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Saharanpur News: पीड़ितों ने सौंपे दस्तावेज, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को ठहराया गलत
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 19 May 2026 01:34 AM IST
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सहारनपुर। सर्किट हाउस रोड पर सड़क चौड़ीकरण के लिए तोड़े गए मकानों के संबंध में पीड़ितों ने सिटी मजिस्ट्रेट को दस्तावेज सौंपे। उन्होंने कहा कि पटरी की कुल चौड़ाई 55 फीट है। सिंचाई विभाग अपनी 20 फीट जगह छोड़कर उन्हें उनकी जमीन पुरानी स्थिति में लौटा दे। यदि किसी अन्य विभाग की जमीन है तो वह भी दस्तावेज दिखाए।
जिलाधिकारी ने मामले के समाधान के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। पीड़ितों ने इस समिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों पर आरोप है उन्हें जांच करने की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है। सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले में दस्तावेज जमा करने और अपना पक्ष रखने के लिए पीड़ितों को 18 मई को बुलाया था। सोमवार को पीड़ित लोग अधिवक्ता राजकुमार के नेतृत्व में सिटी मजिस्ट्रेट से मिले। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य नहीं थे। इस पर पीड़ितों ने नाराजगी जताई।
सिटी मजिस्ट्रेट ने सभी से दस्तावेज जमा करने और पक्ष रखने को कहा। अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग की रजबहे के मध्य से कच्ची पटरी पर 20 फीट जमीन है। विभाग अपनी जमीन पूरी कर पीड़ितों की जमीन वापस कराएं। इसकी पुष्टि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से भी होती है। सूचना में रजबहे मेघछप्पर के चार मील फ्लांग से पांच मील फ्लांग पर पटरी की चौड़ाई के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। अपर खंड पूर्वी यमुना अधिशासी अभियंता की ओर से दी गई सूचना में बताया कि पटरी की चौड़ाई बांयी तरफ 35 फीट और दायी तरफ 20 फीट है।
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उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना की है। मामले में एंटीकरप्शन कोर्ट में मामला विचाराधीन है। अधिकारियों ने अभी तक अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है और न ही हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल किया है। आरोप लगाया कि फैक्टरी की दीवार को बचाने के लिए यह सब किया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले के निस्तारण के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। इस दौरान देशराज, जसपाल, करण सिंह, मदन सिंह, नरेंद्र, कंवरपाल, दिनेश, दिलीप सिंह, शमशेर सिंह, संजय कुमार, नरेश कुमार, नाथीराम, कलावती, अनारकली, विनीता देवी आदि रहीं।
जिलाधिकारी ने मामले के समाधान के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। पीड़ितों ने इस समिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों पर आरोप है उन्हें जांच करने की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है। सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले में दस्तावेज जमा करने और अपना पक्ष रखने के लिए पीड़ितों को 18 मई को बुलाया था। सोमवार को पीड़ित लोग अधिवक्ता राजकुमार के नेतृत्व में सिटी मजिस्ट्रेट से मिले। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य नहीं थे। इस पर पीड़ितों ने नाराजगी जताई।
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सिटी मजिस्ट्रेट ने सभी से दस्तावेज जमा करने और पक्ष रखने को कहा। अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि सिंचाई विभाग की रजबहे के मध्य से कच्ची पटरी पर 20 फीट जमीन है। विभाग अपनी जमीन पूरी कर पीड़ितों की जमीन वापस कराएं। इसकी पुष्टि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से भी होती है। सूचना में रजबहे मेघछप्पर के चार मील फ्लांग से पांच मील फ्लांग पर पटरी की चौड़ाई के संबंध में जानकारी मांगी गई थी। अपर खंड पूर्वी यमुना अधिशासी अभियंता की ओर से दी गई सूचना में बताया कि पटरी की चौड़ाई बांयी तरफ 35 फीट और दायी तरफ 20 फीट है।
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उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना की है। मामले में एंटीकरप्शन कोर्ट में मामला विचाराधीन है। अधिकारियों ने अभी तक अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है और न ही हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल किया है। आरोप लगाया कि फैक्टरी की दीवार को बचाने के लिए यह सब किया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट ने मामले के निस्तारण के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। इस दौरान देशराज, जसपाल, करण सिंह, मदन सिंह, नरेंद्र, कंवरपाल, दिनेश, दिलीप सिंह, शमशेर सिंह, संजय कुमार, नरेश कुमार, नाथीराम, कलावती, अनारकली, विनीता देवी आदि रहीं।