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Sambhal News: न्यायिक आयोग ने भी माना...1978 के दंगे से पड़ा हिंदू आबादी पर बड़ा असर
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संभल। सन 78 के संभल दंगे में झुलसे परिवार 48 साल गुजर जाने के बाद भी तब के जख्मों को भुला नहीं सके हैं। यही वजह है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में हुए बवाल के बाद गठित न्यायिक जांच आयोग के समक्ष कुछ पीड़ित परिवारों ने अपनी बात भी रखी थी। इनकी आपबीती सुनने के बाद आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सन 78 समेत अन्य वर्षों में हुए संभल के दंगों का उल्लेख किया था। माना है कि 78 के दंगे के बाद से संभल में हिंदू-मुस्लिम आबादी का अनुपात बिगड़ गया था और तब बहुसंख्यक रहे हिंदू धीरे-धीरे अल्पसंख्यक की श्रेणी में पहुंच गए थे।
संभल बवाल की जांच के क्रम में न्यायिक जांच आयोग ने 23 जनवरी 2025 को संभल का दूसरा दौरा किया था। आयोग ने संभल में 24 नवंबर 2024 के बवाल के संबंध में बयान दर्ज किए थे। इस दौरान वे कई परिवार भी आयोग के समक्ष पहुंचे जो सन 78 के दंगे से प्रभावित थे। इन लोगों ने सन 78 में अपने परिजनों पर गुजरे घटनाक्रम को बताते हुए कहा था कि असल दंगा पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला। इन्होंने खुद के लिए मुआवजे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आयोग ने इन परिवारों की शिकायतों को गंभीरता से सुना था।
आयोग की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में 1978 के दंगे का प्रभाव पूरी तरह हिंदू आबादी पर पड़ने का उल्लेख है। कहा गया है कि इस एक दंगे से हिंदू आबादी में भारी कमी आई। तमाम हिंदुओं ने भयभीत होकर अपने मकान छोड़ दिए थे। कुछ परिवार तो शहर ही छोड़कर दूसरे स्थानों पर बसने को मजबूर हुए थे। आयोग के स्तर से दंगे को डेमोग्रेफिक बदलाव का बड़ा कारण माना गया है।
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खग्गू सराय के 40 रस्तोगी परिवारों ने छोड़ दिया था घर
संभल के लोग बताते हैं कि 1978 के दंगे के बाद ही मोहल्ला खग्गू सराय के 40 रस्तोगी परिवारों ने खुद को असुरक्षित मानकर अपना घर छोड़ दिया था। मोहल्ले के एक मंदिर में स्थायी रूप से ताला लग गया था। पूजन बंद हो जाने से इस मंदिर के काफी हिस्से पर अवैध कब्जा भी हो गया था। 1978 के दंगे में मारे गए रामशरण दास रस्तोगी के पोते कपिल रस्तोगी ने बताया कि 24 नवंबर 2024 के बवाल के बाद उन्होंने परिवार के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उस समय उन्होंने 1978 के दंगे की पूरी कहानी बताई थी। तब से ही शासन इस दंगे को लेकर गंभीर बना हुआ। इसके बाद पुनर्वास के तहत 100 वर्गमीटर का पट्टा शेरखां सराय में कपिल रस्तोगी की मां रुक्मणी रस्तोगी को चार जून को आवंटित किया गया था। हालांकि 78 के दंगे से प्रभावित कई परिवारों को अभी पुनर्वास के लिए पट्टा और इंसाफ मिलने का इंतजार बाकी है।
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औने-पौने दामों पर बेचने पड़े थे मकान
पुराने लोग बताते हैं कि आजादी के पहले से लेकर बाद के वर्षों तक संभल 15 बार बड़े दंगों की आग में झुलस चुका है। 1978 के दंगे का संभल की हिंदू आबादी पर बड़ा असर पड़ा था। इससे जन्मी दहशत और असुरक्षा के कारण हिंदू परिवारों को औने-पाैने दामों पर अपने मकान बेचकर दूसरे मोहल्लों या शहरों का रुख करना पड़ा था।
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46 वर्ष बाद खुले थे मंदिर के कपाट, पूजा हुई थी शुरू
खग्गू सराय में 1978 के दंगे से घबराकर जब रस्तोगी परिवारों ने मोहल्ला छोड़ा तो वहां के शिव मंदिर के कपाट बंद हो गए थे। 46 वर्ष तक यह बंद ही रहे थे। 24 नवंबर 2024 के बवाल बाद जब पुलिस- प्रशासन सक्रिय हुआ तो मंदिर के कपाट खोले गए। उसके बाद से श्रद्धाु लगातार मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं।
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जामा मस्जिद के इमाम की हत्या के बाद भड़का था 1976 का दंगा
वर्ष 1976 में संभल में जामा मस्जिद के इमाम की हत्या हो गई थी। यह जानकारी जैसे ही शहर में फैली तो दंगा भड़क गया था। हालांकि आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया था लेकिन इसके बाद भी सियासी दखलंदाजी के कारण दंगा नहीं रोका जा सका था। इस दंग में लूटपाट और आगजनी की कई घटनाएं हुई थीं।
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इन वर्षों में दंगों में झुलसा संभल
