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Saharanpur News: जिले के आठ वेटलैंड घोषित होंगे संरक्षित धरोहर
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विश्व पर्यावरण दिवस
- भारीदीनदारपुर, अंबेहटा शेखा, कैलाशपुर, हलालपुर, बिन्नाखेड़ी, बिड़वी व खेड़ा मुगल तालाब शामिल
- अवैध कब्जों, प्रदूषण व अंधाधुंध दोहन से बचाकर किया जाएगा सुरक्षित, वन विभाग ने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। तेजी से सिकुड़ते जलस्त्रोतों, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच शासन ने वेटलैंड संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिले के आठ वेटलैंड संरक्षित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य इन प्राकृतिक जलाशयों को अवैध कब्जों, प्रदूषण और अंधाधुंध दोहन से बचाकर आने वाली पीढि़यों के लिए सुरक्षित रखना है।
शुक्रवार यानी आज विश्व पर्यावरण दिवस है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में वेटलैंड संरक्षण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जल सुरक्षा, जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका से भी जुड़ा विषय बन चुका है। वेटलैंड ऐसे प्राकृतिक क्षेत्र होते हैं, जहां वर्षभर पानी मौजूद रहता है। यह भूजल रिचार्ज, बाढ़ नियंत्रण, जलवायु संतुलन और पक्षियों व जलीय जीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।
-- वन व वृक्ष में 4.12 फीसदी की वृद्धि
सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी शुभम सिंह ने बताया कि स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 2017 से 2023 के बीच भौगोलिक क्षेत्र में वन और वृक्ष आवरण में 4.12 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह अच्छे संकेत हैं कि जिले में वन क्षेत्र बढ़ रहा है।
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-- 40 लाख से अधिक पौधे किए जाएंगे रोपित
जिले में इस वर्ष हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए 40.72 लाख से अधिक पौधे रोपित किए जाएंगे। इसमें 9.60 लाख अकेले वन विभाग की ओर से लगाए जाएंगे। इमारती, फलदार, औषधीय, चारा एवं शोभाकारी प्रजातियों के पौधे लगेंगे। इनके अलावा 15 अगस्त को वंदे मातरम वाटिका, 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर भाई-बहन पौधारोपण एवं पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर एक पेड़ गुरु के नाम लगाया जाएगा।
-- ये वेटलैंड होंगे संरक्षित
- नानौता ब्लॉक में भारीदीनदारपुर
- नागल में अंबेहटा शेखा
- देवबंद में खेड़ा मुगल
- पुवांरका में कैलाशपुर, हलालपुर
- सरसावा में गदरहेड़ी, बिन्नाखेड़ी
- नकुड़ में बिड़वी
- भारीदीनदारपुर, अंबेहटा शेखा, कैलाशपुर, हलालपुर, बिन्नाखेड़ी, बिड़वी व खेड़ा मुगल तालाब शामिल
- अवैध कब्जों, प्रदूषण व अंधाधुंध दोहन से बचाकर किया जाएगा सुरक्षित, वन विभाग ने की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। तेजी से सिकुड़ते जलस्त्रोतों, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच शासन ने वेटलैंड संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिले के आठ वेटलैंड संरक्षित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य इन प्राकृतिक जलाशयों को अवैध कब्जों, प्रदूषण और अंधाधुंध दोहन से बचाकर आने वाली पीढि़यों के लिए सुरक्षित रखना है।
शुक्रवार यानी आज विश्व पर्यावरण दिवस है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में वेटलैंड संरक्षण केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जल सुरक्षा, जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका से भी जुड़ा विषय बन चुका है। वेटलैंड ऐसे प्राकृतिक क्षेत्र होते हैं, जहां वर्षभर पानी मौजूद रहता है। यह भूजल रिचार्ज, बाढ़ नियंत्रण, जलवायु संतुलन और पक्षियों व जलीय जीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।
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सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी शुभम सिंह ने बताया कि स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 2017 से 2023 के बीच भौगोलिक क्षेत्र में वन और वृक्ष आवरण में 4.12 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह अच्छे संकेत हैं कि जिले में वन क्षेत्र बढ़ रहा है।
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- नानौता ब्लॉक में भारीदीनदारपुर
- नागल में अंबेहटा शेखा
- देवबंद में खेड़ा मुगल
- पुवांरका में कैलाशपुर, हलालपुर
- सरसावा में गदरहेड़ी, बिन्नाखेड़ी
- नकुड़ में बिड़वी