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Saharanpur News: बागपत के सिपाही राहुल ढाका हत्याकांड में दो दोषियों को आजीवन कारावास
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अदालत की खबर का फोटो- सादर
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अदालत से,
- दोनों दोषी मुकीम काला गैंग के सक्रिय सदस्य, फिलहाल राजस्थान की जेल में हैं बंद
- 2013 में मुठभेड़ के दौरान सीओ के गनर राहुल ढाका की गोली मारकर की गई थी हत्या
- बागपत के ढिकौली गांव के रहने वाले हैं राहुल ढाका, वीसी से हुई दोनों दोषियों की पेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-10 संजय कुमार की अदालत ने सीओ के गनर बागपत के ढिकौली निवासी राहुल ढाका की हत्या समेत अन्य संगीन धाराओं में महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर खां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों दोषी मुकीम काला गैंग के सक्रिय सदस्य थे और फिलहाल राजस्थान की जयपुर और अजमेर जेल में बंद हैं। फैसला सुनाते समय वीसी के माध्यम से दोनों की पेशी कराई गई थी। अदालत ने दोनों पर 75-75 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
- यह है मामला
तत्कालीन सीओ सदर बाजार उमेश कुमार यादव ने तहरीर दी थी। बताया कि पांच जून 2013 की सुबह करीब साढ़े नौ बजे वायरलेस से सूचना मिली कि चिलकाना क्षेत्र में हरियाणा बॉर्डर की ओर से कुछ बदमाशों ने पेट्रोल पंप पर लूट की घटना को अंजाम दिया है। बदमाश सफेद रंग की डीएल 8एक्स-9689 नंबर की कार से भागे हैं।
सूचना के बाद गनर कांस्टेबल रामकुमार व गनर कांस्टेबल राहुल ढाका व चालक ऋषिपाल के साथ चिलकाना के लिए निकले। चौकी नाला पट्टी थाना कुतुबशेर पहुंचे तो बदमाशों की कार आती दिखाई दी। पीछा करने पर बदमाशों ने गाड़ी गलीरा रोड पुलिया की तरफ मोड़ दी। तभी उनकी गाड़ी के सामने ट्रैक्टर-ट्रॉली आ गए। गनर राहुल ढाका ने गाड़ी से उतरकर बदमाशों को पकड़ना चाहा, तभी बदमाशों ने राहुल ढाका को गोली मार दी। राहुल ढाका के नीचे गिरते ही बदमाश भीड़ का फायदा उठाकर उनकी कारबाइन, एक मैगजीन और 22 कारतूस लेकर भाग गए थे। आमजन की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस फायरिंग नहीं कर सकी।
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राहुल को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टर ने राहुल को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हत्याकांड के एक वर्ष के बाद मुकीम को गिरफ्तार किया था। साथ ही अन्य सदस्य भी दबोचे। पुलिस ने विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया।
- अभियोजन पक्ष ने पेश किए 17 गवाह, 13 वर्ष चला मामला
यह मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-10 संजय कुमार की अदालत में विचाराधीन था। दोषी महताब उर्फ काना उर्फ जीवा शामली के बलवा गांव और सादर खां सहारनपुर के तीतरों का रहने वाला है। फिलहाल महताब अन्य मामले में राजस्थान की जयपुर जेल और सादर खां अजमेर जेल में बंद है। फैसले के दौरान दोनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए। एडीजीसी शिव सिंह ने बताया कि घटना को पुष्ट करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए 17 गवाहों ने अदालत में गवाही दी।
मुकदमे में 27 नवंबर 2013 को आरोप पत्र पर संज्ञान लिया गया था। सुनवाई के दौरान अन्य साक्ष्य भी अदालत में पेश किए गए। अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद दोषियों को सजा सुनाई है। अर्थदंड का आधा हिस्सा राहुल ढाका के परिवार को दिया जाएगा।
- भीड़ का फायदा उठाकर भाग गए थे बदमाश
राहुल ढाका को गोली मारने के बाद वहां भगदड़ मच गई थी। इसी दौरान बदमाश अपनी कार से उतरे और वहां से गुजर रहे प्रमोद कुमार निवासी मोहम्मदपुर माफी और अरुण निवासी नवीन नगर की बाइक छीन ली थी। चारों बदमाश उन दो बाइकों पर बैठकर फरार हुए थे। इस मामले में भी दोनों पीड़ितों की तरफ से केस दर्ज कराया गया था।
- मुकीम की 2021 में हो चुकी है मौत
मुकीम काला पर सहारनपुर के अलग-अलग थानों में 29 से अधिक मामले दर्ज थे। मुकीम ने फरवरी 2015 में महानगर की व्यस्त सड़क दिल्ली रोड स्थित तनिष्क ज्वेलर्स पर भी पुलिस की वर्दी में डकैती डाली थी। मुकीम की मौत 2021 में चित्रकूट जेल में हुई आपसी गैंगवार में हो गई थी। उसके अन्य साथी या तो जेल में हैं या फिर ढेर हो चुके हैं। राहुल ढाका की हत्या का आरोपी और गैंग का शार्प शूटर साबिर जंधेड़ी जनवरी 2018 में शामली के जंधेड़ी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
