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Sambhal News: काली पट्टी बांधकर पढ़ी ईद की नमाज, अमेरिका-इस्राइल के खिलाफ नारे लगाए

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 01:26 AM IST
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Eid prayers offered wearing black armbands; slogans raised against the US and Israel.
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सिरसी/ओबरी। सिरसी और बुकनाला गांव में शिया समुदाय के लोगों ने ईद की नमाज काली पट्टी बांधकर अदा की। अमेरिका-इस्राइल मुर्दाबाद के नारे लगाकर विरोध जताया।
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इस दौरान लोगों ने कहा कि हमलों में शहीद हुए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई शिया समुदाय के बड़े धर्म गुरु थे। उनकी शहादत से लोग बहुत गमगीन हैं। इन दोनों स्थानों पर भले ही ईद मनाई गई, लेकिन सिर्फ सादगी के साथ। तमाम लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज तो अदा की ही, साथ ही पूरे दिन विरोध जताया। ईद पर जोश-खरोश के साथ नए-नए कपड़े पहने वाले बच्चे, या फिर बड़े इस बार पुराने कपड़ों में दिखाई दिए।
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सिरसी के मोहल्ला शर्की सादात में ईद की नमाज के बाद नमाजियों ने अमेरिका-इस्राइल मुर्दाबाद के नारे लगाए। शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना हसीन अख्तर जैदी ने कहा कि मासूमीन ने फरमाया है कि जिस दिन तुमने कोई गुनाह नहीं किया वह दिन ईद का दिन है। मस्जिद मोहल्ला शर्की सादात के इमाम मौलाना मीसम अब्बास ने कहा कि शैतान का काम है बहकाना और नेक बंदों का काम है उसके बहकावे में न आना।
ईदगाह मोहल्ला गर्बी, सुन्नी जामा मस्जिद, शिया जामा मस्जिद, मस्जिद ए जहरा, मस्जिद ए इमाम मेंहदी, मस्जिद हिलाल, मस्जिद काबा ए सानी मस्जिद मोहल्ला चौधरीयान, मस्जिद इमाम रजा, मस्जिद नवाबान, मस्जिद रजा अली, मस्जिद मोहल्ला किदवई, मस्जिद कुरैशीयान, मोती मस्जिद, नूरानी मस्जिद, मस्जिद नासिर मियां, मस्जिद मेराज आदि मस्जिदों में भी ईद की नमाज अदा की गई। दूसरी ओर, बुकनाला और इकरोटिया में खामनेई की शहादत का गम दिखा। ईद के मौके पर गांव बुकनाला के अलावा इकरोटिया में भी खामनेई की शहादत का गम दिखाई दिया।

काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ी, बाद में जुलूस निकाला

असमोली। गांव शाहपुर सिरपुडा में शिया समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की। इसके बाद जुलूस निकालकर खामनेई और उनके साथियों को याद किया। मौलाना अली अब्बास ने कहा कि खामनेई और मासूम बच्चों की शहादत हमेशा जुल्म के खिलाफ संदेश देती रहेगी। उन्होंने जुल्म के खिलाफ डटकर, बिना खौफ और बिना झुकाव के मुकाबला किया। उनकी जंग सरहदों की नहीं, बल्कि इंसाफ बनाम जुल्म की थी। उन्होंने इमाम हुसैन के रास्ते पर चलकर जुल्म के आगे झुकना मंजूर नहीं किया और अपनी शहादत दे दी। यह शहादत हम सभी को यह पैगाम देती है कि इंसाफ की राह पर चलना ही सच्ची इंसानियत है। इस दौरान मोहम्मद मियां, अखलाक मोहम्मद, अब्बास, साजेब हैदर, कामिल हसन, आदिल हुसैन आदि रहे। संवाद
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