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Sant Kabir Nagar News: 1700 मीटर जमीन के पेच में फंसा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण
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मलोरना में सर्विस रोड के लिए गिराई गई मिट्टी। संवाद
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद-बांसी रेल परियोजना में बस्ती हाईवे के मलोरना में बनाया जाने वाला ओवरब्रिज 1700 मीटर जमीन के पेच में फंस गया है। स्थिति यह है कि पुल निर्माण से पहले बनाई जा रही सर्विस रोड का काम भी जमीन का मामला नहीं सुलझने के चलते धीमा हो गया है। वहीं जमीन के मुआवजे को लेकर कुछ किसानों ने कोर्ट में याचिका भी दायर कर दी है। इससे यह मामला और भी उलझ गया है। हालांकि जिला प्रशासन की कोशिश है कि किसानों से बातचीत कर मसले को किसी तरह सुलझा लिया जाए।
खलीलाबाद-बहराइच रेल परियोजना के तहत प्रथम चरण में जिला मुख्यालय से बांसी तक काम शुरू है। इस कार्य को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसी के तहत बस्ती हाईवे के मलोरना में रेलवे की तरफ से ओवरब्रिज बनाया जाना है। पुल निर्माण के समय वाहनों का आवागमन प्रभावित न हो, इसके लिए सर्विस रोड बनाया जा रहा है, लेकिन जमीन के पेच के चलते दोनों ही काम प्रभावित हो रहे हैं।
सर्विस रोड का धीमा होने से पुल निर्माण का इंतजार बढ़ता जा रहा है। दरअसल एनएचएआई ने जिस जमीन को अपना बताकर फाइल रेलवे को सौंपी थी, उस पर स्थानीय किसान अपना मालिकाना हक होने का दावा कर रहे हैं। खलीलाबाद-बस्ती लेन पर 1700 मीटर के दायरे की जमीन पर कई जगहों पर पेड़ काटने का काम रुका है।
किसान अपने-अपने गाटा संख्या का मुआवजा मांग रहे हैं। इसमें कुछ किसान कोर्ट में याचिका भी दायर चुके हैं। अब जमीन के पूरे मामले से संबंधित फाइल जिला प्रशासन के पास है, जिसे वह सुलझाने में लगे हैं। मलोरना में पुल व सर्विस रोड का काम देख रहे साइड इंचार्ज सत्तार अली का कहना है कि यदि जमीन का मामला साफ रहता तो अब तक सर्विस रोड का ज्यादा काम हो गया होता। अब हम लोग जमीन का मामला सुलझने के इंतजार में हैं। जितनी जल्दी यह मसला हल हो जाएगा, उतना ही काम में तेजी आ जाएगी।
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एनएचएआई के हाथ पीछे खींचने से उलझा मामला
1700 मीटर की जिस जमीन पर किसान अपने मालिकाना हक दावा कर रहे हैं, उसे रेलवे को फाइल सौंपते समय एनएचएआई ने अपना बताया था। सूत्रों के मुताबिक बाद में एनएचएआई ने केवल हाईवे की जमीन को अपना बताया। बाकी की जमीन से हाथ पीछे खींच लिया। बाद में रेलवे ने जब उस जमीन पर काम शुरू करना चाहा तो किसान उसे अपना बताने लगे। उनका कहना है कि 2006 में जब इस हाईवे का चौड़ीकरण हुआ तब भी हमें मुआवजा नहीं मिला। साइड इंचार्ज सत्तार अली कहते हैं कि इसी कारण काम रुका है। जहां विवाद नहीं है वहां काम कराया जा रहा है।
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गौरा में रेलवे स्टेशन का निर्माण शुरू
खलीलाबाद से यह नई रेल लाइन बहराइच तक बनाई जाएगी। प्रथम चरण में बांसी तक 54 किलोमीटर की दूरी में काम कराया जा रहा है। मलोरना में सड़क के नीचे अंडरपास का काम पूरा हो गया है। अब सड़क बनाने के लिए मिट्टी पटाई का काम चल रहा है। वहीं बखिरा-सांथा में रेल पटरी बिछाने के लिए मिट्टी पटाई का काम तेजी से कराया जा रहा है। इस रेल मार्ग पर मलोरना से देवडाड़ तक 9.4 किमी तक का काम जेपीडब्ल्यू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड करा रही है। कंपनी को इस दूरी में ग्रामीण सड़कों पर 10 पुल बनाने हैं। इसमें पांच का काम पूरा हो गया। तीन जगहों पर काम चल रहा है, जबकि दो स्थानों पर अभी स्वीकृति नहीं मिली है। बखिरा से आगे सांथा में रेल पटरी बिछाने के लिए मिट्टी पटाई का काम चल रहा है। खलीलाबाद-बांसी के बीच चार जगहों पर रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया जाएग। गौरा गांव में रेलवे स्टेशन का निर्माण शुरू हो गया है। यहां पिलर की ढलाई का काम चल रहा है। गौरा से समदा गांव तक रेल पटरी बिछाने के लिए मिट्टी गिराकर उसे समतल करा दिया गया है। गौरा गांव के पास अंडरपास का भी काम पूरा कर लिया गया है।
