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Sambhal News: मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्करों व सहायिकाओं ने दिया धरना
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संभल। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के बैनर तले शुक्रवार को तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी वर्करों और सहायिकाओं ने एकजुट होकर अपनी लंबित और जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार की नीतियों और वादों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार केवल आश्वासन मिला है, लेकिन अब वे अपना हक लेकर रहेंगी और चुप नहीं बैठेंगी।
जिलाध्यक्ष विनीता शर्मा ने कहा कि 50 वर्ष पूरे होने के बावजूद आंगनबाड़ी कर्मचारियों को मात्र छह हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। बढ़ती महंगाई के दौर में इतने कम मानदेय में जीवन यापन करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं को पूरी निष्ठा से लागू करती हैं, इसके बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा।
उन्होंने 62 वर्ष की सेवा अवधि और कई राज्यों में 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को न पेंशन मिलती है और न ही बीमा जैसी सुविधाएं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि शिक्षित महिलाओं को प्रमोशन का प्रलोभन देकर इस सेवा से जोड़ा गया, लेकिन 25 से 40 वर्षों की सेवा के बाद भी उन्हें न पेंशन, न ग्रेच्युटी और न ही अन्य लाभ मिल पा रहे हैं, जो उनके साथ अन्याय है।
इस दौरान सुधा, कविता, नीतू, विमलेश, कृष्णलता, नाजिया, तनवीर, कुसुम शर्मा, पुष्पा शर्मा आदि रहीं।
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जिलाध्यक्ष विनीता शर्मा ने कहा कि 50 वर्ष पूरे होने के बावजूद आंगनबाड़ी कर्मचारियों को मात्र छह हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। बढ़ती महंगाई के दौर में इतने कम मानदेय में जीवन यापन करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं को पूरी निष्ठा से लागू करती हैं, इसके बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा।
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उन्होंने 62 वर्ष की सेवा अवधि और कई राज्यों में 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को न पेंशन मिलती है और न ही बीमा जैसी सुविधाएं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि शिक्षित महिलाओं को प्रमोशन का प्रलोभन देकर इस सेवा से जोड़ा गया, लेकिन 25 से 40 वर्षों की सेवा के बाद भी उन्हें न पेंशन, न ग्रेच्युटी और न ही अन्य लाभ मिल पा रहे हैं, जो उनके साथ अन्याय है।
इस दौरान सुधा, कविता, नीतू, विमलेश, कृष्णलता, नाजिया, तनवीर, कुसुम शर्मा, पुष्पा शर्मा आदि रहीं।
