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Saharanpur News: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत में आया 10 से 15 प्रतिशत उछाल
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 27 May 2026 12:45 AM IST
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देवबंद। पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के बाद से पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार हो रही वृद्धि का असर देवबंद के उद्योग धंधों पर भी पड़ा है। उद्यमियों का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत में 10 से 15 प्रतिशत का उछाल आया है। दूसरे समुद्री रास्तों से आने वाला दूसरे कच्चा माल नहीं आ पा रहा है।
देवबंद के इंडस्ट्रियल इस्टेट में छोटे और बड़े करीब 80 लघु उद्योग हैं। इनमें मुख्यतः गंड़ासे, फावड़े, एल्यूमीनियम बर्तन, तिरपाल, आइसक्रीम, हैंडलूम, सल्फर, चावल, लोहे व लकड़ी के दरवाजे, पानी के डंपर, हैंडपंप पार्ट्स, लकड़ी की चम्मच आदि उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों में सबसे अधिक संख्या गंडासा व फावड़ों की है। इनके लिए रॉ मैटीरियल (कच्चा माल) देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी मंगाया जाता है। व्यापारियों का कहना है कि समुद्री रास्ते बंद होने के कारण कच्चा माल नहीं आ रहा है जिस कारण उद्यमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ रहे दामों ने परेशानी को और ज्यादा बढ़ा दिया है, क्योंकि तैयार माल भेजने में भी 10 से 15 प्रतिशत अधिक चुकाना पड़ रहा है। यदि यही हाल रहा तो उद्योग धंधे बंद होना शुरू हो जाएंगे।
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- आईआईए के चैप्टर चेयरमैन विजेश कंसल का कहना है कि अमेरिका, इजराइल व ईरान के बीच युद्ध के चलते समुद्री रास्ता बंद होने से कच्चा माल नहीं आ रहा है। दूसरे तेल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ी है, जिससे काम धंधे चौपट होने लगे हैं।
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- उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष दीपकराज सिंघल का कहना है कि महंगाई बढ़ने से व्यापारी ही नहीं आमजन भी त्रस्त है। सरकार यदि उद्योग धंधों को यदि संजीवनी देना चाहती है तो महंगाई पर नियंत्रण करना जरूरी है। बातचीत के जरिए बंद समुद्री रास्तों को खोला जाना चाहिए।
- उद्यमी पंकज गुप्ता ने बताया कि व्यापारी तो पहले ही जीएसटी की विसंगतियों समेत अन्य समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में बढ़ती महंगाई जैसे तैसे करके चले जा रहे उद्योग धंधों की कमर तोड़ने का काम कर रही है।
देवबंद के इंडस्ट्रियल इस्टेट में छोटे और बड़े करीब 80 लघु उद्योग हैं। इनमें मुख्यतः गंड़ासे, फावड़े, एल्यूमीनियम बर्तन, तिरपाल, आइसक्रीम, हैंडलूम, सल्फर, चावल, लोहे व लकड़ी के दरवाजे, पानी के डंपर, हैंडपंप पार्ट्स, लकड़ी की चम्मच आदि उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों में सबसे अधिक संख्या गंडासा व फावड़ों की है। इनके लिए रॉ मैटीरियल (कच्चा माल) देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी मंगाया जाता है। व्यापारियों का कहना है कि समुद्री रास्ते बंद होने के कारण कच्चा माल नहीं आ रहा है जिस कारण उद्यमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ रहे दामों ने परेशानी को और ज्यादा बढ़ा दिया है, क्योंकि तैयार माल भेजने में भी 10 से 15 प्रतिशत अधिक चुकाना पड़ रहा है। यदि यही हाल रहा तो उद्योग धंधे बंद होना शुरू हो जाएंगे।
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- आईआईए के चैप्टर चेयरमैन विजेश कंसल का कहना है कि अमेरिका, इजराइल व ईरान के बीच युद्ध के चलते समुद्री रास्ता बंद होने से कच्चा माल नहीं आ रहा है। दूसरे तेल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ी है, जिससे काम धंधे चौपट होने लगे हैं।
- उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष दीपकराज सिंघल का कहना है कि महंगाई बढ़ने से व्यापारी ही नहीं आमजन भी त्रस्त है। सरकार यदि उद्योग धंधों को यदि संजीवनी देना चाहती है तो महंगाई पर नियंत्रण करना जरूरी है। बातचीत के जरिए बंद समुद्री रास्तों को खोला जाना चाहिए।
- उद्यमी पंकज गुप्ता ने बताया कि व्यापारी तो पहले ही जीएसटी की विसंगतियों समेत अन्य समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में बढ़ती महंगाई जैसे तैसे करके चले जा रहे उद्योग धंधों की कमर तोड़ने का काम कर रही है।