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Saharanpur News: सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम ने आरोपों को बताया निराधार
Wed, 19 Aug 2026 12:10 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 19 Aug 2026 12:10 AM IST
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सहारनपुर। सर्किट हाउस रोड पर कथित तौर पर अनुसूचित जाति के लोगों के मकान तोड़ने के मामले में प्रतिवादियों के द्वारा विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी न्यायालय सहारनपुर में अपना पक्ष प्रस्तुत किया गया है। एक ओर जहां सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार और एसडीएम सुबोध कुमार सहित विभिन्न छह अधिकारियों ने आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। वहीं, दूसरी ओर नगर आयुक्त ने भी आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को पूरी कार्रवाई से अलग किया है।
वादी पक्ष के अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि नरेश कुमार बनाम सुबोध कुमार आदि के मामले में एसडीएम सदर सुबोध कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार, अधिशासी अभियंता अपर खंड पूर्वी यमुना नहर प्रवीण जोशिया, हलका लेखपाल सचिन प्रजापति, तत्कालीन थाना कुतुबशेर प्रभारी एचएन सिंह, कोतवाली सदर प्रभारी कपिल देव ने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई है। कोर्ट में दाखिल किए गए पक्ष में कहा गया है कि नियम के अनुसार अतिक्रमणकारियों को पहले नोटिस दिए गए। अतिक्रमण खुद हटाने के लिए समय दिया गया। उसके बाद ही अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई, जो पूरी तरह सही है। यह भी कहा गया है कि कार्रवाई राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिवादी संख्या चार खुद अनुसूचित जाति से आते हैं। ऐसे में जातिसूचक शब्द कहने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता है। उन्होंने नरेश कुमार के प्रार्थना पत्र को निरस्त करने की मांग न्यायालय से की है।
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प्रशासन के अनुरोध पर निगम ने केवल मुनादी कराई
वादी के अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि हंसराज बनाम सुबोध कुमार आदि मामले में नगर आयुक्त शिपू गिरि द्वारा अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। नगर आयुक्त का कहना है कि हंसराज द्वारा दिया गया प्रार्थनापत्र पूरी तरह असत्य और निराधार है, जो निरस्त करने योग्य है। नगर निगम की ओर से यह भी कहा है कि सर्किट हाउस रोड के चौड़ीकरण का कार्य लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिससे उनका कोई ताल्लुक नहीं है। नगर निगम ने प्रशासन के अनुरोध पर केवल मुनादी कराई थी। अतिक्रमण हटाने में नगर निगम का कोई रोल नहीं रहा है। नगर निगम की ओर से हंसराज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। न ही जातिसूचक शब्द कहे गए हैं।
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वादी पक्ष के अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि नरेश कुमार बनाम सुबोध कुमार आदि के मामले में एसडीएम सदर सुबोध कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप कुमार, अधिशासी अभियंता अपर खंड पूर्वी यमुना नहर प्रवीण जोशिया, हलका लेखपाल सचिन प्रजापति, तत्कालीन थाना कुतुबशेर प्रभारी एचएन सिंह, कोतवाली सदर प्रभारी कपिल देव ने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई है। कोर्ट में दाखिल किए गए पक्ष में कहा गया है कि नियम के अनुसार अतिक्रमणकारियों को पहले नोटिस दिए गए। अतिक्रमण खुद हटाने के लिए समय दिया गया। उसके बाद ही अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई, जो पूरी तरह सही है। यह भी कहा गया है कि कार्रवाई राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई। उन्होंने जातिसूचक शब्द कहने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रतिवादी संख्या चार खुद अनुसूचित जाति से आते हैं। ऐसे में जातिसूचक शब्द कहने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता है। उन्होंने नरेश कुमार के प्रार्थना पत्र को निरस्त करने की मांग न्यायालय से की है।
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प्रशासन के अनुरोध पर निगम ने केवल मुनादी कराई
वादी के अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि हंसराज बनाम सुबोध कुमार आदि मामले में नगर आयुक्त शिपू गिरि द्वारा अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। नगर आयुक्त का कहना है कि हंसराज द्वारा दिया गया प्रार्थनापत्र पूरी तरह असत्य और निराधार है, जो निरस्त करने योग्य है। नगर निगम की ओर से यह भी कहा है कि सर्किट हाउस रोड के चौड़ीकरण का कार्य लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग द्वारा किया जा रहा है, जिससे उनका कोई ताल्लुक नहीं है। नगर निगम ने प्रशासन के अनुरोध पर केवल मुनादी कराई थी। अतिक्रमण हटाने में नगर निगम का कोई रोल नहीं रहा है। नगर निगम की ओर से हंसराज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। न ही जातिसूचक शब्द कहे गए हैं।
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