाया जा रहा है कि इन दोनों राज्यों में शादाब के साथ साइबर अपराध में अन्य कितने लोग जुड़े थे।
2024 से 2025 के बीच गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलगांना, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से रायबरेली की यूको, फेडरल, एसबीआई, यस बैंक के खातों में 15 करोड़ रुपये भेजने का खुलासा पहले ही हो चुका है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस स्तर पर साइबर अपराध का धंधा किस तरह जिले के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में फलफूल रहा है।
बैंक कर्मियों के खिलाफ भी कसेगा शिकंजा
साइबर क्राइम थाने में दर्ज किए गए आईटी एक्ट मामले में अज्ञात बैंक कर्मियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। ऐसे में रायबरेली के यूको, फेडरल, एसबीआई, यस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के कर्मियों के भी साइबर अपराध में शामिल होने का अंदेशा जताया जा रहा है। इसकी जांच होगी। ऐसे में बैंककर्मियों के खिलाफ शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
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इसमें शादाब और उसके गिरोह के सदस्यों ने 55 करोड़ चार लाख 74 हजार 940 रुपये निकालकर उसे ठिकाने भी लगा दिए। इस फर्म के प्रोपराइटर अतुल अशोक वाडीभाष्मे हैं। मामले का खुलासा हुआ तो साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने शेष रुपये को बैंक में होल्ड करा दिए।
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साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने बीते शनिवार को बस स्टेशन निवासी राज सिंह और हरचंदपुर थाना क्षेत्र के मलिकपुर निवासी सुधांशु सौरभ को जेल भेजा है। गिरोह का सरगना गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के ओनई पहाड़पुर गांव निवासी शादाब अली फरार है। शादाब मिर्च का बड़ा कारोबारी है। उसकी रायबरेली शहर स्थित नवीन मंडी में मिर्च की आढ़त है।
शादाब अपने गिरोह के साथियों के साथ मिलकर आढ़त पर आने वाले गरीब लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर पहले फर्जी फर्म रजिस्टर करवाता था और फिर उन फर्मों के नाम से बैंकों में चालू खाता खोलकर साइबर फ्राड के माध्यम से प्राप्त रुपये मंगाता था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि शादाब अली और उसके गिरोह के देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध का पूरा नेटवर्क है। ये लोग गरीबों को टारगेट करते हैं, ताकि उन्हें पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाए जा सके।
विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधी शादाब के जरिये बैंकों में खाते खोलकर रुपये यहां भेजते थे। इसके बाद शादाब उन रुपयों को अपराधियों के पास अन्य खातों के माध्यम से भिजवाने का काम करता था।
मामले का खुलासा होने के बाद से शादाब भूमिगत हो गया है। पुलिस से बचने के लिए वह अपने ठिकाने बदल रहा है। साइबर क्राइम थाना प्रभारी अजय सिंह तोमर की अगुवाई में पुलिस टीम शादाब की गिरफ्तारी के लिए लगाई गई है।
कर्नाटक और गुजरात से शादाब की खंगाली जा रही कुंडली
शादाब के खिलाफ कर्नाटक के साइबर थाना देवनगरी सिटी और गुजरात के साइबर थाना भावनगर में आईटीएक्ट आदि की धारा में प्राथमिकी दर्ज है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस इन दो राज्यों की पुलिस से पता करके शादाब अली की कुंडली खंगाल रही है। पता लगाया जा रहा है कि इन दोनों राज्यों में शादाब के साथ साइबर अपराध में अन्य कितने लोग जुड़े थे।
2024 से 2025 के बीच गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलगांना, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब से रायबरेली की यूको, फेडरल, एसबीआई, यस बैंक के खातों में 15 करोड़ रुपये भेजने का खुलासा पहले ही हो चुका है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस स्तर पर साइबर अपराध का धंधा किस तरह जिले के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में फलफूल रहा है।
बैंक कर्मियों के खिलाफ भी कसेगा शिकंजा
साइबर क्राइम थाने में दर्ज किए गए आईटी एक्ट मामले में अज्ञात बैंक कर्मियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। ऐसे में रायबरेली के यूको, फेडरल, एसबीआई, यस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के कर्मियों के भी साइबर अपराध में शामिल होने का अंदेशा जताया जा रहा है। इसकी जांच होगी। ऐसे में बैंककर्मियों के खिलाफ शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।