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Sambhal News: कहीं सड़क नहीं तो कहीं पानी...बदहाली से जूझ रहे ग्रामीण
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संभल। जिले के उन गांवों की भी तस्वीर अब तक नहीं बदली है, जो प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल हैं। कहने को तो यह गांव 2021-22 में चयनित किए गए थे। चार साल गुजरने के बाद भी यहां कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ है। अनुसूचित जाति बहुल गांवों की तस्वीर बदलने की चाल बेहद सुस्त है। कहीं सड़कों पर जलभराव है तो कहीं गंदगी के अंबार हैं। कई गांव ऐसे हैं, जहां पानी की भी आपूर्ति तक नहीं है। हैंडपंप लगे हैं तो उनका पानी पीने लायक नहीं है।
वर्ष 2021-22 में जिले के 69 गांवों का चयन किया गया था। दो चरण के दौरान गांवों का चयन हुआ था। पहले चरण में 49 और दूसरे चरण में 20 गांव शामिल थे। जिला समाज कल्याण विभाग का दावा है कि 33 गांवों में यूपी सिडको के द्वारा काम पूरा कर प्रमाणपत्र दे दिया गया है। 16 गांवों में सत्यापन किया जा रहा है। 20 गांवों में काम चल रहा है। योजना में शामिल हुए 69 गांवों को चार साल बीत गए हैं। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना में शामिल होने के बाद भी काम इतनी सुस्ती से क्यों चल रहा है।
ग्रामीण क्या बोले
हमारे गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल गांव होने के बाद भी बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
आजाद, गांव पौटा
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गांव में न बेहतर सड़क हैं और न नालियां। जो नालियां बनी हैं वह बंद पड़ी हैं। गांव की कोई सड़क बेहतर नहीं है। कई वर्ष पहले गांव का चयन किया गया था। सहूलियत तो अब तक नहीं दिखती है।
अरविंद, गांव दरियापुर बंद
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गांव में जलभराव और कीचड़ की स्थिति है। किसी मोहल्ले में सुविधाएं नहीं है। पीएम आदर्श ग्राम योजना में गांव चार वर्ष पहले चयनित किया गया था। सुविधाएं कहीं नहीं दिखती हैं।
जितेंद्र, हरदासपुर
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गांव में पानी की व्यवस्था हुई नहीं है। अब तक खड़ंजे ही हैं। जो सड़क है, वह टूटी पड़ी है। गांव में पीएम आदर्श ग्राम योजना का लाभ किसी जाति को नहीं मिला है।
खिलेंद्र चौधरी, गांव दरियापुर बंद
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जिले के 69 गांव पीएम आदर्श ग्राम योजना में शामिल हैं। यूपी सिडको द्वारा 33 गांवों में काम पूरा करने का प्रमाणपत्र शासन को भेजा है। 20 गांवों में काम चल रहा है और 16 का सत्यापन किया जा रहा है।
तिनेज कुमार, समाज कल्याण अधिकारी, संभल
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वर्ष 2021-22 में जिले के 69 गांवों का चयन किया गया था। दो चरण के दौरान गांवों का चयन हुआ था। पहले चरण में 49 और दूसरे चरण में 20 गांव शामिल थे। जिला समाज कल्याण विभाग का दावा है कि 33 गांवों में यूपी सिडको के द्वारा काम पूरा कर प्रमाणपत्र दे दिया गया है। 16 गांवों में सत्यापन किया जा रहा है। 20 गांवों में काम चल रहा है। योजना में शामिल हुए 69 गांवों को चार साल बीत गए हैं। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना में शामिल होने के बाद भी काम इतनी सुस्ती से क्यों चल रहा है।
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ग्रामीण क्या बोले
हमारे गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में शामिल गांव होने के बाद भी बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
आजाद, गांव पौटा
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गांव में न बेहतर सड़क हैं और न नालियां। जो नालियां बनी हैं वह बंद पड़ी हैं। गांव की कोई सड़क बेहतर नहीं है। कई वर्ष पहले गांव का चयन किया गया था। सहूलियत तो अब तक नहीं दिखती है।
अरविंद, गांव दरियापुर बंद
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गांव में जलभराव और कीचड़ की स्थिति है। किसी मोहल्ले में सुविधाएं नहीं है। पीएम आदर्श ग्राम योजना में गांव चार वर्ष पहले चयनित किया गया था। सुविधाएं कहीं नहीं दिखती हैं।
जितेंद्र, हरदासपुर
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गांव में पानी की व्यवस्था हुई नहीं है। अब तक खड़ंजे ही हैं। जो सड़क है, वह टूटी पड़ी है। गांव में पीएम आदर्श ग्राम योजना का लाभ किसी जाति को नहीं मिला है।
खिलेंद्र चौधरी, गांव दरियापुर बंद
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जिले के 69 गांव पीएम आदर्श ग्राम योजना में शामिल हैं। यूपी सिडको द्वारा 33 गांवों में काम पूरा करने का प्रमाणपत्र शासन को भेजा है। 20 गांवों में काम चल रहा है और 16 का सत्यापन किया जा रहा है।
तिनेज कुमार, समाज कल्याण अधिकारी, संभल