हत्या और लूट के दो मुकदमों में हुई सजा
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुकीम काला गैंग के सदस्य महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर को आईपीसी की धारा 302, 307, 7 क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट और लूट के दो अन्य मुकदमों में सजा सुनाई है। लूट के मामले में आठ वर्ष की सजा हुई है। दोनों दोषियों को हुई सजा के अधिपत्र जयपुर और अजमेर जेल भेजे गए हैं।
-- सुनवाई के दौरान गैंग के आतंक का भी जिक्र
यह मामला पूरे 13 साल तक चला। वर्ष 2018 में आरोप तय किए गए थे, जबकि वर्ष 2021 से गवाहों के बयान शुरू हुए थे। अदालत में सुनवाई के दौरान मुकीम काला गैंग का भी जिक्र किया। राहुल ढाका की हत्या के बाद मुकीम काला गैंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में लगातार बड़ी आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा। गैंग के संबंध कुख्यात अनिल दुजाना गिरोह से भी जुड़े थे, जो 2023 में मेरठ जिले में मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ ने मार गिराया था।
- न्याय व्यवस्था पर था विश्वास : अनिल ढाका
सिपाही राहुल ढाका के तहेरे भाई अनिल ढाका दिल्ली पुलिस में एसआई के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि राहुल 2011 में पास आउट हुए थे। 2013 में यह वारदात हो गई थी। उनके पिता चंद्रपाल ढाका का 10 मार्च 2019 में निधन हो गया था। परिवार में मां, दो भाई और एक बहन को लंबे समय से न्याय का इंतजार था। अनिल ढाका ने बताया कि यह पुलिस से जुड़ा मामला था। ऐसे में निजी अधिवक्ता नहीं किया था। सरकारी अधिवक्ता ही पैरवी कर रहे थे। शाम के समय मीडियाकर्मियों के फोन आने पर पता चला कि अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सुनकर आंखें नम हो गईं। पूरे परिवार को न्याय व्यवस्था पर विश्वास था। न्याय की जीत हुई है।
- कार में बैठकर छिप गए थे सीओ और अन्य पुलिसकर्मी
सिपाही राहुल ढाका की हत्या के बाद सीओ सदर उमेश यादव और वहां पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों पर भी सवाल खड़े हो गए थे। लोगों ने आरोप लगाया था कि बदमाशों की गाड़ी रुकते ही सीओ अलर्ट होने की बजाय लापरवाह रवैया अपनाए रहे। बदमाशों की घेराबंदी करने की बजाय गनर राहुल ढाका को बिना कवर किए कार के पास भेज दिया गया। यहां तक कि फायरिंग होते देख कार में बैठकर छिप गए थे। आसपास के लोगों ने उस समय यह भी बताया था कि बदमाशों के पास रुपयों से भरी पोटली थी। भागते समय उससे रुपये भी गिर रहे थे।
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- दोनों दोषी मुकीम काला गैंग के सक्रिय सदस्य, फिलहाल राजस्थान की जेल में हैं बंद
- 2013 में मुठभेड़ के दौरान सीओ के गनर राहुल ढाका की गोली मारकर की गई थी हत्या
- बागपत के ढिकौली गांव के रहने वाले हैं राहुल ढाका, वीसी से हुई दोनों दोषियों की पेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-10 संजय कुमार की अदालत ने सीओ के गनर बागपत के ढिकौली निवासी राहुल ढाका की हत्या समेत अन्य संगीन धाराओं में महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर खां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों दोषी मुकीम काला गैंग के सक्रिय सदस्य थे और फिलहाल राजस्थान की जयपुर और अजमेर जेल में बंद हैं। फैसला सुनाते समय वीसी के माध्यम से दोनों की पेशी कराई गई थी। अदालत ने दोनों पर 75-75 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
- यह है मामला
तत्कालीन सीओ सदर बाजार उमेश कुमार यादव ने तहरीर दी थी। बताया कि पांच जून 2013 की सुबह करीब साढ़े नौ बजे वायरलेस से सूचना मिली कि चिलकाना क्षेत्र में हरियाणा बॉर्डर की ओर से कुछ बदमाशों ने पेट्रोल पंप पर लूट की घटना को अंजाम दिया है। बदमाश सफेद रंग की डीएल 8एक्स-9689 नंबर की कार से भागे हैं।
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राहुल को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टर ने राहुल को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हत्याकांड के एक वर्ष के बाद मुकीम को गिरफ्तार किया था। साथ ही अन्य सदस्य भी दबोचे। पुलिस ने विवेचना के बाद मामले को अदालत में दाखिल किया।
