पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   Government land worth over 100 crore was misappropriated during the SP regime.

Sambhal News: सपा शासन में हुआ था सौ करोड़ से ज्यादा की सरकारी जमीन का बंदरबांट

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 02:40 AM IST
विज्ञापन
Government land worth over 100 crore was misappropriated during the SP regime.
संभल। पालिका क्षेत्र के तख्तगुशाईन में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की ग्राम सभा की जमीन के बंदरबांट में चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं। जमीन को चकबंदी विभाग के माध्यम से सईदुल रहमान को पट्टे पर देने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने वर्ष 2013 में हाईकोर्ट से अपील वापस ले ली थी। माना जा रहा है कि एेसा सपा शासन में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष हकीम कौसर अहमद के इशारे पर हुआ था, जो तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां के घनिष्ठ रहे हैं।
विज्ञापन

इस मामले में तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता, तब उप संचालक चकबंदी (डीडीसी) रहे खेम सिंह खड़क समेत 31 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है, जबकि तत्कालीन पालिकाध्यक्ष भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस की जांच पूरी होने पर सपा शासन में हुई इस मनमानी से जुड़े कुछ और नाम तथा चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। यह रिपोर्ट राजस्व लेखपाल स्पर्श गुप्ता की ओर से दर्ज कराई गई है।
विज्ञापन

अफसरों ने बताया कि संभल-मुरादाबाद मार्ग पर स्थित इस 38 बीघा जमीन के ज्यादातर हिस्से पर ग्राम समाज का कब्जा हो गया है। अभी जिस जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है उनको नोटिस जारी किए गए हैं। यदि तय समय में यह कब्जे नहीं हटाए जाते हैं तो प्रशासन अगली कार्रवाई का निर्णय लेगा। फिलहाल बोन मिल के परिसर में कब्जे हटने शुरू हो गए हैं। अन्य किसी भी व्यावसायिक इस्तेमाल के कब्जे नहीं हटे हैं। इस बीच अफसरों की मौजूदा सख्ती से मामले से जुड़े कुछ लोगों के राहत की उम्मीद में हाईकोर्ट का रुख करने की बात भी चर्चा में है।
विज्ञापन
विज्ञापन

00000000000
फर्जी पट्टे और षड्यंत्र से चला खेल
प्रशासन के मुताबिक सईदुल रहमान ने 12 जुलाई 1967 के फर्जी पट्टा अभिलेख का उपयोग किया था। अपने पक्ष में 15 फरवरी 2008 को उप संचालक चकबंदी से नामांतरण आदेश पारित करा लिया था। इसके बाद तत्कालीन पालिका टीम हाईकोर्ट पहुंच गई थी। इसी याचिका को ही तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता ने वापस लिया था। इसमें पालिका के तत्कालीन मानचित्रक शाहबुद्दीन और पैरोकार माजिद खान भी शामिल बताए जा रहे हैं। माजिद खान का 30 जून मंगलवार को ही रिटायरमेंट हुआ है। हालांकि वह कार्रवाई की जद में आ चुके हैं।

0000000000

अधिकारी करते रहे जांच... आरोपियों तक नहीं पहुंची थी आंच
सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में लगातार शिकायतें दर्ज होती रहीं लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही थीं। आरोपियों तक प्रशासन की जांच ही नहीं पहुंच रही थी। करोड़ों रुपये की जमीन के बंदरबांट पर पालिका के तत्कालीन ईओ रामपाल सिंह और डिप्टी कलेक्टर रमेशबाबू ने भी जांच रिपोर्ट में कहा था कि सरकारी जमीन को कब्जा किया गया है। इसके बाद भी तब की जांच में कोई कार्रवाई न होने के पीछे भी बाद में ईओ के बदलाव और तब के पालिकाध्यक्ष की सपा नेता आजम खां की नजदीकी को कारण माना जा रहा है। 0000000


वाहन खरीद के गबन में भी पालिकाध्यक्ष के साथ थे तत्कालीन ईओ

पालिका में शासकीय धन के गबन करने के मामले में 18 दिसंबर वर्ष 2017 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत हुई थी। यह शिकायत पूर्व सभासद मुकेश शुक्ला ने दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि 2016 में पांच वाहनाें की खरीद की गई थी। जिसमें घोटाला गया। इस शिकायत की जांच के लिए डीएम ने कमेटी नियुक्त कर दी थी। जांच कमेटी ने इस मामले में 42 लाख रुपये का घोटाला होने की पुष्टि करते हुए वर्ष 2022 के जनवरी में पूर्व पालिकाध्यक्ष हकीम कौसर अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही इसमें तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता की भूमिका भी पाई गई थी। इस मामले के उजागर होने पर शासन ने राजकुमार गुप्ता को नगर निगम प्रयागराज के सहायक आयुक्त रहते हुए निलंबित कर दिया था। इस मामले में जांच कमेटी ने जेई जलकर, लेखाकार, लिपिक, लेखा लिपिक को भी दोषी माना था, लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। मामला फिर वहीं फाइलाें में दब गया।

00000000000

तत्कालीन शासन में थी खास पकड़, छह वर्ष रहा संभल में ईओ का कार्यकाल
राजकुमार गुप्ता की तैनाती वर्ष 2011 में जिला बनने के बाद ही पालिका में हुई थी। वह वर्ष 2017 तक रहे जब तक भाजपा का शासन शुरू नहीं हुआ। कहा जाता है कि उनकी पकड़ सपा शासन में ऐसी थी कि उनका एक ही कार्यकाल छह वर्ष तक संभल में रहा और उनको कहीं भेजा नहीं गया। जबकि तीन वर्ष बाद आम तौर पर ईओ स्तर के अधिकारियों के तबादले कर दिए जाते हैं लेकिन शासन में खास पकड़ होने के कारण छह वर्ष एक ही पालिका में गुजार दिए और मनमानी से काम किया गया। उसके चलते ही 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति कब्जा करा दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed