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Sambhal News: कच्चे माल कीमत और भाड़ा बढ़ने से जूता-चप्पल कारोबार पर असर
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चंदौसी। ईरान-इस्राइल-अमेरिका के बीच युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी का असर आम आदमी के साथ-साथ विभिन्न कारोबारों पर भी पड़ता नजर आ रहा है। चंदौसी का जूता-चप्पल कारोबार भी मंदी की कगार पर पहुंचता दिख रहा है। पहले से ही जीएसटी के कारण चंदौसी के जूता-चप्पल कारोबार में लगातार गिरावट आ रही थी। वहीं अब पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में बढ़ोतरी ने कारोबार की कमर तोड़ दी है। साथ ही ट्रांसपोर्ट भाड़ा भी महंगा हो गया है।
चंदौसी के मोहल्ला चुन्नी में चमड़े से बनने वाले जूते-चप्पल और स्पोर्ट्स शूज का कारोबार कभी चरम पर था। यहां करीब 500 घरों में यह कारोबार होता था और 50 से अधिक बड़े कारखाने संचालित थे। कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद से कारोबार पहले ही काफी प्रभावित हो चुका था। अब गिने-चुने घरों में ही यह काम हो रहा है और केवल दो-तीन बड़ी इकाइयां ही बची हैं।
कारोबारियों ने बताया कि अब पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने से संकट और गहरा गया है। पेट्रोलियम पदार्थ से बनने वाला साॅल्यूशन (चिपकाने वाला पदार्थ), जो पहले पांच लीटर 1050 रुपये में आता था, अब 1175 रुपये का हो गया है। इसी तरह क्लीनर 100 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 130 रुपये प्रति लीटर, एईके (सोल की धुलाई के लिए) 140 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर और फिनिशिंग केमिकल 180 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 250 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं चमड़े को चिपकाने वाला पदार्थ, जो पहले पांच लीटर का पैक 650 रुपये का था, अब 1050 रुपये का हो गया है।
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कारोबारियों का कहना है कि इस उद्योग में रसोई गैस की भी जरूरत पड़ती है। लगातार बढ़ती महंगाई के चलते कारोबार प्रभावित हो रहा है और ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।
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दस प्रतिशत रह गया कारोबार
मुरादाबाद, बिलारी, बदायूं, बिसौली, बरेली व आंवला व चंदौसी के आसपास के क्षेत्र में काम होता था। कारोबारियों का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थ पर दाम बढ़ने से पहले ढाई लाख रुपये का कारोबार एक कारोबारी का प्रति माह हो जाता था। अब 10 प्रतिशत ही रह गया है।
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कारोबारी बोले-
पहले जीएसटी ने कारोबार प्रभावित किया और अब पेट्रोलियम पदार्थ पर महंगाई से कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। यही हाल रहा तो चंदौसी से चमड़े के जूते-चप्पल का कारोबार खत्म हो जाएगा।
- ओमप्रकाश, जूता कारोबारी
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मैं स्पोर्टस शूज का कारोबार करता हूं, जिसके लिए रसोई गैस की आवश्यकता रहती है। रसोई गैस का सिलेंडर महंगा मिल रहा है। जिससे कारोबार में पड़ता नहीं आ रहा और ऑर्डर भी नहीं मिल रहे। ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ है।
- अनिल कुमार, जूता कारोबारी
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पेट्रोलियम पदार्थ के दाम बढ़ने के कारण मुख्य रूप से ट्रांसपोर्ट और कच्चे माल की कीमतों में काफी उछाल आया है। इसके परिणाम स्वरूप जूते-चप्पल की निर्माण की लागत लगभग 15- 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। जिससे महंगाई होने से बाजार में गिरावट आई है।
- अनुराग अग्रवाल, जूता-चप्पल दुकानदार
चंदौसी के मोहल्ला चुन्नी में चमड़े से बनने वाले जूते-चप्पल और स्पोर्ट्स शूज का कारोबार कभी चरम पर था। यहां करीब 500 घरों में यह कारोबार होता था और 50 से अधिक बड़े कारखाने संचालित थे। कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद से कारोबार पहले ही काफी प्रभावित हो चुका था। अब गिने-चुने घरों में ही यह काम हो रहा है और केवल दो-तीन बड़ी इकाइयां ही बची हैं।
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कारोबारियों ने बताया कि अब पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने से संकट और गहरा गया है। पेट्रोलियम पदार्थ से बनने वाला साॅल्यूशन (चिपकाने वाला पदार्थ), जो पहले पांच लीटर 1050 रुपये में आता था, अब 1175 रुपये का हो गया है। इसी तरह क्लीनर 100 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 130 रुपये प्रति लीटर, एईके (सोल की धुलाई के लिए) 140 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 180 रुपये प्रति लीटर और फिनिशिंग केमिकल 180 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 250 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं चमड़े को चिपकाने वाला पदार्थ, जो पहले पांच लीटर का पैक 650 रुपये का था, अब 1050 रुपये का हो गया है।
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दस प्रतिशत रह गया कारोबार
मुरादाबाद, बिलारी, बदायूं, बिसौली, बरेली व आंवला व चंदौसी के आसपास के क्षेत्र में काम होता था। कारोबारियों का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थ पर दाम बढ़ने से पहले ढाई लाख रुपये का कारोबार एक कारोबारी का प्रति माह हो जाता था। अब 10 प्रतिशत ही रह गया है।
कारोबारी बोले-
पहले जीएसटी ने कारोबार प्रभावित किया और अब पेट्रोलियम पदार्थ पर महंगाई से कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। यही हाल रहा तो चंदौसी से चमड़े के जूते-चप्पल का कारोबार खत्म हो जाएगा।
- ओमप्रकाश, जूता कारोबारी
मैं स्पोर्टस शूज का कारोबार करता हूं, जिसके लिए रसोई गैस की आवश्यकता रहती है। रसोई गैस का सिलेंडर महंगा मिल रहा है। जिससे कारोबार में पड़ता नहीं आ रहा और ऑर्डर भी नहीं मिल रहे। ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ है।
- अनिल कुमार, जूता कारोबारी
पेट्रोलियम पदार्थ के दाम बढ़ने के कारण मुख्य रूप से ट्रांसपोर्ट और कच्चे माल की कीमतों में काफी उछाल आया है। इसके परिणाम स्वरूप जूते-चप्पल की निर्माण की लागत लगभग 15- 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। जिससे महंगाई होने से बाजार में गिरावट आई है।
- अनुराग अग्रवाल, जूता-चप्पल दुकानदार