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Saharanpur News: दो अधिकारियों को क्लीन चिट, मंडलायुक्त ने जताई आपत्ति, दोबारा मांगी रिपोर्ट
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सहारनपुर संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय
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- एआरटीओ प्रशासन और आरआई पर शिकायतकर्ता ने लगाए थे गंभीर आरोप
- शासन के आदेश पर मंडलायुक्त ने कराई जांच, कमेटी ने सभी आरोपों पर दी क्लीन चिट
- शिकायतकर्ता को सुना ही नहीं, न जुटाए सबूत, मंडलायुक्त ने दोबारा मांगी रिपोर्ट
विनीत तोमर
सहारनपुर। आरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के आरोपों की जांच में एआरटीओ प्रशासन और आरआई को दी गई क्लीन चिट पर मंडलायुक्त ने सवाल उठा दिए हैं। पाया कि जांच रिपोर्ट तैयार करते समय शिकायतकर्ता का पक्ष ही नहीं लिया गया। रिपोर्ट में खामी बताते हुए उसे वापस कर दिया गया है और शिकायतकर्ता की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दोबारा जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच कमेटी ने उनसे भी कोई संपर्क नहीं किया।
ऐसे समझें मामला
नगला बाबैल खुर्द गांव निवासी मोहम्मद रागिब ने मई में शासन को शिकायत भेजी थी। आरोप था कि एआरटीओ प्रशासन मानवेंद्र प्रताप सिंह की देखरेख में कार्यालय में प्राइवेट एजेंट छोड़ रखे हैं, जो कामकाज कराने के नाम पर वसूली करते हैं। फाइलों पर एजेंटों के अलग-अलग कोड वर्ड लिखे जाते हैं, जिसके आधार पर रुपयों की बंदरबांट होती है। व्यावसायिक ट्रैक्टरों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कृषि में दर्शाया जाता है।
आरआई रोहित कुमार सिंह ने गलत तरीके से लाइसेंस बनाया है, जिसकी जांच की जाए। शासन से शिकायत मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार के पास पहुंची। मंडलायुक्त ने सीडीओ को जांच के आदेश दिए। सीडीओ ने दो सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और जिला विकास अधिकारी को शामिल किया गया। हाल ही में कमेटी की जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त कार्यालय भेजी गई।
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- रिपोर्ट में इस तरह दी गई क्लीन चिट
रिपोर्ट में कमेटी ने बताया कि वाहनों के पंजीकरण नियमानुसार किए गए हैं। कार्यालय परिसर में भ्रमण किया गया और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी ली गई। कोई एजेंट नहीं मिला और किसी ने भी अवैध वसूली की शिकायत नहीं की। लाइसेंस नियमानुसार जारी किया गया है। पंजीकृत ट्रैक्टर की पत्रावलियों का निरीक्षण किया गया। सभी नियमानुसार मिले। विभिन्न सेवाओं के शुल्क ऑनलाइन माध्यम से जमा होते हैं। जांच में आरोपों पुष्टि नहीं हो सकी।
- कमेटी ने मुझे बुलाया ही नहीं, मेरे पास सबूत है : शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता रागिब का कहना है कि शासन में शिकायत भेजने के बाद लखनऊ से फोन आया था कि आपके पास जांच अधिकारी की कॉल आएगी। जांच कमेटी ने कभी मुझसे संपर्क ही नहीं किया और न इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी ली। मेरे पास सबूत है। फिर किस आधार पर क्लीन चिट दी गई। उच्च अधिकारियों से दोबारा शिकायत की जाएगी।
वर्जन
जांच रिपोर्ट में खामी है। यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि शिकायतकर्ता को सुना गया है। ऐसे में निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता की सुनवाई कर उनका पक्ष जाना जाए और साक्ष्य लिए जाएं। तब दोबारा रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाए। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त
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जांच टीम आई थी। टीम ने शिकायतों से संबंधित सभी पत्रावलियों की जांच की, जिसमें कोई खामी नहीं पाई गई। शिकायतकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं वे निराधार हैं। - मानवेंद्र प्रताप सिंह, एआरटीओ प्रशासन
