संभल सपा में संग्राम: सांसद बर्क के पिता ने ठोंकी ताल, कहा-इकबाल से लोग नाराज, अब हम लड़ेंगे विधायक का चुनाव
संभल में सपा के दो दिग्गजों के बीच 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर फिर सियासी खींचतान शुरू हो गई है। सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क ने खुद को सपा उम्मीदवार बताते हुए चुनाव लड़ने का एलान किया। उधर विधायक इकबाल महमूद अपने बेटे सुहेल इकबाल को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। दोनों के बयानों से समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर टकराव बढ़ गया है।
विस्तार
संभल के पूर्व सपा सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन के बाद सांसद के चुनाव में ‘हम साथ-साथ हैं’ गुनगुनाने वाले संभल के सपा के दो दिग्गजों में फिर सियासी खींचतान शुरू हो गई है। डॉ. बर्क के बेटे और मौजूदा सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान ने 2027 के विधानसभा चुनाव में ताल ठोंकने का एलान अभी से कर दिया है, वह भी खुद को सपा उम्मीदवार बताते हुए।
दूसरी ओर मौजूदा सपा विधायक इकबाल महमूद इस बार खुद के बजाय अपने बेटे सुहेल इकबाल को मैदान में लाने की तैयारी में हैं। दोनों अगर अपने रुख पर कायम रहे तो सपा का चुनावी रथ फिर दो दिग्गजों की खेमेबंदी के बीच आगे बढ़ेगा। ममलूकुर्रहमान बर्क ने बृहस्पतिवार को अचानक राजनीतिक बयान जारी करके सभी को चौंका दिया।
मीडिया को दिए वक्तव्य में उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संभल क्षेत्र से मैं खुद सपा से चुनाव लड़ूंगा। पार्टी अध्यक्ष (अखिलेश यादव) भी अच्छी तरह जानते हैं कि हम चुनाव लड़ेंगे। अपनी बात को मजबूती देते हुए उन्होंने कहा कि संभल से सात बार के विधायक इकबाल महमूद से जनता नाराज है।
उन्होंने संभल के लिए कुछ नहीं किया। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी सारी जानकारी है। इस बार जनता हम पर भरोसा जता रही है, इसलिए हम चुनाव लड़ेंगे। विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल के सपा से चुनाव लड़ने की तैयारी पर ममलूकुर्रहमान बर्क ने कहा कि जनता क्या किसी को भी चुनाव लड़ा देगी।
सांसद के पिता का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। बर्क और इकबाल महमूद के समर्थक एक-दूसरे पर कमेंट और कटाक्ष कर रहे हैं। दूसरी ओर सपा विधायक इकबाल महमूद ने कहा-हमने लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद जियाउर्रहमान बर्क और उनके पिता ममलूकुर्रहमान बर्क के साथ जिम्मेदार लोगों के सामने यह वादा किया था कि हम दोनों एक दूसरे का चुनाव लड़ाएंगे।
हमने लोकसभा चुनाव उनके हक में लड़ाया भी है। अब सांसद जियाउर्रहमान ही अपने पिता के सवाल का जवाब दे सकते हैं। हमारा जो वादा है, फिलहाल हम उस पर ही यकीन करते हैं।
बुजुर्ग डॉ. बर्क के न रहने के बाद आई थी नरमी
डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन से कुछ पहले ही सपा ने उन्हें पार्टी उम्मीदवार घोषित कर दिया था, जबकि उस वक्त इकबाल महमूद समर्थक डॉ. बर्क को ज्यादा उम्रदराज बताकर एमपी के लिए उनके (इकबाल महमूद) सपाई टिकट की वकालत कर रहे थे।
डॉ. बर्क के निधन के बाद सपा की उम्मीदवारी का नए सिरे से सवाल उठा तो भी इकबाल महमूद सशक्त उम्मीदवार के रूप में पेश किए गए। उस समय जियाउर्रहमान बर्क कुंदरकी से सपा विधायक थे। लिहाजा इकबाल महमूद का दावा ज्यादा मजबूत माना जा रहा था।
उस बीच डॉ. बर्क के निधन पर अफसोस जताने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के संभल आने पर इस सीट को डॉ. बर्क की मजबूत विरासत बताया गया। गमगीन माहौल के बीच भी इतनी पैरवी रही कि अखिलेश ने वहीं जियाउर्रहमान को उम्मीदवार बता दिया।
हालांकि इसके बाद दोनों परिवारों को नजदीक लाने की एक अन्य पहल पर एक-दूसरे के चुनाव में विरोध न करने पर रजामंदी बनी। इसके बाद से पुरानी तल्खी की जगह नरमी का रुख बढ़ने लगा।
दशकों पुरानी अदावत है दोनों परिवारों में
संभल अरसे से सपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। सपा की इस मजबूती में भी बर्क और महमूद परिवारों की खेमेबंदी पार्टी अध्यक्ष से लेकर अन्य वरिष्ठ सपाइयों के लिए हमेशा बड़ी चिंता बनी रही। सपा के गठन से लेकर लंबी और मजबूत सियासी पारी का अनुभव रखने वाले मुलायम सिंह यादव भी इन दोनों दलीय नेताओं के दिलों को नहीं मिलवा सके थे।
सियासी लोग बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव की सक्रियता के दौर में उनके दबाव में ही सिर्फ एक बार डॉ. बर्क और इकबाल महमूद एक मंच पर नजर आए थे। इसके बाद भी दोनों कभी एक-दूसरे के चुनाव में सहयोगी रुख से आगे नहीं आए।
इसके उलट दोनों के बीच एक-दूसरे के मुखालिफ चुनाव लड़ने या लड़ाने के उदाहरण दर्ज हैं। दोनों परिवारों के बीच यह अदावत उस वक्त से है जब संभल के चुनावी मैदान में इकबाल महमूद के पिता नवाब महमूद चुनाव लड़ते थे।