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Raebareli News: भोर में गांव पहुंचे लड़कियों के शव, हंगामा
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Tue, 10 Feb 2026 01:13 AM IST
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जगतपुर थाना क्षेत्र के कोडर गांव में हंगामे के दौरान परिजनों सांत्वना देते एसडीएम।
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जगतपुर। गंगा एक्सप्रेसवे पर रविवार शाम को मौत बनकर दौड़ी कार ने चार लड़कियों की जान ले ली। रविवार को पूरी रात पीड़ित परिवारों की चित्कार से गांव में कोई सो नहीं सका। भोर तीन बजे पोस्टमार्टम के बाद जब लड़कियों के शव गांव पहुंचे तो परिवार दहाड़े मारकर रोने लगे।
सोमवार सुबह नौ बजे मृत रश्मि के परिजनों ने शव के अंतिम संस्कार से इन्कार कर दिया। इसके बाद शालिनी और आसमा के परिवार के लोग भी प्रशासन से मुआवजे की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। पुलिस ने परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन नहीं माने, इसके बाद डलमऊ एसडीएम पहुंचे तो उन्होंने हर तरह की मदद का आश्वासन देकर परिवार के लोगों की नाराजगी को दूर किया। इसके बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया।
कोडर से कुछ दूरी पर बसे चूली गांव में रविवार को भंडारा था। इसका आयोजन चूली गांव के दल बहादुर सैनी ने कराया था। शाम को कोडर गांव की नौ लड़कियां भंडारा खाने के बाद गांव लौट रही थीं। गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार कार ने इन सभी को रौंद दिया था। इस घटना में कौडर गांव की आसमां (18), शालिनी (15), रश्मि (17) व अलीगंज डिगवा पाली गांव निवासी हिमांशी (23) की मौत हो गई थी। पांच लड़कियां घायल हो गई थीं, जिनका इलाज चल रहा है।
डीएम हर्षिता माथुर के निर्देश पर शवों का रात में ही पोस्टमार्टम किया गया। भोर करीब तीन बजे आसमां, शालिनी, रश्मि के शव कोडर गांव पहुंचे। हिमांशी के शव को अलीगंज डिगवा पाली पहुंचाया गया। रात भर परिवार के लोग रोते बिलखते रहे। सोमवार सुबह सभी शवों की अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही थी कि नौ बजे रश्मि के परिवार ने अंतिम संस्कार से इन्कार कर हंगामा शुरू कर दिया।
इस पर आसमां और शालिनी के परिवार के लोगों ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर जमकर हंगामा किया। मांग की गई कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। मामले की प्रशासनिक अमले को दी गई। लेखपाल रुद्र प्रताप पटेल और पुलिस परिजनों को समझाती रही, लेकिन वे नहीं माने। सुबह करीब 10:30 बजे डलमऊ एसडीएम सतेंद्र सिंह गांव के बाहर खड़े हो गए। इस दौरान जमकर हंगामा होता रहा। इस पर कानूनगो उदय प्रताप ने एसडीएम को पूरी बात बताई तो वह गांव के भीतर दाखिल हुए और परिजनों से बात की।
पीड़ित परिवारों का कहना था कि प्रशासन की लापरवाही से हादसा हुआ है। मुआवजा दिया जाए। एसडीएम ने आलाधिकारियों से बात करने के बाद परिजनों को आश्वस्त किया सभी पीड़ितों को जमीन, मुख्यमंत्री आवास के साथ प्रशासनिक स्तर से जो भी मदद होगी, वह दी जाएगी। इसके बाद करीब 10:30 बजे परिजन शवों का अंतिम संस्कार करने को राजी हो गए।
पुलिस सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार
पुलिस सुरक्षा में आसमां, शालिनी व रश्मि के शवों को डलमऊ घाट लाया गया, जहां अंतिम संस्कार किया गया। हिमांशी का अंतिम संस्कार ऊंचाहार के गोकना घाट पर हुआ।
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सोमवार सुबह नौ बजे मृत रश्मि के परिजनों ने शव के अंतिम संस्कार से इन्कार कर दिया। इसके बाद शालिनी और आसमा के परिवार के लोग भी प्रशासन से मुआवजे की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। पुलिस ने परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन नहीं माने, इसके बाद डलमऊ एसडीएम पहुंचे तो उन्होंने हर तरह की मदद का आश्वासन देकर परिवार के लोगों की नाराजगी को दूर किया। इसके बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया।
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कोडर से कुछ दूरी पर बसे चूली गांव में रविवार को भंडारा था। इसका आयोजन चूली गांव के दल बहादुर सैनी ने कराया था। शाम को कोडर गांव की नौ लड़कियां भंडारा खाने के बाद गांव लौट रही थीं। गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार कार ने इन सभी को रौंद दिया था। इस घटना में कौडर गांव की आसमां (18), शालिनी (15), रश्मि (17) व अलीगंज डिगवा पाली गांव निवासी हिमांशी (23) की मौत हो गई थी। पांच लड़कियां घायल हो गई थीं, जिनका इलाज चल रहा है।
डीएम हर्षिता माथुर के निर्देश पर शवों का रात में ही पोस्टमार्टम किया गया। भोर करीब तीन बजे आसमां, शालिनी, रश्मि के शव कोडर गांव पहुंचे। हिमांशी के शव को अलीगंज डिगवा पाली पहुंचाया गया। रात भर परिवार के लोग रोते बिलखते रहे। सोमवार सुबह सभी शवों की अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही थी कि नौ बजे रश्मि के परिवार ने अंतिम संस्कार से इन्कार कर हंगामा शुरू कर दिया।
इस पर आसमां और शालिनी के परिवार के लोगों ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर जमकर हंगामा किया। मांग की गई कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। मामले की प्रशासनिक अमले को दी गई। लेखपाल रुद्र प्रताप पटेल और पुलिस परिजनों को समझाती रही, लेकिन वे नहीं माने। सुबह करीब 10:30 बजे डलमऊ एसडीएम सतेंद्र सिंह गांव के बाहर खड़े हो गए। इस दौरान जमकर हंगामा होता रहा। इस पर कानूनगो उदय प्रताप ने एसडीएम को पूरी बात बताई तो वह गांव के भीतर दाखिल हुए और परिजनों से बात की।
पीड़ित परिवारों का कहना था कि प्रशासन की लापरवाही से हादसा हुआ है। मुआवजा दिया जाए। एसडीएम ने आलाधिकारियों से बात करने के बाद परिजनों को आश्वस्त किया सभी पीड़ितों को जमीन, मुख्यमंत्री आवास के साथ प्रशासनिक स्तर से जो भी मदद होगी, वह दी जाएगी। इसके बाद करीब 10:30 बजे परिजन शवों का अंतिम संस्कार करने को राजी हो गए।
पुलिस सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार
पुलिस सुरक्षा में आसमां, शालिनी व रश्मि के शवों को डलमऊ घाट लाया गया, जहां अंतिम संस्कार किया गया। हिमांशी का अंतिम संस्कार ऊंचाहार के गोकना घाट पर हुआ।