-- आरोप पूरी तरह से निराधार है। टीम ने लाइसेंस से संबंधित फाइलों की जांच की, जिसमें कुछ भी गलत नहीं मिला। -रोहित कुमार सिंह, आरआई
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- शासन के आदेश पर मंडलायुक्त ने कराई जांच, कमेटी ने सभी आरोपों पर दी क्लीन चिट
- शिकायतकर्ता को सुना ही नहीं, न जुटाए सबूत, मंडलायुक्त ने दोबारा मांगी रिपोर्ट
विनीत तोमर
सहारनपुर। आरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के आरोपों की जांच में एआरटीओ प्रशासन और आरआई को दी गई क्लीन चिट पर मंडलायुक्त ने सवाल उठा दिए हैं। पाया कि जांच रिपोर्ट तैयार करते समय शिकायतकर्ता का पक्ष ही नहीं लिया गया। रिपोर्ट में खामी बताते हुए उसे वापस कर दिया गया है और शिकायतकर्ता की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दोबारा जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच कमेटी ने उनसे भी कोई संपर्क नहीं किया।
ऐसे समझें मामला
नगला बाबैल खुर्द गांव निवासी मोहम्मद रागिब ने मई में शासन को शिकायत भेजी थी। आरोप था कि एआरटीओ प्रशासन मानवेंद्र प्रताप सिंह की देखरेख में कार्यालय में प्राइवेट एजेंट छोड़ रखे हैं, जो कामकाज कराने के नाम पर वसूली करते हैं। फाइलों पर एजेंटों के अलग-अलग कोड वर्ड लिखे जाते हैं, जिसके आधार पर रुपयों की बंदरबांट होती है। व्यावसायिक ट्रैक्टरों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कृषि में दर्शाया जाता है।
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आरआई रोहित कुमार सिंह ने गलत तरीके से लाइसेंस बनाया है, जिसकी जांच की जाए। शासन से शिकायत मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार के पास पहुंची। मंडलायुक्त ने सीडीओ को जांच के आदेश दिए। सीडीओ ने दो सदस्यीय कमेटी गठित की। इसमें जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और जिला विकास अधिकारी को शामिल किया गया। हाल ही में कमेटी की जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त कार्यालय भेजी गई।
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- रिपोर्ट में इस तरह दी गई क्लीन चिट
रिपोर्ट में कमेटी ने बताया कि वाहनों के पंजीकरण नियमानुसार किए गए हैं। कार्यालय परिसर में भ्रमण किया गया और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी ली गई। कोई एजेंट नहीं मिला और किसी ने भी अवैध वसूली की शिकायत नहीं की। लाइसेंस नियमानुसार जारी किया गया है। पंजीकृत ट्रैक्टर की पत्रावलियों का निरीक्षण किया गया। सभी नियमानुसार मिले। विभिन्न सेवाओं के शुल्क ऑनलाइन माध्यम से जमा होते हैं। जांच में आरोपों पुष्टि नहीं हो सकी।
- कमेटी ने मुझे बुलाया ही नहीं, मेरे पास सबूत है : शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता रागिब का कहना है कि शासन में शिकायत भेजने के बाद लखनऊ से फोन आया था कि आपके पास जांच अधिकारी की कॉल आएगी। जांच कमेटी ने कभी मुझसे संपर्क ही नहीं किया और न इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी ली। मेरे पास सबूत है। फिर किस आधार पर क्लीन चिट दी गई। उच्च अधिकारियों से दोबारा शिकायत की जाएगी।
वर्जन
जांच रिपोर्ट में खामी है। यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि शिकायतकर्ता को सुना गया है। ऐसे में निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता की सुनवाई कर उनका पक्ष जाना जाए और साक्ष्य लिए जाएं। तब दोबारा रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाए। - डॉ. रूपेश कुमार, मंडलायुक्त
जांच टीम आई थी। टीम ने शिकायतों से संबंधित सभी पत्रावलियों की जांच की, जिसमें कोई खामी नहीं पाई गई। शिकायतकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं वे निराधार हैं। - मानवेंद्र प्रताप सिंह, एआरटीओ प्रशासन