संभल में 1936, 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 में दंगे का इतिहास दर्ज है। बाद में वर्ष 2019 सीएए की मुखालफत के दौरान पुलिस और पब्लिक के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 2024 में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में पांच लोगों की जान गई थी। एक का पोस्टमार्टम न होने से सरकारी रिकॉर्ड में चार की मौत दर्ज है।
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संभल बवाल की जांच के क्रम में न्यायिक जांच आयोग ने 23 जनवरी 2025 को संभल का दूसरा दौरा किया था। आयोग ने संभल में 24 नवंबर 2024 के बवाल के संबंध में बयान दर्ज किए थे। इस दौरान वे कई परिवार भी आयोग के समक्ष पहुंचे जो सन 78 के दंगे से प्रभावित थे। इन लोगों ने सन 78 में अपने परिजनों पर गुजरे घटनाक्रम को बताते हुए कहा था कि असल दंगा पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला। इन्होंने खुद के लिए मुआवजे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आयोग ने इन परिवारों की शिकायतों को गंभीरता से सुना था।
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आयोग की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में 1978 के दंगे का प्रभाव पूरी तरह हिंदू आबादी पर पड़ने का उल्लेख है। कहा गया है कि इस एक दंगे से हिंदू आबादी में भारी कमी आई। तमाम हिंदुओं ने भयभीत होकर अपने मकान छोड़ दिए थे। कुछ परिवार तो शहर ही छोड़कर दूसरे स्थानों पर बसने को मजबूर हुए थे। आयोग के स्तर से दंगे को डेमोग्रेफिक बदलाव का बड़ा कारण माना गया है।
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खग्गू सराय के 40 रस्तोगी परिवारों ने छोड़ दिया था घर
संभल के लोग बताते हैं कि 1978 के दंगे के बाद ही मोहल्ला खग्गू सराय के 40 रस्तोगी परिवारों ने खुद को असुरक्षित मानकर अपना घर छोड़ दिया था। मोहल्ले के एक मंदिर में स्थायी रूप से ताला लग गया था। पूजन बंद हो जाने से इस मंदिर के काफी हिस्से पर अवैध कब्जा भी हो गया था। 1978 के दंगे में मारे गए रामशरण दास रस्तोगी के पोते कपिल रस्तोगी ने बताया कि 24 नवंबर 2024 के बवाल के बाद उन्होंने परिवार के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। उस समय उन्होंने 1978 के दंगे की पूरी कहानी बताई थी। तब से ही शासन इस दंगे को लेकर गंभीर बना हुआ। इसके बाद पुनर्वास के तहत 100 वर्गमीटर का पट्टा शेरखां सराय में कपिल रस्तोगी की मां रुक्मणी रस्तोगी को चार जून को आवंटित किया गया था। हालांकि 78 के दंगे से प्रभावित कई परिवारों को अभी पुनर्वास के लिए पट्टा और इंसाफ मिलने का इंतजार बाकी है।
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औने-पौने दामों पर बेचने पड़े थे मकान
पुराने लोग बताते हैं कि आजादी के पहले से लेकर बाद के वर्षों तक संभल 15 बार बड़े दंगों की आग में झुलस चुका है। 1978 के दंगे का संभल की हिंदू आबादी पर बड़ा असर पड़ा था। इससे जन्मी दहशत और असुरक्षा के कारण हिंदू परिवारों को औने-पाैने दामों पर अपने मकान बेचकर दूसरे मोहल्लों या शहरों का रुख करना पड़ा था।
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46 वर्ष बाद खुले थे मंदिर के कपाट, पूजा हुई थी शुरू
खग्गू सराय में 1978 के दंगे से घबराकर जब रस्तोगी परिवारों ने मोहल्ला छोड़ा तो वहां के शिव मंदिर के कपाट बंद हो गए थे। 46 वर्ष तक यह बंद ही रहे थे। 24 नवंबर 2024 के बवाल बाद जब पुलिस- प्रशासन सक्रिय हुआ तो मंदिर के कपाट खोले गए। उसके बाद से श्रद्धाु लगातार मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं।
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जामा मस्जिद के इमाम की हत्या के बाद भड़का था 1976 का दंगा
वर्ष 1976 में संभल में जामा मस्जिद के इमाम की हत्या हो गई थी। यह जानकारी जैसे ही शहर में फैली तो दंगा भड़क गया था। हालांकि आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया था लेकिन इसके बाद भी सियासी दखलंदाजी के कारण दंगा नहीं रोका जा सका था। इस दंग में लूटपाट और आगजनी की कई घटनाएं हुई थीं।
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इन वर्षों में दंगों में झुलसा संभल
संभल में 1936, 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 में दंगे का इतिहास दर्ज है। बाद में वर्ष 2019 सीएए की मुखालफत के दौरान पुलिस और पब्लिक के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 2024 में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में पांच लोगों की जान गई थी। एक का पोस्टमार्टम न होने से सरकारी रिकॉर्ड में चार की मौत दर्ज है।