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आदित्य हत्याकांड : भाई के लिए रुचि ने लड़ी लंबी लड़ाई
Wed, 19 Aug 2026 01:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Wed, 19 Aug 2026 01:26 AM IST
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अपनी बहनों के साथ मृतक आदित्य।
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रायबरेली। इकलौते भाई आदित्य प्रताप सिंह की हत्या के बाद बहन रुचि सिंह ने न्याय के लिए डटकर लड़ाई लड़ी। इस संघर्ष में उन्होंने अपने भाई के साथ अपने बच्चे को भी खो दिया पर हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार, 629 तारीखों और करीब सात साल बाद उन्हें न्याय मिल ही गया। छात्र आदित्य प्रताप सिंह की हत्या 9 अक्तूबर 2019 को हुई थी। यह घटना महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के रतापुर स्थित सोमू ढाबा में हुई।
उनका शव हरचंदपुर थाना क्षेत्र के गढ़ी खास गांव के पास महराजगंज रोड पर मिला था। जिला जज न्यायालय ने मंगलवार को इस मामले में फैसला सुनाया। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव और सोमू ढाबा संचालक सुरेश यादव सहित 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली। दो दोषियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। आदित्य की हत्या के समय रुचि सिंह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में बीए की पढ़ाई कर रही थीं।
आरोपी रसूखदार और पैसे वाले थे, जिससे परिवार के लिए इन्साफ पाना आसान नहीं था। रुचि ने स्वयं मोर्चा संभाला और भाई को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया। रुचि की शादी दो साल पहले आगरा में हुई थी पर वह न्याय के लिए मायके में ही रहीं। बीती 30 जुलाई को न्यायालय को इस मामले में फैसला सुनाना था। उस समय वह गर्भवती थीं और भागदौड़ के चलते बीमार हो गईं।
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अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद, गर्भ में पल रहे उनके बच्चे की मौत हो गई। उस दिन फैसला टल गया लेकिन रुचि ने हार नहीं मानी और 18 अगस्त को न्यायालय ने फिर तारीख तय की। फैसला आते ही 14 दोषियों के चेहरे झुक गए। आदित्य की बहन रुचि की आंखों से इंसाफ मिलने की खुशी में आंसू बन छलक पड़े।
इस प्रकरण के शुरुआती दौर में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शशिशेखर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया। इसके अतिरिक्त चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया था।
कोर्ट परिसर में तैनात रहा पुलिस बल
मंगलवार दोपहर दो बजे आदित्य की हत्या के दोषियों को सजा सुनाई जानी थी। करीब सवा दो बजे सभी दोषियों को कोर्ट में पेश किया गया। सभी दोषियों और उनके परिजनों के चेहरे पर सजा से पहले ही डर साफ नजर आया। कुछ देर बाद ही जज ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों को सजा सुनाए जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत से बाहर निकालकर पुलिस वाहन तक पहुंचाया गया। सजा होने के बाद कोर्ट परिसर में लोग चर्चा करते दिखे। बोले, भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती है।
-9 अक्तूबर 2019 को सोमू ढाबा में आदित्य की हत्या।
10-अक्तूबर 2019 को शव गढ़ी खास गांव के पास मिला।
-11 जनवरी 2019 को जिला मुख्यालय में हुआ पोस्टमार्टम।
-25 दिसंबर 2019 को आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल हुआ।
-20 जनवरी 2020 को जिला जज कोर्ट में पहली सुनवाई।
-18 अगस्त 2026 को 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा।
हाईकोर्ट के आदेश पर तेजी से हुई थी सुनवाई
बहन रुचि के मुताबिक 20 जनवरी को पहली सुनवाई जिला जज कोर्ट में हुई थी। बाद में यह मामला एडीजे प्रथम के यहां भेज दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तय हुआ था कि जिला जज ही प्रतिदिन मामले की सुनवाई करेंगे। इसके बाद तेजी से मामले की सुनवाई हुई। मामले में 13 गवाह कोर्ट में पेश हुए। बीती जुलाई में डीबीआर को लेकर विवाद हुआ था। इस पर शासकीय अधिवक्ता विवेक सिंह राठौर को हटाकर वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश प्रताप सिंह को इस मामले के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त किया गया था।
लंबी लड़ाई के बाद मिला न्याय
