मुरादाबाद: बुद्धि विहार में सात घंटे गुल रही बिजली, 30 हजार लोग बेहाल, अफसरों ने नहीं उठाए फोन
मुरादाबाद के बुद्धि विहार में बिना पूर्व सूचना 33 केवी लाइन बंद होने से करीब 30 हजार लोग सात घंटे तक बिजली-पानी संकट से जूझते रहे। मेंटिनेंस के नाम पर किए गए शटडाउन से लोगों को भारी परेशानी हुई। विद्युत निगम की ओर से समय पर सही जानकारी भी नहीं दी गई। इससे लोगों में आक्रोश फैल गया।
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मुरादाबाद पॉश कॉलोनी बुद्धि विहार में बृहस्पतिवार को बिजली व्यवस्था धड़ाम हो गई। बिना किसी पूर्व सूचना के 33 केवी लाइन बंद कर दी गई, जिससे करीब 30 हजार की आबादी सात घंटे तक भीषण गर्मी में बेहाल रही। मेंटिनेंस के नाम पर किया गया यह शटडाउन लोगों के लिए मुसीबत बन गया।
सुबह से दोपहर तक बिजली गुल रहने के कारण घरों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया। मोटरें नहीं चल सकीं, टंकियां खाली हो गईं और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते रहे। इनवर्टर भी जवाब दे गए, जिससे हालात और बिगड़ गए।
मोबाइल और लैपटॉप तक चार्ज नहीं हो सके, जिससे कामकाजी लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। परेशान लोगों ने जब विद्युत निगम की हेल्प डेस्क पर फोन किया तो पहले बताया गया कि दोपहर तीन बजे तक शटडाउन रहेगा।
लेकिन साढ़े तीन बजे तक भी बिजली नहीं आई तो दोबारा संपर्क किया गया। इस बार जवाब मिला कि लाइट कब आएगी, यह हम नहीं बता सकते। इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। हद तो तब हो गई जब सहायक अभियंता का फोन भी बंद मिला।
जिम्मेदार अधिकारियों की यह लापरवाही लोगों के गुस्से का कारण बन गई। कॉलोनी के निवासियों ने आरोप लगाया कि बिना सूचना बिजली काटना और फिर सही जानकारी न देना जनता के साथ खिलवाड़ है। गर्मी में घंटों बिजली-पानी के बिना जूझते लोगों ने कहा कि निगम को सूचना देनी चाहिए।
सुबह से बिजली गायब रही और किसी ने पहले से सूचना तक नहीं दी। पानी की टंकी खाली हो गई, बच्चों को दिक्कत हुई। इतनी बड़ी कॉलोनी में ऐसी लापरवाही बेहद गलत है। - जयवीर सिंह
घर में छोटे बच्चे हैं, पानी और बिजली दोनों नहीं थे। गर्मी में हालात बेहद खराब हो गए। हेल्पलाइन पर सिर्फ बहाने मिले, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। - शुभम वर्मा
ऑनलाइन काम पूरी तरह ठप हो गया। मोबाइल और लैपटॉप बंद हो गए। सात घंटे तक बिजली न होना आर्थिक नुकसान है। निगम को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। - संतोष
बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बाधित हो गई। इनवर्टर भी जवाब दे गया। बार-बार फोन करने पर भी सही जानकारी नहीं मिली, जिससे और ज्यादा परेशानी हुई। - रजनीश त्यागी
मेंटिनेंस के नाम पर मनमानी हो रही है। न समय बताया जाता है, न सूचना दी जाती है। अधिकारी फोन तक नहीं उठाते, आम जनता आखिर जाए तो जाए कहां। - लक्ष्मी