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श्रीराम कथा : सती चरित्र का प्रसंग सुनकर भक्तों ने लगाए जयकारे
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चंदौसी(संभल)। बहजोई रोड स्थित चंदा देवी धर्मशाला में बुधवार को श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। पहले दिन कथावाचक वीरेश रामायणी ने सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
कथाव्यास ने बताया कि त्रेता युग में माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम व्याकुल होकर उनकी खोज में वन-वन भटक रहे थे। भगवान शंकर ने श्रीराम को देखते ही मन ही मन उनकी जय-जयकार की, लेकिन माता सती को यह विश्वास नहीं हुआ कि श्रीराम ही परमात्मा हैं।
कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव द्वारा बार-बार समझाने के बाद भी जब माता सती का भ्रम दूर नहीं हुआ तो उन्होंने स्वयं श्रीराम की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। तब माता सती, मां सीता का वेश धारण कर भगवान श्रीराम के समक्ष पहुंची गईं, लेकिन श्रीराम ने उन्हें तुरंत पहचान लिया और प्रणाम करते हुए भगवान शिव का समाचार पूछा। यह देखकर माता सती लज्जित होकर श्रीराम के ऐश्वर्य को समझते हुए भगवान शिव के पास लौट गईं। अंत में माता सती ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए भगवान शिव से क्षमा याचना की। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम में जेवी सिंह, रोहताश कुमार, रमेश अधीर, लवकुश अग्रवाल, विपिन कुमार, सपना सिंह, सुमन शर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद
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कथाव्यास ने बताया कि त्रेता युग में माता सीता के हरण के बाद भगवान श्रीराम व्याकुल होकर उनकी खोज में वन-वन भटक रहे थे। भगवान शंकर ने श्रीराम को देखते ही मन ही मन उनकी जय-जयकार की, लेकिन माता सती को यह विश्वास नहीं हुआ कि श्रीराम ही परमात्मा हैं।
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कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव द्वारा बार-बार समझाने के बाद भी जब माता सती का भ्रम दूर नहीं हुआ तो उन्होंने स्वयं श्रीराम की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। तब माता सती, मां सीता का वेश धारण कर भगवान श्रीराम के समक्ष पहुंची गईं, लेकिन श्रीराम ने उन्हें तुरंत पहचान लिया और प्रणाम करते हुए भगवान शिव का समाचार पूछा। यह देखकर माता सती लज्जित होकर श्रीराम के ऐश्वर्य को समझते हुए भगवान शिव के पास लौट गईं। अंत में माता सती ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए भगवान शिव से क्षमा याचना की। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम में जेवी सिंह, रोहताश कुमार, रमेश अधीर, लवकुश अग्रवाल, विपिन कुमार, सपना सिंह, सुमन शर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद