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खलीलाबाद-बहराइच रेल परियोजना के तहत प्रथम चरण में जिला मुख्यालय से बांसी तक काम शुरू है। इस कार्य को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसी के तहत बस्ती हाईवे के मलोरना में रेलवे की तरफ से ओवरब्रिज बनाया जाना है। पुल निर्माण के समय वाहनों का आवागमन प्रभावित न हो, इसके लिए सर्विस रोड बनाया जा रहा है, लेकिन जमीन के पेच के चलते दोनों ही काम प्रभावित हो रहे हैं।
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सर्विस रोड का धीमा होने से पुल निर्माण का इंतजार बढ़ता जा रहा है। दरअसल एनएचएआई ने जिस जमीन को अपना बताकर फाइल रेलवे को सौंपी थी, उस पर स्थानीय किसान अपना मालिकाना हक होने का दावा कर रहे हैं। खलीलाबाद-बस्ती लेन पर 1700 मीटर के दायरे की जमीन पर कई जगहों पर पेड़ काटने का काम रुका है।
किसान अपने-अपने गाटा संख्या का मुआवजा मांग रहे हैं। इसमें कुछ किसान कोर्ट में याचिका भी दायर चुके हैं। अब जमीन के पूरे मामले से संबंधित फाइल जिला प्रशासन के पास है, जिसे वह सुलझाने में लगे हैं। मलोरना में पुल व सर्विस रोड का काम देख रहे साइड इंचार्ज सत्तार अली का कहना है कि यदि जमीन का मामला साफ रहता तो अब तक सर्विस रोड का ज्यादा काम हो गया होता। अब हम लोग जमीन का मामला सुलझने के इंतजार में हैं। जितनी जल्दी यह मसला हल हो जाएगा, उतना ही काम में तेजी आ जाएगी।
एनएचएआई के हाथ पीछे खींचने से उलझा मामला
1700 मीटर की जिस जमीन पर किसान अपने मालिकाना हक दावा कर रहे हैं, उसे रेलवे को फाइल सौंपते समय एनएचएआई ने अपना बताया था। सूत्रों के मुताबिक बाद में एनएचएआई ने केवल हाईवे की जमीन को अपना बताया। बाकी की जमीन से हाथ पीछे खींच लिया। बाद में रेलवे ने जब उस जमीन पर काम शुरू करना चाहा तो किसान उसे अपना बताने लगे। उनका कहना है कि 2006 में जब इस हाईवे का चौड़ीकरण हुआ तब भी हमें मुआवजा नहीं मिला। साइड इंचार्ज सत्तार अली कहते हैं कि इसी कारण काम रुका है। जहां विवाद नहीं है वहां काम कराया जा रहा है।
गौरा में रेलवे स्टेशन का निर्माण शुरू
खलीलाबाद से यह नई रेल लाइन बहराइच तक बनाई जाएगी। प्रथम चरण में बांसी तक 54 किलोमीटर की दूरी में काम कराया जा रहा है। मलोरना में सड़क के नीचे अंडरपास का काम पूरा हो गया है। अब सड़क बनाने के लिए मिट्टी पटाई का काम चल रहा है। वहीं बखिरा-सांथा में रेल पटरी बिछाने के लिए मिट्टी पटाई का काम तेजी से कराया जा रहा है। इस रेल मार्ग पर मलोरना से देवडाड़ तक 9.4 किमी तक का काम जेपीडब्ल्यू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड करा रही है। कंपनी को इस दूरी में ग्रामीण सड़कों पर 10 पुल बनाने हैं। इसमें पांच का काम पूरा हो गया। तीन जगहों पर काम चल रहा है, जबकि दो स्थानों पर अभी स्वीकृति नहीं मिली है। बखिरा से आगे सांथा में रेल पटरी बिछाने के लिए मिट्टी पटाई का काम चल रहा है। खलीलाबाद-बांसी के बीच चार जगहों पर रेलवे स्टेशन का निर्माण कराया जाएग। गौरा गांव में रेलवे स्टेशन का निर्माण शुरू हो गया है। यहां पिलर की ढलाई का काम चल रहा है। गौरा से समदा गांव तक रेल पटरी बिछाने के लिए मिट्टी गिराकर उसे समतल करा दिया गया है। गौरा गांव के पास अंडरपास का भी काम पूरा कर लिया गया है।

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