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Raebareli News: आधुनिक खेती और खाद गोदामों को मिलेगी रफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 13 Feb 2026 01:14 AM IST
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हलोर क्षेत्र में गेहूं के खेत के पास बैठकर मोबाइल पर बजट को देखते किसान।
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रायबरेली। बजट में सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक खेती के लिए उन्नत संसाधन मुहैया कराने का एलान किया है। जिसका असर जिले की कृषि व्यवस्था पर देखने को मिलेगा। जिले में खाद की किल्लत दूर करने के लिए सहकारिता विभाग द्वारा गोदामों का निर्माण कराया जा रहा है। बजट में कृषि पर विशेष जोर दिए जाने से इन गोदामों के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही, अब सरकारी बीज भंडारों पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज भी आसानी से उपलब्ध होंगे।
हालांकि, बजट को लेकर किसानों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। किसानों का कहना है कि फसल नष्ट होने पर केवल बीमित किसानों को ही लाभ मिल पाता है, जबकि शेष किसान इससे वंचित रह जाते हैं। फसल क्षति पर मुआवजे के लिए अभी भी 33 प्रतिशत नुकसान का पुराना नियम लागू है, जिससे किसानों में निराशा है।
जिले के पांच लाख से अधिक किसानों की आजीविका पूरी तरह खेती पर टिकी है, जिनमें सबसे अधिक संख्या गेहूं उत्पादकों की है। मौसम की अनिश्चितता के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार फसल बीमा के नियमों में कुछ ढील दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राहत की बात यह है कि खाद गोदामों के निर्माण और उद्यान विभाग की हाईटेक नर्सरी से किसानों को उम्मीदें जगी हैं। दरियापुर और रघ्घुपुर में बन रही नई नर्सरी से जल्द ही पौधे मिलना शुरू हो जाएंगे। वर्तमान में शिवगढ़ स्थित नर्सरी से किसानों को प्रतिवर्ष दो लाख पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन सबके बीच, आवारा पशुओं द्वारा फसल बर्बादी पर उचित मुआवजा न मिलने से किसान काफी चिंतित हैं, जिसके कारण कई लोग खेती से किनारा करने को मजबूर हो रहे हैं।
क्या कहते किसान
बजट से यह उम्मीद थी कि लघु और सीमांत किसानों के लिए कुछ बेहतर होगा, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है। हालांकि, गन्ना किसानों के लिए किए गए एलान अच्छे हैं, परंतु जिले में गन्ने की खेती बहुत कम होने के कारण फसली किसानों को अब भी पुरानी व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। खाद की किल्लत दूर करने के लिए जिलों में खाद गोदामों के निर्माण का निर्णय एक सराहनीय और सकारात्मक कदम है।
- किसान धीरेंद्र कुमार त्रिपाठी
ग्राम पूरे सोना सतांव
उद्यान विभाग के माध्यम से हो रही खेती से किसानों को लाभ मिल रहा है। बजट में उद्यान विभाग से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं के लिए सात प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन का प्रावधान एक सराहनीय कदम है। हालांकि, रबी और धान की मुख्य फसलें उगाने वाले किसानों को इस बजट से कोई लाभ नहीं मिला है। किसानों की आय वास्तव में तभी बढ़ सकती है, जब फसल के नुकसान को कम करने के ठोस उपाय हों और प्रभावित किसानों को मुआवजा मिले।
किसान पप्पू सिंह
ग्राम मलिकमऊ चौबारा-सतांव
बजट से आशा थी कि लघु और सीमांत किसानों के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए जाएंगे, लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप, इन किसानों को अब भी वर्तमान और पुरानी व्यवस्थाओं पर ही निर्भर रहना होगा। दूसरी ओर, बजट में गन्ना किसानों के लिए कुछ सकारात्मक घोषणाएं की गई हैं, जो निश्चित रूप से उनके लिए राहत का विषय साबित हो सकती हैं।
किसान अतुल सिंह
ग्राम अलीपुर-हलोर
