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एशियन गेम्स 2026: सोना जीतकर प्राची बोलीं- सोचकर गए थे गोल्ड जीतना है, घर जाकर मां के हाथ के दाल-चावल खाऊंगी

Wed, 30 Sep 2026 04:22 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 30 Sep 2026 04:22 PM IST
सार

सहारनपुर की प्राची चौधरी ने एशियाई खेलों में महिला 4x400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीतकर मां से किया वादा पूरा किया। तीन साल पहले उन्होंने इसी स्पर्धा में रजत जीता था।

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Prachi Chaudhary Fulfils Promise to Her Mother, Wins Gold in 4x400m Relay at Asian Games
प्राची चौधरी एथलीट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहारनपुर के गांव झबीरण की बेटी प्राची चौधरी ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर तीन साल पहले मां से किया अपना वादा पूरा कर दिया। जापान में आयोजित एशियाई खेलों की महिला 4x400 मीटर रिले में प्राची भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। भारतीय टीम ने 3 मिनट 29.69 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता।

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चीन में रजत के बाद मां से किया था वादा
वर्ष 2023 में चीन के हांगझोऊ में हुए एशियाई खेलों में प्राची चौधरी ने 4x400 मीटर रिले में रजत पदक जीता था। टीम ने उस समय 3 मिनट 27.85 सेकंड का समय निकाला था। रजत पदक जीतने के बाद प्राची अपने प्रदर्शन से खुश थीं, लेकिन संतुष्ट नहीं थीं।
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घर लौटने पर उनकी मां राजेश ने उन्हें तैयारी पर और ध्यान देने की सीख दी। इसी दौरान प्राची ने मां से वादा किया था कि वह एक दिन एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जरूर जीतेंगी। जापान में स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपना यह वादा पूरा कर दिया। 

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शाम होते ही टीवी के सामने बैठ गया परिवार
प्राची के स्वर्ण पदक के लिए उनके गांव झबीरण में परिजन और ग्रामीण सुबह से ही उत्साहित थे। चाचा सचिन के अनुसार, शाम करीब पांच बजे परिवार के लोग टीवी के सामने बैठ गए थे। जैसे ही इवेंट शुरू हुआ, परिजनों ने प्राची और उनकी टीम की जीत के लिए प्रार्थना शुरू कर दी।

भारतीय टीम के फिनिश लाइन पार करते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। 

दस साल की उम्र में चुना था एथलीट बनने का सपना
प्राची ने महज दस वर्ष की उम्र में एथलीट बनने का सपना देखा था। चाचा सचिन के अनुसार, उन्होंने गांव की कच्ची सड़कों पर दौड़ना शुरू किया। जिला स्तर से शुरू हुआ उनका सफर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचा।

वर्ष 2018 में प्रदेशीय प्रतियोगिता में उन्होंने 200 और 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। 2019 में दोहा में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया। इसी वर्ष चेक गणराज्य की प्रतियोगिता में भी स्वर्ण और रजत पदक जीते।

पेरिस ओलंपिक में भी किया था प्रतिभाग
प्राची चौधरी पेरिस ओलंपिक में 4x400 मीटर रिले स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह सहारनपुर जिले की पहली महिला एथलीट ओलंपियन हैं। वर्तमान में वह जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी के पद पर तैनात हैं। जनवरी में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

ओडिशा की प्रतियोगिता से मिला था एशियन गेम्स का टिकट
एशियाई खेलों के लिए प्राची ने ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित कलिंगा स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित पांचवीं राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में 53.24 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया था।

एशियाई खेलों के लिए इस स्पर्धा का न्यूनतम मानक 53.72 सेकंड था। इसके बाद प्राची एशियाई खेलों की तैयारी में जुट गई थीं।

शरीर थकने तक करती थीं अभ्यास
चाचा सचिन के अनुसार, प्राची अपने लक्ष्य को लेकर हमेशा अनुशासित रही हैं। वह अभ्यास में कोई कमी नहीं छोड़ती थीं और शरीर के थककर जवाब देने तक ट्रैक पर अभ्यास करती थीं। रनिंग तकनीक को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षकों और अनुभवी खिलाड़ियों से लगातार सुझाव लेती थीं।

सिस्टम नहीं दे पाया गांव में ट्रैक
प्राची के पिता जयवीर सिंह का कहना है कि बेटी ने एशियाई खेलों में स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है, लेकिन गांव और आसपास के क्षेत्र में अभ्यास के लिए अब तक बेहतर ट्रैक की व्यवस्था नहीं हो सकी।

उनके अनुसार, प्राची साल में करीब 15 से 20 दिन गांव में रहती हैं और रोज अभ्यास करना पड़ता है। सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास के लिए उन्हें करीब 20 किलोमीटर दूर सहारनपुर के डॉ. आंबेडकर स्टेडियम जाना पड़ता है। ऐसे में वह गांव की कच्ची सड़कों पर ही अभ्यास करती हैं।

पिता की मांग है कि सरसावा में स्टेडियम तैयार कराया जाए, जिससे प्राची के साथ क्षेत्र के अन्य बालक-बालिका खिलाड़ियों को भी बेहतर अभ्यास की सुविधा मिल सके।

मां के हाथ के दाल-चावल याद आ रहे
प्राची को मां के हाथ के दाल-चावल पसंद हैं। चाचा सचिन के अनुसार, जापान में खिलाड़ियों को नॉनवेज भोजन परोसा जा रहा है, जबकि प्राची नॉनवेज नहीं खातीं। ऐसे में वह ड्राई फ्रूट्स, दूध और अन्य चीजों से काम चला रही हैं। वह फोन पर अपनी मां से घर के खाने और खासतौर पर दाल-चावल को याद करने की बात कह चुकी हैं।

प्राची बोलीं- सोचकर गए थे गोल्ड जीतना है
स्वर्ण पदक जीतने के बाद प्राची ने अपनी टीम के साथ वीडियो संदेश भी जारी किया। उन्होंने बताया कि इवेंट शुरू होने से पहले ही टीम ने तय कर लिया था कि इस बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने इस उपलब्धि को पूरी टीम की मेहनत का परिणाम बताया।

स्टेडियम में बांटी गई मिठाई
प्राची के स्वर्ण पदक जीतने के बाद सहारनपुर के स्टेडियम में भी खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने खुशी मनाई। क्रीड़ाधिकारी राहुल चोपड़ा के अनुसार, प्राची की दौड़ को लेकर एथलीट खिलाड़ियों में सुबह से उत्साह था। स्वर्ण जीतने के बाद खिलाड़ियों के बीच मिठाई बांटी गई और सभी ने खुशी मनाई।

सरकार की खेल नीतियों को सराहा
प्राची ने वीडियो संदेश में उत्तर प्रदेश सरकार का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में खेलों को लेकर सुविधाएं कम थीं, लेकिन अब खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने जूनियर खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं और सरकार की खेल नीतियों की भी सराहना की।

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