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Sambhal News: सामूहिक विवाह हेराफेरी में सीडीओ ने तलब की वास्तविक 1036 जोड़ों की फाइल
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मुरादाबाद। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में हुई हेराफेरी के मामले के बाद जिलास्तर पर तो कार्रवाई हुई लेकिन उच्चस्तरीय जांच का कोई परिणाम नहीं निकला है, अपात्र तो 37 जोड़े ही थे लेकिन जांच के कारण 1036 वास्तविक जोड़ों को भी विवाह अनुदान राशि नहीं मिल पाई है, जो करीब 6.21 करोड़ रुपए है। इस मामले में मुख्य विकास अधिकारी ने सोमवार को वास्तविक जोड़ों की फाइल को तलब किया और सभी वास्तविक जोड़ों को 60-60 हजार रुपये की दर विवाह अनुदान राशि स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।
जिले में चार व पांच दिसंबर को दो शादी समारोहों में 1640 जोड़ों का विवाह कराया गया था। योजना की धनराशि जिले में पहले से ही मौजूद थी, जिसके कारण विवाह समारोह के बाद ही 567 जोड़ों के खातों में 60-60 हजार रुपए की धनराशि भेज दी गई थी। इनमें कुछ वह जोड़े भी शामिल थे, जिन्हें बाद में अपात्र घोषित किया गया। सीडीओ के आदेश पर जांच कराई गई तो 37 जोड़े अपात्र पाए गए थे। इनसे धनराशि व उपहारों की वसूली के लिए नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन अभी तक पूरी धनराशि वसूल नहीं हो पाई है। जिलास्तर पर पंचायत व विकास विभाग के कर्मचारियों पर तो कार्रवाई हो गई लेकिन समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के रसूख के आगे उच्चस्तरीय जांच भी बेमानी साबित हुई। विभागीय अधिकारी भी जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसमें कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी ने भी संस्तुति सहित पत्र लिखा है। इस सबके बीच 1036 वास्तविक जोड़ों को भी विवाह अनुदान राशि नहीं मिल पा रही है, यह धनराशि 621.60 लाख रुपए है।
मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी से वास्तविक जोड़ों की फाइल को तलब किया। उन्होंने निर्देशित किया है कि वास्तविक जोड़ों को अतिशीघ्र विवाह अनुदान राशि को हस्तांतरित किया जाए। अपात्रों से धनराशि व उपहारों की वसूली भी की जाए।
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जिले में चार व पांच दिसंबर को दो शादी समारोहों में 1640 जोड़ों का विवाह कराया गया था। योजना की धनराशि जिले में पहले से ही मौजूद थी, जिसके कारण विवाह समारोह के बाद ही 567 जोड़ों के खातों में 60-60 हजार रुपए की धनराशि भेज दी गई थी। इनमें कुछ वह जोड़े भी शामिल थे, जिन्हें बाद में अपात्र घोषित किया गया। सीडीओ के आदेश पर जांच कराई गई तो 37 जोड़े अपात्र पाए गए थे। इनसे धनराशि व उपहारों की वसूली के लिए नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन अभी तक पूरी धनराशि वसूल नहीं हो पाई है। जिलास्तर पर पंचायत व विकास विभाग के कर्मचारियों पर तो कार्रवाई हो गई लेकिन समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के रसूख के आगे उच्चस्तरीय जांच भी बेमानी साबित हुई। विभागीय अधिकारी भी जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसमें कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी ने भी संस्तुति सहित पत्र लिखा है। इस सबके बीच 1036 वास्तविक जोड़ों को भी विवाह अनुदान राशि नहीं मिल पा रही है, यह धनराशि 621.60 लाख रुपए है।
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मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी से वास्तविक जोड़ों की फाइल को तलब किया। उन्होंने निर्देशित किया है कि वास्तविक जोड़ों को अतिशीघ्र विवाह अनुदान राशि को हस्तांतरित किया जाए। अपात्रों से धनराशि व उपहारों की वसूली भी की जाए।