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Sambhal News: औद्योगिक गलियारे के लिए चार हजार किसानों से खरीदी जाएगी 306 हेक्टेयर भूमि
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Tue, 19 May 2026 02:20 AM IST
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संभल। गंगा एक्सप्रेसवे किनारे खिरनी जंक्शन के पास विकसित कराए जा रहे औद्योगिक गलियारे के लिए दूसरे चरण में 306 हेक्टेयर भूमि खरीदी जाएगी। करीब 4 हजार किसानों से यह भूमि खरीदी जाएगी। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि चकबंदी रिकॉर्ड से मिलान के बाद 1365 फसली वर्ष की खतौनी से और मिलान किया जाएगा। इसके बाद बैनामे कराए जाएंगे।
दरअसल, संभल जिले में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत अब तक चार गांवों में 222 हेक्टेयर के करीब भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। बाद में शासन की टीम ने इस औद्योगिक क्लस्टर को बढ़ाने का फैसला किया। जिसके बाद ही सौंधन मोहम्मदपुर, खरसफा और भमौरी पट्टी तक भूमि खरीदने की तैयारी की गई है। प्रशासन की टीम प्रभारी राजस्व निरीक्षक ओमकार गौड़ के निर्देशन में जमीन खरीदने के लिए होमवर्क पूरा कर चुकी है। लेकिन कोई गड़बड़ी न होने पाए, इस लिहाज से चकबंदी के अभिलेखों से चिन्हित करीब 1500 गाटों का मिलान हो रहा है। मिलान के दौरान देखा जा रहा है कि किसान की स्थिति, वास्तविक मौके के हालात व राजस्व रिकॉर्ड का एक जैसा ही है, या फिर कुछ अंतर है। अंतर मिलने में संबंधित गाटा संदिग्धता की श्रेणी में जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना शासन की महत्वाकांक्षी है। जिले का बड़ा रकवा लिया जा रहा है। ऐसे में जरा सी चूक समस्या पैदा कर सकती है। इसी के दृष्टिगत चकबंदी अभिलेखों से मिलान कराया जा रहा है। दरअसल, शासन की मंशा औद्योगिक गलियारे के माध्यम से क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देना है। यूपीडा के द्वारा एक्सप्रेसवे के मास्टर प्लान के अनुसार इसे विकसित किया जा रहा है, जिससे उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
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औद्योगिक गलियारा के बनने से तेजी से घूमेगा विकास का पहिया
संभल जिले में खिरनी मोहिउद्दीनपुर समेत छह गांवों में विकसित होने वाला यह औद्योगिक गलियारा संभल में विकास का पहिया तेजी से घूमेगा। क्योंकि हड्डी-सींग के हस्तशिल्प आइटम और मेंथा कारोबार संभल की पहचान है। करोड़ों रुपये का कारोबार हर साल होता है। ऐसे में औद्योगिक गलियारे में कारोबार स्थापित करने से कारोबार और रोजगार के पंख लग जाएंगे। दरअसल इस औद्योगिक क्षेत्र में प्रदेश और देश के साथ विदेश की कंपनी भी इकाई स्थापित कर सकती हैं। इससे भी रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे। संवाद
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औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए आंवटन प्रक्रिया जारी
औद्योगिक गलियारे में यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के द्वारा प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया जारी है। इसमें यूपीडा ने 12500 स्क्वायर मीटर प्लॉट का साइज तय किया है। इसमें 4640 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर तय है। इस प्लॉट को पाने के लिए 5.80 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। इसके अलावा अन्य खर्च को लगाकर छह करोड़ रुपये में 99 वर्ष की लीज पर प्लॉट आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे छोटा प्लॉट अभी तक आवंटित करने की कोई योजना नहीं है। छह करोड़ रुपये पांच वर्ष के दौरान 10 किस्तों में अदा करने हैं। बुकिंग के लिए पहली किस्त जमा कराई जा रही है।
दरअसल, संभल जिले में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत अब तक चार गांवों में 222 हेक्टेयर के करीब भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। बाद में शासन की टीम ने इस औद्योगिक क्लस्टर को बढ़ाने का फैसला किया। जिसके बाद ही सौंधन मोहम्मदपुर, खरसफा और भमौरी पट्टी तक भूमि खरीदने की तैयारी की गई है। प्रशासन की टीम प्रभारी राजस्व निरीक्षक ओमकार गौड़ के निर्देशन में जमीन खरीदने के लिए होमवर्क पूरा कर चुकी है। लेकिन कोई गड़बड़ी न होने पाए, इस लिहाज से चकबंदी के अभिलेखों से चिन्हित करीब 1500 गाटों का मिलान हो रहा है। मिलान के दौरान देखा जा रहा है कि किसान की स्थिति, वास्तविक मौके के हालात व राजस्व रिकॉर्ड का एक जैसा ही है, या फिर कुछ अंतर है। अंतर मिलने में संबंधित गाटा संदिग्धता की श्रेणी में जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना शासन की महत्वाकांक्षी है। जिले का बड़ा रकवा लिया जा रहा है। ऐसे में जरा सी चूक समस्या पैदा कर सकती है। इसी के दृष्टिगत चकबंदी अभिलेखों से मिलान कराया जा रहा है। दरअसल, शासन की मंशा औद्योगिक गलियारे के माध्यम से क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देना है। यूपीडा के द्वारा एक्सप्रेसवे के मास्टर प्लान के अनुसार इसे विकसित किया जा रहा है, जिससे उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
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औद्योगिक गलियारा के बनने से तेजी से घूमेगा विकास का पहिया
संभल जिले में खिरनी मोहिउद्दीनपुर समेत छह गांवों में विकसित होने वाला यह औद्योगिक गलियारा संभल में विकास का पहिया तेजी से घूमेगा। क्योंकि हड्डी-सींग के हस्तशिल्प आइटम और मेंथा कारोबार संभल की पहचान है। करोड़ों रुपये का कारोबार हर साल होता है। ऐसे में औद्योगिक गलियारे में कारोबार स्थापित करने से कारोबार और रोजगार के पंख लग जाएंगे। दरअसल इस औद्योगिक क्षेत्र में प्रदेश और देश के साथ विदेश की कंपनी भी इकाई स्थापित कर सकती हैं। इससे भी रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे। संवाद
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औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए आंवटन प्रक्रिया जारी
औद्योगिक गलियारे में यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के द्वारा प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया जारी है। इसमें यूपीडा ने 12500 स्क्वायर मीटर प्लॉट का साइज तय किया है। इसमें 4640 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर तय है। इस प्लॉट को पाने के लिए 5.80 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। इसके अलावा अन्य खर्च को लगाकर छह करोड़ रुपये में 99 वर्ष की लीज पर प्लॉट आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। इससे छोटा प्लॉट अभी तक आवंटित करने की कोई योजना नहीं है। छह करोड़ रुपये पांच वर्ष के दौरान 10 किस्तों में अदा करने हैं। बुकिंग के लिए पहली किस्त जमा कराई जा रही है।