किसानों के सामने आज भी सबसे बड़ी चुनौती फसल बर्बाद होने पर उचित मुआवजा न मिल पाना है। आवारा पशुओं के कारण फसलों को होने वाले भारी नुकसान की भरपाई के लिए अब तक मुआवजे की कोई रूपरेखा तैयार नहीं हो सकी है। हालांकि, बजट में किसानों को उन्नत खाद और बीज उपलब्ध कराने का जो प्रावधान किया गया है, वह कृषि क्षेत्र की बेहतरी के लिए एक सराहनीय कदम है।
किसान शत्रोहन सोनी
ग्राम मझिगवां-हलोर
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हालांकि, बजट को लेकर किसानों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। किसानों का कहना है कि फसल नष्ट होने पर केवल बीमित किसानों को ही लाभ मिल पाता है, जबकि शेष किसान इससे वंचित रह जाते हैं। फसल क्षति पर मुआवजे के लिए अभी भी 33 प्रतिशत नुकसान का पुराना नियम लागू है, जिससे किसानों में निराशा है।
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जिले के पांच लाख से अधिक किसानों की आजीविका पूरी तरह खेती पर टिकी है, जिनमें सबसे अधिक संख्या गेहूं उत्पादकों की है। मौसम की अनिश्चितता के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार फसल बीमा के नियमों में कुछ ढील दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राहत की बात यह है कि खाद गोदामों के निर्माण और उद्यान विभाग की हाईटेक नर्सरी से किसानों को उम्मीदें जगी हैं। दरियापुर और रघ्घुपुर में बन रही नई नर्सरी से जल्द ही पौधे मिलना शुरू हो जाएंगे। वर्तमान में शिवगढ़ स्थित नर्सरी से किसानों को प्रतिवर्ष दो लाख पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन सबके बीच, आवारा पशुओं द्वारा फसल बर्बादी पर उचित मुआवजा न मिलने से किसान काफी चिंतित हैं, जिसके कारण कई लोग खेती से किनारा करने को मजबूर हो रहे हैं।
क्या कहते किसान
बजट से यह उम्मीद थी कि लघु और सीमांत किसानों के लिए कुछ बेहतर होगा, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है। हालांकि, गन्ना किसानों के लिए किए गए एलान अच्छे हैं, परंतु जिले में गन्ने की खेती बहुत कम होने के कारण फसली किसानों को अब भी पुरानी व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। खाद की किल्लत दूर करने के लिए जिलों में खाद गोदामों के निर्माण का निर्णय एक सराहनीय और सकारात्मक कदम है।
- किसान धीरेंद्र कुमार त्रिपाठी
ग्राम पूरे सोना सतांव
उद्यान विभाग के माध्यम से हो रही खेती से किसानों को लाभ मिल रहा है। बजट में उद्यान विभाग से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं के लिए सात प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन का प्रावधान एक सराहनीय कदम है। हालांकि, रबी और धान की मुख्य फसलें उगाने वाले किसानों को इस बजट से कोई लाभ नहीं मिला है। किसानों की आय वास्तव में तभी बढ़ सकती है, जब फसल के नुकसान को कम करने के ठोस उपाय हों और प्रभावित किसानों को मुआवजा मिले।
किसान पप्पू सिंह
ग्राम मलिकमऊ चौबारा-सतांव
बजट से आशा थी कि लघु और सीमांत किसानों के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए जाएंगे, लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप, इन किसानों को अब भी वर्तमान और पुरानी व्यवस्थाओं पर ही निर्भर रहना होगा। दूसरी ओर, बजट में गन्ना किसानों के लिए कुछ सकारात्मक घोषणाएं की गई हैं, जो निश्चित रूप से उनके लिए राहत का विषय साबित हो सकती हैं।
किसान अतुल सिंह
ग्राम अलीपुर-हलोर
किसानों के सामने आज भी सबसे बड़ी चुनौती फसल बर्बाद होने पर उचित मुआवजा न मिल पाना है। आवारा पशुओं के कारण फसलों को होने वाले भारी नुकसान की भरपाई के लिए अब तक मुआवजे की कोई रूपरेखा तैयार नहीं हो सकी है। हालांकि, बजट में किसानों को उन्नत खाद और बीज उपलब्ध कराने का जो प्रावधान किया गया है, वह कृषि क्षेत्र की बेहतरी के लिए एक सराहनीय कदम है।
किसान शत्रोहन सोनी
ग्राम मझिगवां-हलोर