आदित्य प्रताप सिंह की बहन रुचि ने बताया कि आरके यादव, अभितेज सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया। इन्हीं दोनों ने स्कार्पियो से भाई का पीछा किया था। उन्होंने 14 दोषियों को सजा सुनाए जाने पर खुशी जताई। कहा कि लंबी लड़ाई के बाद न्याय मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनको न्याय दिलाने में मदद की। यदि मुख्यमंत्री मामले को गंभीरता से न लेते तो उनकी भी हत्या हो जाती। उन्हें सुरक्षा दी गई।
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उनका शव हरचंदपुर थाना क्षेत्र के गढ़ी खास गांव के पास महराजगंज रोड पर मिला था। जिला जज न्यायालय ने मंगलवार को इस मामले में फैसला सुनाया। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आरपी यादव और सोमू ढाबा संचालक सुरेश यादव सहित 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली। दो दोषियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। आदित्य की हत्या के समय रुचि सिंह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में बीए की पढ़ाई कर रही थीं।
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आरोपी रसूखदार और पैसे वाले थे, जिससे परिवार के लिए इन्साफ पाना आसान नहीं था। रुचि ने स्वयं मोर्चा संभाला और भाई को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया। रुचि की शादी दो साल पहले आगरा में हुई थी पर वह न्याय के लिए मायके में ही रहीं। बीती 30 जुलाई को न्यायालय को इस मामले में फैसला सुनाना था। उस समय वह गर्भवती थीं और भागदौड़ के चलते बीमार हो गईं।
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अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद, गर्भ में पल रहे उनके बच्चे की मौत हो गई। उस दिन फैसला टल गया लेकिन रुचि ने हार नहीं मानी और 18 अगस्त को न्यायालय ने फिर तारीख तय की। फैसला आते ही 14 दोषियों के चेहरे झुक गए। आदित्य की बहन रुचि की आंखों से इंसाफ मिलने की खुशी में आंसू बन छलक पड़े।
इस प्रकरण के शुरुआती दौर में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक शशिशेखर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया। इसके अतिरिक्त चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया था।
कोर्ट परिसर में तैनात रहा पुलिस बल
मंगलवार दोपहर दो बजे आदित्य की हत्या के दोषियों को सजा सुनाई जानी थी। करीब सवा दो बजे सभी दोषियों को कोर्ट में पेश किया गया। सभी दोषियों और उनके परिजनों के चेहरे पर सजा से पहले ही डर साफ नजर आया। कुछ देर बाद ही जज ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों को सजा सुनाए जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत से बाहर निकालकर पुलिस वाहन तक पहुंचाया गया। सजा होने के बाद कोर्ट परिसर में लोग चर्चा करते दिखे। बोले, भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती है।
-9 अक्तूबर 2019 को सोमू ढाबा में आदित्य की हत्या।
10-अक्तूबर 2019 को शव गढ़ी खास गांव के पास मिला।
-11 जनवरी 2019 को जिला मुख्यालय में हुआ पोस्टमार्टम।
-25 दिसंबर 2019 को आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल हुआ।
-20 जनवरी 2020 को जिला जज कोर्ट में पहली सुनवाई।
-18 अगस्त 2026 को 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा।
हाईकोर्ट के आदेश पर तेजी से हुई थी सुनवाई
बहन रुचि के मुताबिक 20 जनवरी को पहली सुनवाई जिला जज कोर्ट में हुई थी। बाद में यह मामला एडीजे प्रथम के यहां भेज दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तय हुआ था कि जिला जज ही प्रतिदिन मामले की सुनवाई करेंगे। इसके बाद तेजी से मामले की सुनवाई हुई। मामले में 13 गवाह कोर्ट में पेश हुए। बीती जुलाई में डीबीआर को लेकर विवाद हुआ था। इस पर शासकीय अधिवक्ता विवेक सिंह राठौर को हटाकर वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश प्रताप सिंह को इस मामले के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त किया गया था।
लंबी लड़ाई के बाद मिला न्याय
आदित्य प्रताप सिंह की बहन रुचि ने बताया कि आरके यादव, अभितेज सिंह को कोर्ट ने बरी कर दिया। इन्हीं दोनों ने स्कार्पियो से भाई का पीछा किया था। उन्होंने 14 दोषियों को सजा सुनाए जाने पर खुशी जताई। कहा कि लंबी लड़ाई के बाद न्याय मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनको न्याय दिलाने में मदद की। यदि मुख्यमंत्री मामले को गंभीरता से न लेते तो उनकी भी हत्या हो जाती। उन्हें सुरक्षा दी गई।

अपनी बहनों के साथ मृतक आदित्य।

अपनी बहनों के साथ मृतक आदित्य।

अपनी बहनों के साथ मृतक आदित्य।