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आरटीई : सीटें फुल, 2410 बच्चे प्रवेश से वंचित
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 04 May 2026 12:58 AM IST
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रायबरेली। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस वर्ष करीब 50 फीसदी बच्चों को महज इसलिए निजी स्कूलों में प्रवेश पाने का लाभ नहीं मिल सका, क्योंकि स्कूल में निर्धारित सीटें फुल हो चुकी थीं। पात्र होने के बावजूद लॉटरी में विद्यालय आवंटन न होने से इन बच्चों को निराश होना पड़ा।
आरटीई के अंतर्गत निजी विद्यालयों में निर्धारित सीटों की 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है, जिसका सत्यापन होने के बाद पात्र बच्चों को लॉटरी में शामिल कराया जाता है। लॉटरी में जिन बच्चों को विद्यालय आवंटित होते हैं, उन्हें आवंटित विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाता है। इस वर्ष तीन चरणों में चयन प्रक्रिया पूरी कराई गई। तीनों ही चरणों की प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी कर ली गई है।
तीनों चरणों में 2411 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए हैं, जिनमें काफी बच्चे अब भी प्रवेश पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। तीनों ही चरणों में सत्यापन के बाद 4821 बच्चों के आवेदन लॉटरी में शामिल किए गए, लेकिन 2411 बच्चों को ही स्कूल आवंटित हो सके और 2410 बच्चों को निराश होना पड़ा। प्रथम चरण में 2887, द्वितीय चरण में 1305 एवं तृतीय चरण में 629 आवेदन पत्र लॉटरी में शामिल हुए थे, जबकि प्रथम चरण में 1320, द्वितीय चरण में 705 एवं तृतीय चरण में 386 बच्चों को स्कूल आवंटित हुए। प्रथम चरण में 1567, द्वितीय चरण में 600 एवं तृतीय चरण में 2432 बच्चों को इसलिए स्कूल आवंटित नहीं हुए, क्योंकि संबंधित स्कूलों में सीटें फुल हो चुकी थीं।
नियमों की सख्ती से 48 फीसदी आवेदन हुए रद्द
आरटीई के अंतर्गत इस वर्ष आवेदन की कमी नहीं रही। शुरुआत में ही प्रचार-प्रसार भी बहुत कराया गया, जिसका असर यह हुआ कि तीनों ही चरणों में अभिभावकों ने अपने बच्चों का प्रवेश कराने के लिए आवेदन में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह बात अलग रही कि लगभग 48 फीसदी आवेदन पत्र सत्यापन के दौरान निरस्त कर दिए गए। इसलिए ऐसे अभिभावकों को निराश होना पड़ा। तीनों चरणों में कुल 9229 आवेदन आए, जिनमें 4408 आवेदन पत्रों को निरस्त किया गया।
आवेदन निरस्त किए जाने की प्रमुख वजह वार्ड या ग्राम पंचायत से इतर फॉर्म भरना रहा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह का कहना है कि नियमों के अनुरूप पात्र मिले आवेदन को लॉटरी में शामिल कराया गया। जिन बच्चों को स्कूल आवंटित हुए हैं, उन सभी का दाखिला जल्द करा देंगे।
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आरटीई के अंतर्गत निजी विद्यालयों में निर्धारित सीटों की 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है, जिसका सत्यापन होने के बाद पात्र बच्चों को लॉटरी में शामिल कराया जाता है। लॉटरी में जिन बच्चों को विद्यालय आवंटित होते हैं, उन्हें आवंटित विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाता है। इस वर्ष तीन चरणों में चयन प्रक्रिया पूरी कराई गई। तीनों ही चरणों की प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी कर ली गई है।
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तीनों चरणों में 2411 बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए हैं, जिनमें काफी बच्चे अब भी प्रवेश पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। तीनों ही चरणों में सत्यापन के बाद 4821 बच्चों के आवेदन लॉटरी में शामिल किए गए, लेकिन 2411 बच्चों को ही स्कूल आवंटित हो सके और 2410 बच्चों को निराश होना पड़ा। प्रथम चरण में 2887, द्वितीय चरण में 1305 एवं तृतीय चरण में 629 आवेदन पत्र लॉटरी में शामिल हुए थे, जबकि प्रथम चरण में 1320, द्वितीय चरण में 705 एवं तृतीय चरण में 386 बच्चों को स्कूल आवंटित हुए। प्रथम चरण में 1567, द्वितीय चरण में 600 एवं तृतीय चरण में 2432 बच्चों को इसलिए स्कूल आवंटित नहीं हुए, क्योंकि संबंधित स्कूलों में सीटें फुल हो चुकी थीं।
नियमों की सख्ती से 48 फीसदी आवेदन हुए रद्द
आरटीई के अंतर्गत इस वर्ष आवेदन की कमी नहीं रही। शुरुआत में ही प्रचार-प्रसार भी बहुत कराया गया, जिसका असर यह हुआ कि तीनों ही चरणों में अभिभावकों ने अपने बच्चों का प्रवेश कराने के लिए आवेदन में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह बात अलग रही कि लगभग 48 फीसदी आवेदन पत्र सत्यापन के दौरान निरस्त कर दिए गए। इसलिए ऐसे अभिभावकों को निराश होना पड़ा। तीनों चरणों में कुल 9229 आवेदन आए, जिनमें 4408 आवेदन पत्रों को निरस्त किया गया।
आवेदन निरस्त किए जाने की प्रमुख वजह वार्ड या ग्राम पंचायत से इतर फॉर्म भरना रहा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह का कहना है कि नियमों के अनुरूप पात्र मिले आवेदन को लॉटरी में शामिल कराया गया। जिन बच्चों को स्कूल आवंटित हुए हैं, उन सभी का दाखिला जल्द करा देंगे।
