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Raebareli News: जिले की पहचान के लिए दो मिठाइयों में होड़, जलेबी और पेड़ा दावेदार
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 13 Feb 2026 01:19 AM IST
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डलमऊ के एक दुकान में सजे पेड़े।
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रायबरेली। राज्य सरकार की एक जनपद-एक व्यंजन योजना के तहत रायबरेली की विशिष्ट पहचान के लिए अब जलेबी और पेड़ा के बीच मुकाबला है। जिले की इस प्रतिष्ठित पहचान को हासिल करने की दौड़ में ये दोनों ही मिष्ठान्न प्रमुख दावेदार हैं। बजट में प्रावधान होने के बाद जिला स्तर पर इनमें से किसी एक पर मुहर लगाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। उम्मीद है कि फरवरी के अंत तक यह तय हो जाएगा कि जिले की ब्रांडिंग किस मिठाई के नाम से होगी।
इस योजना का उद्देश्य जिले के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। जिले में जलेबी और पेड़ा दोनों का अपना खास स्वाद और इतिहास है। इनमें से किसी एक का चयन होने से न केवल स्थानीय कारोबारियों को लाभ होगा, बल्कि यह पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण बनेगा।
रायबरेली में डलमऊ का पेड़ा अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध है, जो जिले के साथ-साथ पड़ोसी जनपदों में भी काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा, शहर का लाल पेड़ा और सलोन का सफेद पेड़ा भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। दूसरी ओर जलेबी जिले के हर कस्बे और मिठाई की दुकान की पहचान बनी हुई है। सुबह हो या शाम, यहां दुकानों पर जलेबी की महक जरूर मिलती है और ग्रामीण मेलों में तो इसकी अलग ही धूम रहती है। वर्तमान में उद्योग विभाग दोनों मिठाइयों की लोकप्रियता, उत्पादन क्षमता और बाजार में उनकी मांग का गहन मूल्यांकन कर रहा है। जल्द ही अंतिम निर्णय लेकर चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
डलमऊ का पेड़ा सबकी पसंद
डलमऊ का पेड़ा अपनी खास पहचान रखता है। दुकानदार प्रमोद मोदनवाल बताते हैं कि जो भी व्यक्ति डलमऊ आता है, वह यहां का पेड़ा साथ ले जाना नहीं भूलता। उम्मीद है कि एक जनपद-एक व्यंजन योजना में पेड़े को ही जिले की पहचान के रूप में शामिल किया जाएगा। वहीं, दुकानदार अनिकेत कुमार का कहना है कि यूं तो मेलों और सामान्य दिनों में बनने वाली जलेबी का अपना अलग स्वाद है, लेकिन डलमऊ के पेड़े का स्थान सभी मिठाइयों में सर्वोपरि है।
एक जनपद-एक व्यंजन योजना के अंतर्गत जिले में जलेबी अथवा पेड़ा में से किसी एक का चयन किया जाना है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही चयन करके रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
परमहंस मौर्या, उपायुक्त जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र रायबरेली
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इस योजना का उद्देश्य जिले के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। जिले में जलेबी और पेड़ा दोनों का अपना खास स्वाद और इतिहास है। इनमें से किसी एक का चयन होने से न केवल स्थानीय कारोबारियों को लाभ होगा, बल्कि यह पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण बनेगा।
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रायबरेली में डलमऊ का पेड़ा अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध है, जो जिले के साथ-साथ पड़ोसी जनपदों में भी काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा, शहर का लाल पेड़ा और सलोन का सफेद पेड़ा भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। दूसरी ओर जलेबी जिले के हर कस्बे और मिठाई की दुकान की पहचान बनी हुई है। सुबह हो या शाम, यहां दुकानों पर जलेबी की महक जरूर मिलती है और ग्रामीण मेलों में तो इसकी अलग ही धूम रहती है। वर्तमान में उद्योग विभाग दोनों मिठाइयों की लोकप्रियता, उत्पादन क्षमता और बाजार में उनकी मांग का गहन मूल्यांकन कर रहा है। जल्द ही अंतिम निर्णय लेकर चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
डलमऊ का पेड़ा सबकी पसंद
डलमऊ का पेड़ा अपनी खास पहचान रखता है। दुकानदार प्रमोद मोदनवाल बताते हैं कि जो भी व्यक्ति डलमऊ आता है, वह यहां का पेड़ा साथ ले जाना नहीं भूलता। उम्मीद है कि एक जनपद-एक व्यंजन योजना में पेड़े को ही जिले की पहचान के रूप में शामिल किया जाएगा। वहीं, दुकानदार अनिकेत कुमार का कहना है कि यूं तो मेलों और सामान्य दिनों में बनने वाली जलेबी का अपना अलग स्वाद है, लेकिन डलमऊ के पेड़े का स्थान सभी मिठाइयों में सर्वोपरि है।
एक जनपद-एक व्यंजन योजना के अंतर्गत जिले में जलेबी अथवा पेड़ा में से किसी एक का चयन किया जाना है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही चयन करके रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
परमहंस मौर्या, उपायुक्त जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र रायबरेली