- अभियोजन पक्ष ने पेश किए 17 गवाह, 13 वर्ष चला मामला
यह मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-10 संजय कुमार की अदालत में विचाराधीन था। दोषी महताब उर्फ काना उर्फ जीवा शामली के बलवा गांव और सादर खां सहारनपुर के तीतरों का रहने वाला है। फिलहाल महताब अन्य मामले में राजस्थान की जयपुर जेल और सादर खां अजमेर जेल में बंद है। फैसले के दौरान दोनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए। एडीजीसी शिव सिंह ने बताया कि घटना को पुष्ट करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए 17 गवाहों ने अदालत में गवाही दी।
मुकदमे में 27 नवंबर 2013 को आरोप पत्र पर संज्ञान लिया गया था। सुनवाई के दौरान अन्य साक्ष्य भी अदालत में पेश किए गए। अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद दोषियों को सजा सुनाई है। अर्थदंड का आधा हिस्सा राहुल ढाका के परिवार को दिया जाएगा।
- भीड़ का फायदा उठाकर भाग गए थे बदमाश
राहुल ढाका को गोली मारने के बाद वहां भगदड़ मच गई थी। इसी दौरान बदमाश अपनी कार से उतरे और वहां से गुजर रहे प्रमोद कुमार निवासी मोहम्मदपुर माफी और अरुण निवासी नवीन नगर की बाइक छीन ली थी। चारों बदमाश उन दो बाइकों पर बैठकर फरार हुए थे। इस मामले में भी दोनों पीड़ितों की तरफ से केस दर्ज कराया गया था।
- मुकीम की 2021 में हो चुकी है मौत
मुकीम काला पर सहारनपुर के अलग-अलग थानों में 29 से अधिक मामले दर्ज थे। मुकीम ने फरवरी 2015 में महानगर की व्यस्त सड़क दिल्ली रोड स्थित तनिष्क ज्वेलर्स पर भी पुलिस की वर्दी में डकैती डाली थी। मुकीम की मौत 2021 में चित्रकूट जेल में हुई आपसी गैंगवार में हो गई थी। उसके अन्य साथी या तो जेल में हैं या फिर ढेर हो चुके हैं। राहुल ढाका की हत्या का आरोपी और गैंग का शार्प शूटर साबिर जंधेड़ी जनवरी 2018 में शामली के जंधेड़ी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
हत्या और लूट के दो मुकदमों में हुई सजा
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुकीम काला गैंग के सदस्य महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर को आईपीसी की धारा 302, 307, 7 क्रिमिनल अमेंडमेंट एक्ट और लूट के दो अन्य मुकदमों में सजा सुनाई है। लूट के मामले में आठ वर्ष की सजा हुई है। दोनों दोषियों को हुई सजा के अधिपत्र जयपुर और अजमेर जेल भेजे गए हैं।
यह मामला पूरे 13 साल तक चला। वर्ष 2018 में आरोप तय किए गए थे, जबकि वर्ष 2021 से गवाहों के बयान शुरू हुए थे। अदालत में सुनवाई के दौरान मुकीम काला गैंग का भी जिक्र किया। राहुल ढाका की हत्या के बाद मुकीम काला गैंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में लगातार बड़ी आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा। गैंग के संबंध कुख्यात अनिल दुजाना गिरोह से भी जुड़े थे, जो 2023 में मेरठ जिले में मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ ने मार गिराया था।
- न्याय व्यवस्था पर था विश्वास : अनिल ढाका
सिपाही राहुल ढाका के तहेरे भाई अनिल ढाका दिल्ली पुलिस में एसआई के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि राहुल 2011 में पास आउट हुए थे। 2013 में यह वारदात हो गई थी। उनके पिता चंद्रपाल ढाका का 10 मार्च 2019 में निधन हो गया था। परिवार में मां, दो भाई और एक बहन को लंबे समय से न्याय का इंतजार था। अनिल ढाका ने बताया कि यह पुलिस से जुड़ा मामला था। ऐसे में निजी अधिवक्ता नहीं किया था। सरकारी अधिवक्ता ही पैरवी कर रहे थे। शाम के समय मीडियाकर्मियों के फोन आने पर पता चला कि अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सुनकर आंखें नम हो गईं। पूरे परिवार को न्याय व्यवस्था पर विश्वास था। न्याय की जीत हुई है।
- कार में बैठकर छिप गए थे सीओ और अन्य पुलिसकर्मी
सिपाही राहुल ढाका की हत्या के बाद सीओ सदर उमेश यादव और वहां पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों पर भी सवाल खड़े हो गए थे। लोगों ने आरोप लगाया था कि बदमाशों की गाड़ी रुकते ही सीओ अलर्ट होने की बजाय लापरवाह रवैया अपनाए रहे। बदमाशों की घेराबंदी करने की बजाय गनर राहुल ढाका को बिना कवर किए कार के पास भेज दिया गया। यहां तक कि फायरिंग होते देख कार में बैठकर छिप गए थे। आसपास के लोगों ने उस समय यह भी बताया था कि बदमाशों के पास रुपयों से भरी पोटली थी। भागते समय उससे रुपये भी गिर रहे थे।

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