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Raebareli News: एम्स में चार माह की बच्ची को आनुवंशिक बीमारी से मिली निजात
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 29 Jan 2026 09:18 PM IST
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रायबरेली एम्स में इलाज के बाद भर्ती बच्ची के साथ डॉक्टर की टीम।
- फोटो : प्रयागराज जा रहे कांग्रेस के पूर्व एमएलसी दीपक सिंह को गौरीगंज में रोकते पुलिसकर्मी।
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चार सात की बच्ची को जीवनदान मिला है। सांस लेने में समस्या होने पर उसे अस्पताल लाया गया। जांच में आनुवंशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी की पुष्टि हुई। तीन माह इलाज के बाद स्वस्थ होते ही बच्ची को बृहस्पतिवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। पूर्व में समय से इलाज न कराने पर बच्ची की बड़ी बहन इसी बीमारी से मौत हो चुकी है।
खीरों क्षेत्र की चार माह की बच्ची को निमोनिया की आशंका पर तीन माह पहले एम्स में लाकर भर्ती कराया गया था। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नमिता मिश्रा की देखरेख में बच्ची को पीआईसीयू में भर्ती करके इलाज शुरू हुआ। उपचार के दौरान बच्ची में हाथ पैर की कमजोरी की समस्या दिखी। आनुवंशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी की पुष्टि होने के बाद इलाज किया गया। डॉ. नमिता का कहना है कि इस बीमारी में मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसें सही तरीके से कार्य नहीं करतीं। मांसपेशियां कमजोर और पतली होने से रोगी को बैठने, खड़े होने, चलने में कठिनाई होती है। गंभीर अवस्था में सांस लेने और निगलने में भी परेशानी होती है।
बच्ची के इलाज में डॉ. राजकुमार, डॉ. मृत्युंजय कुमार का योगदान रहा। एम्स के अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने चिकित्सकों की टीम को सफलता पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन के नेतृत्व में एम्स मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा दे रहा है। पूरी तरह से स्वस्थ्य होने के बाद बच्ची को घर भेज दिया गया है।
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खीरों क्षेत्र की चार माह की बच्ची को निमोनिया की आशंका पर तीन माह पहले एम्स में लाकर भर्ती कराया गया था। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नमिता मिश्रा की देखरेख में बच्ची को पीआईसीयू में भर्ती करके इलाज शुरू हुआ। उपचार के दौरान बच्ची में हाथ पैर की कमजोरी की समस्या दिखी। आनुवंशिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी की पुष्टि होने के बाद इलाज किया गया। डॉ. नमिता का कहना है कि इस बीमारी में मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसें सही तरीके से कार्य नहीं करतीं। मांसपेशियां कमजोर और पतली होने से रोगी को बैठने, खड़े होने, चलने में कठिनाई होती है। गंभीर अवस्था में सांस लेने और निगलने में भी परेशानी होती है।
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बच्ची के इलाज में डॉ. राजकुमार, डॉ. मृत्युंजय कुमार का योगदान रहा। एम्स के अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने चिकित्सकों की टीम को सफलता पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन के नेतृत्व में एम्स मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा दे रहा है। पूरी तरह से स्वस्थ्य होने के बाद बच्ची को घर भेज दिया गया है।
