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UP: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का 120 किमी का हिस्सा बंद, जान लें कहां से कहां तक है ये, दोबारा कब खुलेगा
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Sun, 01 Feb 2026 04:07 PM IST
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सार
Saharanpur News: 120 किमी के इस हिस्से में अंतिम चरण का काम बाकी है, इसके बावजूद यात्री गूगल मैप का सहारा लेकर इस पर यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में अधूरे एक्सप्रेस वे पर यात्रा करने पर खतरा है। इसीलिए इसे फिलहाल बंद किया गया है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे
- फोटो : जी पाल
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विस्तार
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के दूसरे चरण, जो बागपत के ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से सहारनपुर बाईपास के लाखनौर तक 120 किलोमीटर लंबा है, को फिलहाल वाहनों के आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस कदम को निर्माण कार्य के अंतिम चरण, जिसमें पेंटिंग और फिनिशिंग का काम शामिल है, के दौरान दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया है।
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एक्सप्रेसवे निर्माण की वर्तमान स्थिति
210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण चार अलग-अलग खंडों में किया जा रहा है।
पहला खंड: दिल्ली के अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जंक्शन, बागपत तक 32 किलोमीटर लंबा है, जिसे पहले ही यातायात के लिए खोल दिया गया है।
दूसरा खंड: बागपत से सहारनपुर बाईपास के लाखनौर तक 120 किलोमीटर लंबा है। इस खंड का 33 किलोमीटर हिस्सा सहारनपुर जिले में जडौदा पांडा से लाखनौर तक फैला हुआ है। इसी खंड पर वर्तमान में पेंटिंग और फिनिशिंग का कार्य चल रहा है।
तीसरा खंड: लाखनौर से गणेशपुर तक 40 किलोमीटर लंबा है।
चौथा खंड: गणेशपुर से देहरादून के आसारोडी तक 18 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 12 किलोमीटर एलिवेटेड रोड भी शामिल है।
तीसरे और चौथे खंड पर वाहनों का आवागमन सुचारू रूप से जारी है।
210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण चार अलग-अलग खंडों में किया जा रहा है।
पहला खंड: दिल्ली के अक्षरधाम से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जंक्शन, बागपत तक 32 किलोमीटर लंबा है, जिसे पहले ही यातायात के लिए खोल दिया गया है।
दूसरा खंड: बागपत से सहारनपुर बाईपास के लाखनौर तक 120 किलोमीटर लंबा है। इस खंड का 33 किलोमीटर हिस्सा सहारनपुर जिले में जडौदा पांडा से लाखनौर तक फैला हुआ है। इसी खंड पर वर्तमान में पेंटिंग और फिनिशिंग का कार्य चल रहा है।
तीसरा खंड: लाखनौर से गणेशपुर तक 40 किलोमीटर लंबा है।
चौथा खंड: गणेशपुर से देहरादून के आसारोडी तक 18 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 12 किलोमीटर एलिवेटेड रोड भी शामिल है।
तीसरे और चौथे खंड पर वाहनों का आवागमन सुचारू रूप से जारी है।
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सुरक्षा कारणों से लिया गया निर्णय
गणतंत्र दिवस की छुट्टियों के दौरान, कुछ वाहन चालकों ने गूगल मैप्स का सहारा लेकर इस अधूरे दूसरे खंड पर यात्रा करने का प्रयास किया, जिससे इस हिस्से पर सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई। एनएचएआई ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, इस 120 किलोमीटर लंबे खंड पर बैरिकेड्स लगाकर आवागमन पूर्णतः बंद कर दिया है।
गणतंत्र दिवस की छुट्टियों के दौरान, कुछ वाहन चालकों ने गूगल मैप्स का सहारा लेकर इस अधूरे दूसरे खंड पर यात्रा करने का प्रयास किया, जिससे इस हिस्से पर सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई। एनएचएआई ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, इस 120 किलोमीटर लंबे खंड पर बैरिकेड्स लगाकर आवागमन पूर्णतः बंद कर दिया है।
एनएचएआई द्वारा जारी एक गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि कुछ वाहन चालक बैरियर्स के बावजूद इस अधूरे बागपत-सहारनपुर खंड का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिदिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यह खंड वर्तमान में पूर्णतः असुरक्षित है, जहां भारी मशीनरी का संचालन, साइनेज की कमी और उच्च जोखिम वाले क्षेत्र मौजूद हैं।
कब खुलेगा मार्ग?
एनएचएआई के साइट इंजीनियर, सोनू सिंह ने बताया कि इस खंड का निर्माण कार्य फरवरी के दूसरे सप्ताह तक पूरा होने की संभावना है। मंत्रालय से उद्घाटन की हरी झंडी मिलने के बाद इसे वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। तब तक, वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे कार्य पूरा होने तक इस मार्ग का इस्तेमाल न करें।
यह महत्वपूर्ण कदम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निर्माण कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए उठाया गया है, ताकि भविष्य में इस एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित हो सके।
एनएचएआई के साइट इंजीनियर, सोनू सिंह ने बताया कि इस खंड का निर्माण कार्य फरवरी के दूसरे सप्ताह तक पूरा होने की संभावना है। मंत्रालय से उद्घाटन की हरी झंडी मिलने के बाद इसे वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। तब तक, वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे कार्य पूरा होने तक इस मार्ग का इस्तेमाल न करें।
यह महत्वपूर्ण कदम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निर्माण कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए उठाया गया है, ताकि भविष्य में इस एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित हो सके।
